श्री हनुमान जन्मोत्सव: भक्ति फैलाएं ,संस्कृति बचाएं।
(अरुणाभ रतूड़ी):- हनुमान जन्मोत्सव, जिसे हनुमान जयंती के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के सबसे प्रिय पर्वों में से एक है। चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार भगवान श्री हनुमान के जन्म का उत्सव है। श्री राम के परम भक्त, बल, बुद्धि और भक्ति के प्रतीक हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति ही जीवन का आधार है। इस अवसर पर ‘भक्ति फैलाएं 🔱, संस्कृति बचाएं 🕉️’ का संदेश हर घर तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।
हनुमान जी का जन्म कैलाश पर्वत पर हुआ था। पवन पुत्र के रूप में प्रसिद्ध हनुमान जी बचपन में ही सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास करने के कारण शापित हुए, लेकिन उनकी शक्ति और भक्ति ने उन्हें अमर बना दिया। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने उन्हें ‘महावीर विक्रम बजरंगी’ कहा है। आज के युग में, जब आधुनिकता की चकाचौंध में हमारी सनातन संस्कृति खतरे में है, हनुमान जन्मोत्सव हमें जागृत करता है। भक्ति फैलाकर हम न केवल व्यक्तिगत शांति प्राप्त करते हैं, बल्कि अपनी धरोहर को भी संरक्षित करते हैं।
इस पर्व पर घर-घर हनुमान चालीसा का पाठ, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण होता है। मंदिरों में लाखों भक्त बजरंग बली के दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं। उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में यह उत्सव विशेष उत्साह से मनाया जाता है, जहां लोकगीत और नृत्य संस्कृति को जीवंत करते हैं। लेकिन आज चुनौतियां हैं – वेस्टर्न कल्चर का प्रभाव, सोशल मीडिया पर फालतू कंटेंट का बोलबाला। हमें हनुमान जी की भक्ति को वायरल बनाना होगा। व्हाट्सएप, फेसबुक पर हनुमान चालीसा शेयर करें, बच्चों को रामायण की कथाएं सुनाएं।
संस्कृति बचाना मतलब परंपराओं को जीवित रखना। हनुमान जी की तरह मजबूत बनें – संकटों से लड़ें, राम भक्ति में लीन रहें। इस जन्मोत्सव पर संकल्प लें: रोज हनुमान चालीसा पढ़ें, मंदिर जाएं, और संस्कृति के प्रचार में योगदान दें। जय बजरंग बली! जय श्री राम! 🔱🕉️
