नवरात्रि चतुर्थी: मां कुष्मांडा की आराधना से घर आएगी समृद्धि व स्वास्थ्य। WWW.JANSWAR.COM

नवरात्रि चतुर्थी: मां कुष्मांडा की आराधना से घर आएगी समृद्धि व स्वास्थ्य।

(अरुणाभ रतूड़ी):- मां कुष्मांडा: नवरात्रि की चतुर्थ शक्तिमां कुष्मांडा देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में चौथी हैं, जो नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाती हैं। उनका नाम ‘कुष्मांडा’ कद्दू या कुम्हड़े से जुड़ा है, और वे अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली आदि शक्ति हैं। स्वरूप और महत्वमां कुष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, जिनमें धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा, जपमाला और कमंडल हैं। वे सिंह पर सवार रहती हैं और सूर्य के समान तेजस्वी हैं, जो भक्तों को रोग निवारण, आरोग्य, ऊर्जा और समृद्धि प्रदान करती हैं। उनकी पूजा से बुध ग्रह मजबूत होता है, बुद्धि तेज होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। आज मां कुष्मांडा की …पूजा विधिसूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें, कलश स्थापित करें। मां का ध्यान करते हुए धूप-दीप, लाल पुष्प, फल, सफेद कद्दू, मालपुआ या खीर का भोग लगाएं।

आरती के बाद मंत्र जाप करें और प्रसाद वितरित करें। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडायै नमः  ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडायै नमः ध्यान मंत्र: सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥

मां कुष्मांडा की भक्ति से भक्त स्वस्थ, तेजस्वी और सुखी जीवन प्राप्त करते हैं।