कात्यायनी माता: विवाह की कामना पूरी करने वाली शक्ति स्वरूपा।
(अरुणाभ रतूड़ी):- नवरात्रि के छठे दिन शारदीय नवरात्रि में भक्त माँ कात्यायनी की आराधना करते हैं। इन्हें विवाह की बाधाओं को दूर करने वाली देवी माना जाता है। महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर इनका अवतरण हुआ, इसलिए नाम पड़ा कात्यायनी। सिंह की सवारी करने वाली यह माता सिंहनी जैसी तेजस्वी और शौर्यपूर्ण हैं।
द्वापर युग की लीला: गोपियों ने किया कृष्ण वरण
द्वापर युग में ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना तट पर माँ कात्यायनी की ही कठोर तपस्या की। उनकी मनोकामना पूरी हुई और कृष्ण ने उन्हें वर रूप में स्वीकार किया। यह कथा बताती है कि सच्ची भक्ति से माँ हर असंभव को संभव बना देती हैं।
पूजा विधि: सरल और प्रभावी उपाय
जल्दी उठें और स्नान करें: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर माँ को गंगाजल से स्नान कराएँ।
रूप: माँ का स्वरूप सुनहरा पीला, चार भुजाएँ—तलवार, कमल, अमृत कलश और वर मुद्रा में।
मंत्र जाप: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः का 108 बार जाप करें। पीले वस्त्र, पीले फूल और मिश्री का भोग लगाएँ।
विवाह योग्य कन्याएँ: कुंवारी कन्याएँ पीले वस्त्र पहनकर पूजा करें, विवाह की मनोकामना पूरी होगी।
कात्यायनी माता के आशीर्वाद से सुखी गृहस्थ जीवन
माँ कात्यायनी भक्तों को शत्रु नाश, रोग निवारण और सौभाग्य प्रदान करती हैं। नवरात्रि में इनकी पूजा से जीवन की हर बाधा दूर होती है। आज के समय में भी युवतियाँ विवाह के योग्य वर की कामना से इनका व्रत रखती हैं।
