आध्यात्मिक चेतना का महापर्व: श्री मणीकूट पर्वत परिक्रमा यात्रा 2026।
यमकेश्वर/नीलकंठ धाम:-(अरुणाभ रतूड़ी)-सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा और पौराणिक लोक-संस्कृति के संगम का साक्षी बनने जा रहा है— श्री मणीकूट पर्वत। आगामी 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को ‘आमलकी एकादशी’ के पावन अवसर पर इस वर्ष की भव्य परिक्रमा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, शरीर और आत्मा के संतुलन का जीवंत संदेश है।
आमलकी एकादशी: मोक्ष और आरोग्य का मार्ग:- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर व्रत और परिक्रमा करने से न केवल पापों का शमन होता है, बल्कि सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति भी होती है। शास्त्र कहते हैं कि इस दिन नि:स्वार्थ भाव से किया गया दान ‘सात्विक दान’ की श्रेणी में आता है, जो सीधे श्रीहरि विष्णु की कृपा का पात्र बनाता है।
“दातव्यमिति यद्दानम दियतेणनुपकारिणे। देशे काले च पात्रे च द्ततानम सात्विक॑ समृतम।।”
दो स्वरूपों में सजेगा श्रद्धा का कारवां
इस वर्ष परिक्रमा यात्रा को दो विशेष स्वरूपों में आयोजित किया जा रहा है, जिससे युवा ऊर्जा और वरिष्ठों की श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा:
- पैदल पदयात्रा (शक्ति और भक्ति का कठिन मार्ग)
- दूरी: 60 किलोमीटर (लगभग 14-15 घंटे)
- नेतृत्व: साध्वी पूज्य सरायगढ़ माई जी
विवरण: ब्रह्ममुहूर्त में प्रातः 3:00 बजे श्रद्धालु पांडव गुफा में एकत्रित होंगे। ढोल-दमाऊ और मशकबीन की पारंपरिक धुनों के बीच, भक्त अपने पितरों और कुलदेवताओं का स्मरण कर गरुड़चट्टी की ओर प्रस्थान करेंगे। यह पैदल मार्ग अपनी दिव्यता और क्षेत्रीय संस्कृति की भव्यता के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।
- वाहन यात्रा (दिव्य अलौकिकता का अनुभव)
- नेतृत्व: पूज्य संत राही बाबा जी
विवरण: प्रातः 7:00 बजे सूर्यदेव की प्रथम किरणों के साथ वाहनों का काफिला पांडव गुफा से शक्ति द्वार की ओर बढ़ेगा। इस टोली में कई भक्त ‘मौन व्रत’ धारण कर आसपास की सकारात्मक ऊर्जा और अनंत उमंग का अनुभव करेंगे।
आत्म-विश्लेषण: क्यों खास है यह यात्रा?
श्री मणीकूट पर्वत की यह परिक्रमा हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा देती है। आधुनिकता की दौड़ में जहां मनुष्य प्रकृति से दूर हो रहा है, वहीं यह 60 किलोमीटर का सफर आत्म-चिंतन और शारीरिक शुद्धि का अवसर प्रदान करता है। लोक-संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ यह यात्रा जन-कल्याण और सामूहिक सद्भाव का प्रतीक है।
मुख्य आकर्षण एवं जानकारी
विवरण महत्वपूर्ण सूचना
तिथि 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
शुभ योग सर्वार्थ सिद्धि योग एवं आमलकी एकादशी
स्थान पांडव गुफा से प्रारंभ (श्री मणीकूट पर्वत)
विशेष अन्नदान, वस्त्र दान एवं जरूरतमंदों की सेवा
