मंदिर हो या घर, नहीं चाहिए बालिका वधू या वर। WWW.JANSWAR.COM

ऊखीमठ में फिर रुकवाया गया एक बाल विवाह, प्रशासन और पुलिस की तत्परता से बचा नाबालिग का भविष्य।

ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग:- रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ क्षेत्र में एक बार फिर प्रशासन और संबंधित विभागों की सक्रियता से बाल विवाह रुकवाने में सफलता मिली। जानकारी के अनुसार बाल विकास परियोजना अधिकारी ऊखीमठ देवेश्वरी कुंवर को सूचना प्राप्त हुई कि ऊखीमठ के निकट भोलेश्वर मंदिर में एक नाबालिग का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही उन्होंने अपने कार्यालय से राजेंद्र सिंह नेगी एवं अनुज जोशी को मौके पर भेजकर मामले की पुष्टि करवाई। इसके बाद मामले की जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अखिलेश मिश्र को दी गई, जिनके निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट तथा थाना ऊखीमठ को सूचित किया गया। थाना प्रभारी मनोज नेगी के निर्देश पर उप निरीक्षक पूजा और कांस्टेबल धीरेन्द्र भी मंदिर परिसर पहुंचे।

मौके पर पहुंची संयुक्त टीम ने दोनों पक्षों के परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणामों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। टीम ने बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है तथा ऐसा करने पर दोनों पक्षों के अभिभावकों को दो वर्ष तक का कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही नाबालिग बालिका से विवाह करने की स्थिति में लड़के पर पॉक्सो अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

समझाइश के बाद दोनों पक्षों के परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए विवाह रोकने पर सहमति जताई तथा लिखित आश्वासन दिया कि बालिका के बालिग होने के बाद ही विवाह संपन्न कराया जाएगा।

प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े विभागों ने लोगों से अपील की है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने में सहयोग करें तथा ऐसी किसी भी सूचना की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें।