देवभूमि में चैत्र संक्रांति की धूम: बच्चों ने ‘फूल देई-छम्मा देई’ के साथ किया वसंत का स्वागत।
(अरुणाभ रतूड़ी):- उत्तराखंड के पहाड़ों में आज से लोक पर्व ‘फूलदेई’ का उल्लास शुरू हो गया है। चैत्र महीने की संक्रांति के साथ ही प्रदेश के गांव-गांव और शहरों में बच्चों की टोली पारंपरिक गीतों के साथ घर-घर जाकर खुशहाली की दुआएं मांग रही है।
फूलों से महकी देहरी:-आज सुबह होते ही छोटे-छोटे बच्चे (जिन्हें ‘फूल्यारी’ कहा जाता है) रिंगाल की टोकरियों में फ्योंली, बुरांश, बासिंग और सरसों के फूल लेकर घरों की देहरियों पर पहुंचे। बच्चों ने घर की चौखटों पर फूल बिखेरते हुए पारंपरिक पंक्तियां गाईं:
“फूल देई, छम्मा देई, देणी द्वार, भर भकार,
ये देली सों बार-बार नमस्कार।”
परंपरा और उल्लास:-मान्यता है कि इस दिन देहरी पर फूल रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है। बदले में घर के बड़ों ने बच्चों को गुड़, चावल और भेंट स्वरूप पैसे दिए। इस त्योहार के साथ ही उत्तराखंड में ‘ऋतु रैण’ (वसंत के गीत) गाने की परंपरा भी शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री ने भी प्रदेशवासियों को फूलदेई की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमारी प्रकृति से जुड़ने की अनूठी संस्कृति का प्रतीक है।
