देहरादून: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने ‘मैं उत्तराखण्ड हूँ’ कॉनक्लेव में लिया भाग। WWW.JANSWAR.COM

(अरुणाभ रतूड़ी जनश्वर)

राज्यपाल ने ‘मैं उत्तराखण्ड हूँ’ कॉनक्लेव में कहा- उत्तराखण्ड की पहचान इसकी सांस्कृतिक विरासत है।

देहरादून:- राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने रविवार को देहरादून में ओहो रेडियो द्वारा आयोजित “मैं उत्तराखण्ड हूँ” कॉनक्लेव में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने उत्तराखण्ड की मातृशक्ति, युवाओं, शिक्षा, शोध एवं सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

  राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति और बेटियों की मेहनत, साहस और प्रतिभा ने हमेशा प्रदेश को नई दिशा दी है। मुझे गर्व है कि हमारी बेटियां अपने कौशल और क्षमताओं से न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में वे उत्तराखण्ड को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।

  उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड को प्रकृति ने योग, आयुर्वेद, शहद, अरोमा और वेलनेस जैसे अनमोल उपहार दिए हैं। इन प्राकृतिक व सांस्कृतिक संपदाओं का सही उपयोग कर इन्हें आर्थिक अवसरों में बदलना हमारी जिम्मेदारी है। इससे प्रदेश को वैश्विक पहचान मिलेगी और विकास के नए रास्ते खुलेंगे।

  राज्यपाल ने शिक्षा और शोध (रिसर्च) के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देहरादून और उत्तराखण्ड आज देश और विदेश के छात्रों के लिए शिक्षा का प्रमुख केन्द्र बन चुके हैं। यहां की बड़ी-बड़ी शैक्षणिक और शोध संस्थाएं प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। हमें रिसर्च और इनोवेशन की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा, ताकि नई खोज और नए विचारों से प्रदेश और देश आगे बढ़ सके।

  युवाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे युवा हर क्षेत्र में आगे हैं। जरूरत है कि वे समय के साथ नई तकनीकें सीखें और अपनाएं। आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कम्प्यूटिंग और मेटावर्स का है। अगर हम इन तकनीकों में दक्ष हो जाएं तो निश्चित ही प्रदेश और देश की प्रगति में बड़ा योगदान कर सकते हैं।

  योग और अध्यात्म पर उन्होंने कहा कि देवभूमि की पहचान पूरी दुनिया में योगभूमि के रूप में हो रही है। “योग और आयुर्वेद’’ के मेल से स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई क्रांति लाई जा सकती है। कोविड में हम सभी ने देखा है कि किस प्रकार योग पर आयुर्वेद को अपनाया। हमारी आध्यात्मिक धरोहर हमेशा से मानव जीवन को शांति, संतुलन और जागृति का मार्ग दिखाती आई है। हमें इसे और मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय खेलों, जी-20 सम्मेलन, ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट और आपदा प्रबंधन सम्मेलन जैसे आयोजनों में उत्तराखण्ड ने जो पहचान बनाई है, वह हमारे लिए गर्व का विषय है।