सोमनाथ मंदिर: आस्था की जीत और सनातन परंपरा की अमर गाथा -डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल। WWW.JANSWAR.COM

सनातन संस्कृति की अक्षुण्ण परंपरा का प्रतीक है सोमनाथ मंदिर: डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल।

ऋषिकेश:-ऋषिकेश विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने कार्यकर्ताओं के साथ सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास एवं सनातन संस्कृति की अक्षुण्ण परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1026 ईस्वी में मोहम्मद गजनवी द्वारा भगवान सोमनाथ के मंदिर पर आक्रमण किया गया, इसके बाद भी इस आस्था के प्रतीक मंदिर पर अनेक बार आक्रमण हुए, लेकिन सनातन परंपरा के अनुसार हर बार इसका जीर्णोद्धार हुआ।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सनातन धर्म न आदि है न अंत, और उसी निरंतरता का प्रतीक सोमनाथ मंदिर लगभग 1000 वर्षों की कठिन यात्रा के बाद आज भव्य एवं दिव्य स्वरूप में खड़ा है। उन्होंने बताया कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य नवंबर 1947 में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के मार्गदर्शन में आरंभ हुआ तथा 1951 में यह पूर्ण हुआ। आज इसके पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, जो प्रत्येक सनातनी के लिए गर्व का विषय है।

इस अवसर पर डॉ. अग्रवाल ने कहा कि हजार वर्षों के इस कालखंड में सनातन की आस्था कभी कम नहीं हुई, पूजा-पाठ एवं परंपराएं निरंतर चलती रहीं और आज सोमनाथ मंदिर विश्वभर में आस्था का केंद्र बनकर स्थापित है।

सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्ष पूर्ण होने एवं 75 वर्ष के पुनर्निर्माण की स्मृति में ऋषिकेश स्थित सोमेश्वर मंदिर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया गया, विधिवत आरती संपन्न हुई तथा श्रद्धालुओं में मिष्ठान वितरण कर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यह अवसर सनातन संस्कृति की जीवंतता, दृढ़ता और आस्था का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देता रहेगा।
इस अवसर पर मनोज ध्यानी,दीपक बिष्ट, संजीव पाल, कविता शाह, सुधा अशवाल आदि मौजूद रहे