मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने बिलखेत में किया प्रथम नयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल का उद्घाटन।#मुख्यसचिव ने की मुख्यमंत्री सीमा क्षेत्र विकास योजना के सम्बन्ध में उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक की अध्यक्षता।#एम्स ऋषिकेश में गर्भाशय कैंसर उन्मूलन विषय पर आयोजित बेबिनार में विस्तृत चर्चा। पढिए Janswar.Com में।

समाचार प्रस्तुति-अरुणाभ रतूड़ी

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने किया प्रथम नयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल का उद्घाटन बिलखेत में किया गया राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग एक्यूरेसी प्रतियोगिता का शुभारम्भ।लगभग 27 करोड़ रूपये की कल्जीखाल विकासखण्ड की पेयजल योजना का लोकार्पण।नयार घाटी में पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण केन्द्र खोला जायेगा-मुख्यमंत्रीनयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल का आयोजन हर साल किया जायेगा-मुख्यमंत्री   

 मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बिलखेत, पौड़ी में प्रथम नयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल का उद्घाटन किया एवं राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग एक्यूरेसी प्रतियोगिता का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 26 करोड़ 83 लाख 64 हजार रूपये की कल्जीखाल विकासखण्ड की पेयजल योजना का लोकार्पण किया। इस योजना से 02 हजार 370 पेयजल संयोजन दिये गये हैं। योजना का लाभ 59 राजस्व ग्रामों, 19 ग्राम पंचायतों एवं 68 बस्तियों को मिलेगा। इसका श्रोत नयार नदी है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नयार घाटी में पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण केन्द्र खोला जायेगा। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी पौड़ी को जमीन ढ़ूढने के निर्देश दिये। नयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल का आयोजन हर साल किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलखेत में स्कूल का सौन्दर्यीकरण किया जायेगा। द्वारीखाल में खेल के मैदान का समतलीकरण किया जायेगा।

उत्तराखण्ड में साहसिक खेलों के लिए पर्याप्त संभावनाएं
     मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि 19 से 22 नवम्बर 2020 तक इस फेस्टिवल में अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। जिसमें पैराग्लाइंडिंग, 170 किमी की माउंटेन बाइकिंग ट्रेल रनिंग स्पर्धा एवं एंग्लिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने अनेक राज्यों से आये प्रतियोगियों का देवभूमि उत्तराखण्ड में स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड को प्रकृति ने सब कुछ दिया है। आज आवश्यकता है तो इन प्राकृतिक सम्पदाओं का सही तरीके से उपयोग हो। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार पर्यटन के क्षेत्र में दुनिया में सबसे अधिक संभावनाएं एडवेंचर के क्षेत्र में है, और इसमें रोजगार की भी अपार संभावनाएं है। उत्तराखण्ड में साहसिक खेलों के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं। उत्तराखण्ड में पर्यटन, फिल्म, ग्रामीण क्षेत्रों के विकास एवं स्वास्थ्य सुविधाओं पर राज्य सरकार का विशेष ध्यान है। प्रत्येक जनपद में थीम बेस्ड डेस्टिनेशन विकसित किये जा रहे हैं। पूरे प्रदेशवासियों को अटल आयुष्मान योजना से आच्छादित करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है। इसके लिए भारत सरकार की ओर से उत्तराखण्ड को सम्मानित भी किया गया।

सरकार की योजनाओं की जानकारी जिलाधिकारी ब्लॉक लेबल पर जाकर देंगे
     मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य सरकार स्वरोजगार की दिशा में अनेक प्रयास कर रही है। इसके लिए राज्य में सीएम स्वरोजगार योजना शुरू की गई। इसके तहत 150 प्रकार के कार्यों को शामिल किये गये हैं। किसानों को 03 लाख तक का ब्याज मुक्त एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को 05 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण दे रही है। सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का सभी को फायदा मिले, इसके लिए सभी जिलाधिकारी ब्लॉक लेबल तक जाकर इन योजनाओं की जानकारी लोगों को देंगे। जिला स्तरीय उच्च अधिकारी ब्लॉक लेबल पर जाकर सरकार की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करेंगे। सीएम हैल्पलाईन नम्बर 1905 पर 65 प्रतिशत लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। सीएम डेशबोर्ड की गतिविधियों की लोगों को भी जानकारी रहे, इसके लिए अगले माह सीएम डेशबोर्ड जनता के लिए खोला जायेगा।

विकास के लिए पुरूषों एवं महिलाओं का समान रूप से आगे बढ़ना जरूरी
     मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि किसी भी देश, प्रदेश व समाज के विकास के लिए पुरूषों एवं महिलाओं का समान रूप से आगे बढ़ना जरूरी है। प्रदेश का सर्वांगीण विकास तभी होता है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में भी तीव्र गति से विकास हो। राज्य सरकार ने कल कैबिनेट में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया, उत्तराखण्ड में पति की सम्पति में महिलाओं का सह अधिकार मिले ताकि उन्हें भी सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए लोन लेने में कोई परेशानी न हो। हमें अपने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना होगा। इन उत्पादों को अपग्रेड करना होगा और व्यावसायिक गुण विकसित करने होंगे।

आगामी तीन साल में माँ बहिनों के सिर से घास की गठरी का उतारेंगे बोझ
     मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जिस प्रकार आज हर घर में गैस का सिलेण्डर पहुंच रहा है उसी तरह 30 किलो घास की गठरी भी तीन साल में हर घर तक पहुंचाने की व्यवस्था किये जाने के निर्देश अधिकारियों को दिये गए हैं। उन्होंने कहा कि आज घास लेने के लिये जहां हमारी माँ बहिने जगंल या अन्य स्थानों पर जाती है तो उन्हें पहाड़ी से गिरने, जंगली जानवरों का एवं नदी में बहने का खतरा बना रहता है। हम उन्हें इन खतरों से भी बचायेंगे तथा घास की व्यवस्था उनके आंगन तक उपलब्ध करायेंगे।

कृषि के क्षेत्र में राज्य सरकार ने साढ़े तीन वर्षों 100 से अधिक निर्णय लिये
     कृषि मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी के नेतृत्व में पिछले साढ़े तीन साल में कृषि के क्षेत्र में 100 से अधिक निर्णय लिये। 2017 में राज्य सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री जी का सपना था कि प्रत्येक न्याय पंचायत में एक-एक फार्म मशनरी बैंक हो। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आशीर्वाद से सभी 670 स्थापित किये गये। किसानों को 80 प्रतिशत सब्सिडी पर कृषि यंत्र दिये गये। इन तीन सालों में इन मशीनों की सहायता से राज्य में कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई। भारत सरकार द्वारा कृषि कर्मणा पुरस्कार से उत्तराखण्ड को सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने हमारे परम्परागत बीजों को मान्यता दी है। अब इन बीजों पर भी 50 प्रतिशत सब्सिडी किसानों को मिलेगी। उत्तराखण्ड में ऑगर्निक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 6400 कलस्टर स्वीकृत हुए हैं। 15 हजार कलस्टर की सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि उत्तराखण्ड को ऑगर्निक स्टेट के रूप में विकसित किया जाय।
     इस अवसर पर उच्च शिक्षा एवं सहकारिता राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सांसद श्री तीरथ सिंह रावत, विधायक श्री मुकेश कोली, जिलाध्यक्ष भाजपा पौड़ी श्री संपत सिंह रावत, ब्लॉक प्रमुख श्रीमती बीना राणा, जिलाधिकारी पौड़ी श्री धीराज गर्ब्याल, एसएसपी पौड़ी श्रीमती रेणुका देवी आदि उपस्थित थे।


मुख्यसचिव ने की मुख्यमंत्री सीमा क्षेत्र विकास योजना के सम्बन्ध में उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक की अध्यक्षता।

मुख्य सचिव श्री ओमप्रकाश की अध्यक्षता में गुरूवार को मुख्यमंत्री सीमा क्षेत्र विकास योजना के सम्बन्ध में उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान सम्पर्क मार्ग, पुल निर्माण, लघु उद्यमों एवं ग्रोथ सेंटर्स हेतु मशीनों की स्थापना, क्लस्टर के आधार पर कृषि आदान प्रदान यंत्र वितरण, स्मार्ट क्लासेज, कोल्ड स्टोरेज एवं पॉलीहाउस निर्माण जैसी विभिन्न प्रस्तावों को स्वीकृति दी गय
मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री सीमान्त क्षेत्र विकास योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के 05 जनपदों के 09 सीमान्त विकासखण्डों में रह रहे परिवारों को मूलभूत सुविधाओं के साथ ही आजीविका एवं स्वरोजगार के बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत 10 से 50 किमी पर अवस्थित गावों को आच्छादित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सीमान्त क्षेत्रों से पलायन रोकना एवं रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए इसमें ऐसी योजनाओं को शामिल किया जाए, जिनसे इन क्षेत्रों में रह रहे लोगों को  अधिकतम रोजगार उपलब्ध हो सके।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना के माध्यम से आजीविका पर अधिक फोकस किया जाए। उन्होंने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण, ग्रोथ सेंटर्स, फार्म मशीनरी बैंक, स्वयं सहायता समूहों आदि के विकास पर भी फोकस किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्रीमती मनीषा पंवार, सचिव श्री आर.के. सुधांशु एवं श्रीमती सौजन्या भी उपस्थित थीं।


एम्स ऋषिकेश में गर्भाशय कैंसर उन्मूलन विषय पर आयोजित बेबिनार में विस्तृत चर्चा।

अखिल भाारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग और गाईनोकोलॉजी ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में देशभर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर उन्मूलन विषय पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन गाईनोलाॅजिक ऑन्कोलाॅजिस्ट प्रोफेसर शालिनी राजाराम ने किया।

चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने टीकाकरण, स्क्रीनिंग और उपचार के दृष्टिकोण से जुड़े सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने 90 -70-90 इस ट्रिपल नीति के बारे में प्रस्ताव दिया है, कि सभी देश 2030 से पहले इस नीति को लागू करें। कहा गया है कि 15 साल से कम उम्र की कम से कम 90 प्रतिशत किशोरियों का टीकाकरण करने से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पर्याप्त रोकथाम हो सकती है जबकि 35 से 45 वर्ष की आयु में बच्चेदानी के मुंह कैंसर की रोकथाम के लिए विशेषज्ञ से कम से कम दो बार जांच करानी अनिवार्य है।

वेबिनार को संबोधित करते हुए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में जागरुकता के अभाव में सर्वाइकल कैंसर की ज्यादा शिकायत रहती है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी की पर्याप्त रोकथाम के लिए जरूरी है कि किशोरियों को टीकाकरण के प्रति जागरुक किया जाए। उन्होंने कहा 9 से 14 साल की आयु के बीच की किशोरियों के टीकाकरण के लिए व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता है। हमें गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मजबूत प्रयास करने होंगे।

डीन एकेडमिक्स और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित 90 प्रतिशत महिलाएं इसके इलाज के लिए कीमो रेडिएशन विधि का उपयोग कर रही हैं हालांकि, एम्स ऋषिकेश में विकिरण चिकित्सा द्वारा उपचार के लिए मरीजों की लगभग एक वर्ष की लंबी प्रतीक्षा अवधि चल रही है। उन्होंने बताया कि सर्जिकल उपचार प्रदान करने के लिए गाइनोकोलॉजिक ऑन्कोलॉजिस्ट की संख्या और राज्य में सर्वाइकल कैंसर की व्यापक कैंसर देखभाल प्रदान करने के लिए विकिरण केंद्रों की संख्या अपर्याप्त है। लिहाजा इसे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

नेशनल हेल्थ मिशन उत्तराखंड की निदेशक डाॅ. अंजलि नौटियाल ने सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि एएनएम सहित लगभग 5304 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को स्क्रीनिंग के लिए एसिटिक एसिड विधि के साथ दृश्य निरीक्षण में प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले में हमें जल्द ही राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करना चाहिए।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय कार्यक्रम निदेशक डा. सरोज नैथानी ने कहा कि यह कार्यक्रम राज्य में निश्चिततौर से सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि हमारे पास 10,000 से अधिक आशा कार्यकर्ता हैं, जो टीकाकरण और स्क्रीनिंग के संदेश को दूरदराज के गांवों में पहुंचा सकते हैं।

एम्स ऋषिकेश की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. जया चतुर्वेदी ने बताया कि गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर मुख्यत: ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है, जो कि यौन जनित इन्फैक्शन है। इससे बचाव के लिए उन्होंने विवाह देरी से करने, यौन शिक्षा व सुरक्षित यौन विधियों के अभ्यास पर जोर दिया।

विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. अनुपमा बहादुर ने कहा कि विभिन्न स्क्रीनिंग विधियों पर प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टरों, नर्सों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की जरुरत पर प्रकाश डाला।

एम्स नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. सुरेश के. शर्मा ने सुझाव दिया कि कॉलेज में एडमिशन से पहले एचपीवी वैक्सीन अनिवार्य किया जाना चाहिए और दूरदराज के क्षेत्रों तक टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए पैरामेडिकल स्टाफ को और प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नर्सिंग छात्रों को सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए पूर्णरूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।

संस्थान की सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना ने कहा कि स्कूल स्तर पर स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वारा एचपीवी टीकाकरण के माध्यम से लगभग 60 प्रतिशत लड़कियों को लक्षित किया जा सकता है। इसके अलावा जो लड़कियां स्कूल नहीं जा पा रही हैं, उन्हें राज्य के विभिन्न एनजीओ के माध्यम से लक्षित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा एसिटिक एसिड के साथ दृश्य निरीक्षण का उपयोग कर गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच की योजना तैयार की गई है। जिसे लागू करने की आवश्यकता है।

माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. प्रतिमा गुप्ता ने एचपीवी परीक्षण के विभिन्न तौर- तरीकों पर चर्चा की। कहा कि बिंदुवार देखभाल परीक्षण के माध्यम से इस बारे में 1 से 2 घंटे में परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

ऑन्कोपैथोलॉजिस्ट डा. प्रशांत दुर्गापाल और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डा. अमित सेहरावत ने उत्तराखंड में सर्वाइकल कैंसर के वर्तमान आंकड़ों पर चर्चा की, उन्होंने बताया कि एम्स, ऋषिकेश में अस्पताल और राज्य कैंसर रजिस्ट्री शुरू की गई है। देहरादून सोसाइटी ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी की अध्यक्ष डा. मीनू वैश्य ने कहा कि निजी चिकित्सक और उनकी एसोसिएशन पहले से ही उत्तराखंड के विभिन्न स्कूलों में इस कैंसर के बारे में जागरुकता फैला रहे हैं और लड़कियों का टीकाकरण का कार्य कर रहे हैं।

वेबिनार को कैंसर नियंत्रण, डब्ल्यूएचओ-आईएआरसी, ल्योन फ्रांस के विशेष सलाहकार और विजिटिंग साइंटिस्ट डा. आर. शंकरनारायणन ने भी संबोधित किया। उन्होंने अपने लम्बे अनुभव और ज्ञान को साझा करते हुए कहा कि सर्वाइकल कैंसर की प्रवृत्ति का अध्ययन करने के लिए राज्य को कम से कम 5 साल के लिए एक अस्पताल और जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि 9 से 14 वर्ष की आयु की सभी किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन की कम से कम एक खुराक जरूर लगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का एचपीवी वैक्सीन अभी तीसरे चरण के परीक्षण में है और हम जल्द ही एक प्रभावी और सस्ती भारतीय वैक्सीन प्राप्त करने वाले हैं। गर्भाशय ग्रीवा के प्री-इनवेसिव और इनवेसिव रोग की पहचान के लिए अति संवेदनशील परीक्षण के साथ 30 साल के बाद ही महिलाओं की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चेदानी के कैंसर के स्थायी उपचार के लिए सर्जिकल और विकिरण सुविधाओं को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

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