तृतीय नवरात्रि: माँ दुर्गा के शक्ति स्वरूप की आराधना। WWW.JANSWAR.COM

तृतीय नवरात्रि: माँ दुर्गा के शक्ति स्वरूप की आराधना।

(अरुणाभ रतूड़ी):- नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में नौ दिनों तक चलने वाला एक महान उत्सव है, जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में तीसरा दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना होती है। आइए जानते हैं इस दिन के महत्व, पूजन विधि और लाभ के बारे में।

माँ चंद्रघंटा कौन हैं?माँ दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है, जिनके मस्तक पर चंद्रमा की प्रतीक घंटा सुशोभित होती है। इनकी पूजा तृतीय नवरात्रि को की जाती है। माँ का रूप शांत लेकिन शक्तिशाली है – कमर से नीचे सिंह पर सवार, दस भुजाओं में शस्त्र धारण किए हुए। चंद्रमा की शीतलता और घंटे की ध्वनि इनके प्रतीक हैं, जो भक्तों को शांति, साहस और विजय प्रदान करते हैं। पुराणों में वर्णन है कि इन्होंने महिषासुर आदि राक्षसों का संहार किया।

तृतीय नवरात्रि का महत्वआध्यात्मिक महत्व: –यह दिन साधक को तपस्या का मार्ग दिखाता है। माँ चंद्रघंटा भक्तों को आंतरिक शक्ति देती हैं, जो जीवन की हर चुनौती पर विजय दिलाती है।ज्योतिषीय लाभ: चंद्रमा से संबंधित होने से यह दिन मन की शांति, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख के लिए शुभ है। विवाह, संतान प्राप्ति और रोग निवारण के लिए पूजा विशेष फलदायी।सांस्कृतिक परंपरा: उत्तर भारत, खासकर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में इस दिन कन्या पूजन और गरबा का आयोजन होता है। घरों में घी के दीप जलाए जाते हैं।पूजन विधि: सरल स्टेप्सप्रतिमा स्थापना: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मंदिर में माँ चंद्रघंटा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।कलश पूजन: कलश में जल भरकर चंदन, फूल चढ़ाएं।

घंटी बजाकर मंत्र जाप करें – ॐ देव्यै च विद्महे दुर्गायै च धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।आरती और भोग: सफेद फूल, दूध, दही का भोग लगाएं। आरती के बाद कन्याओं को भोजन दान करें।व्रत नियम: फलाहार करें, तामसिक भोजन त्यागें। रात्रि में जागरण करें।तृतीय नवरात्रि पर माँ चंद्रघंटा की कृपा से भक्तों का जीवन चंद्रमा की भांति शीतल और उज्ज्वल हो जाता है। इस दिन की साधना से न केवल शारीरिक बल मिलता है, बल्कि आत्मिक शांति भी प्राप्त होती है। नवरात्रि की शुभकामनाएं!