एच.1 एन.1 इनफ्लुएंजा प्रति जनता को जागरुक किया जाय-मुख्यमंत्री##देहरादून में अतिक्रमण पर पुन: ध्वस्तीकरण कार्यवाही।##एम्स में आयोजित ब्लडबैंक कार्यशाला में दी गयीं अहम जानकारियां।पढिए Janswar.cOm में।

समाचार प्रस्तुति-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी

मुख्यमंत्री ने कहा एच.1 एन.1इनफ्लुएंजा (स्वाईनफ्लू)के प्रति जनता को जागरुक किया जाय

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा के बारे में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मौसमी बीमारियों से बचाव व उपचार की तैयारियां पहले से ही कर ली जानी चाहिए। सर्दियों में फैलने वाले इस इन्फ्लुएंजा से बचाव की जानकारी अधिक से अधिक लोगां तक पहुंचाई जाए। विशेष रूप से स्कूलों में जाकर दैनिक प्रार्थना के समय बच्चों को इसके बारे में बताया जाए कि किन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से इससे बचा जा सकता है। मुख्यमंत्री सीएम आवास में एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा से बचाव व उपचार की तैयारियों पर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी व मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा को लेकर आम लोगों में भय न हो, इसके लिए बीमारी और इससे बचाव के उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उपचार के लिए आवश्यक दवाईयां भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे।   बैठक में बताया गया कि एच-1 एन-1 इन्फ्लुएंजा एक सामान्य किस्म का इन्फ्लुएंजा है। इससे घबराने जैसी कोई बात नहीं होती है। इसके मरीजों का बहुत कम प्रतिशत होता है जिन्हें कि भर्ती कराए जाने की जरूरत पड़ती है। इसमें सामान्य सर्दी, जुखाम जैसे लक्षण ही होते हैं। घर पर ही इसका उपचार हो जाता है। बाजार में इसकी दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। परंतु यह दवा केवल डाक्टर का पर्चा दिखाने पर ही दी जा सकती है। केवल डायबिटिज, दमा आदि के रोगियों व उम्रदराज लोगों को सावधानी बरतनी होती है। अधिक से अधिक तरल पदार्थ व पौष्टिक आहार लिया जाना चाहिएा। अगर किसी बच्चे में इसके लक्षण दिखें तो स्कूल नहीं भेजा जाना चाहिए।   इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने ऐसे चिकित्सकों का विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जो कि लम्बे समय से अनुपस्थित चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि टेली मेडिसिन व टेली रेडियो लॉजी पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। जहां तक सम्भव हो, स्वास्थ्य केंद्रो को टेली मेडिसिन के लिए जिला अस्पतालों से जोड़ा जाए। इसका आंकलन किया जाए कि प्रदेश में टेली मेडिसिन से लोगों को कितना लाभ मिल रहा है। इसमें और सुधार कैसे किया जा सकता है। जिला अस्पतालांं में आईसीयू के काम में तेजी लाई जाए। इसके लिए आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर ली जाए। हाई रिस्क प्रेगनेंसी के मामलों पर नजर रखी जाए। 90 प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लक्ष्य को हासिल किया जाना है। रूद्रप्रयाग जिलाधिकारी द्वारा बताया गया कि हाई रिस्क प्रेगनेंसी पर लगातार नजर रखने के लिए उनके द्वारा ‘मां’ नाम से एप बनाया गया है। इसमें आशा कार्यकत्रि, गर्भवती महिला की जानकारी डालती है। इसका मैसेज डीएम, सीएमओ व संबंधित चिकित्साधिकारी के पास आ जाता है। इसका पूरा फोलोअप किया जाता है। संबंधित गर्भवती महिला को आवश्यक जानकारियां दी जाती हैं। प्रसव की प्रत्याशित तारीख से 10 दिन पूर्व फिर से जिलाधिकारी, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी के पास मैसेज आता है। इससे संबंधित का संस्थागत व सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो पाता है। इसी प्रकार ‘‘प्रत्याशा’’ के नाम से एक 6 बेड का विशेष वार्ड बनाया गया है। यहां घर जैसा माहौल दिया जाता है। इससे लोगों को किराए पर कमरा नहीं लेना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी पहल सभी जगह की जानी चाहिए। बैठक में सचिव श्री नीतेश झा, अपर सचिव डा. पंकज पांडेय सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।       —————————————————

देहरादून में अतिक्रमण पर पुन:ध्वस्तीकरण कार्यवाही

मा.न्यायालय के निर्देशों के क्रम में देहरादून शहर में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जन सामान्य हेतु बनाये गये फुटपाथों, गलियों, सड़कों एवं अन्य स्थलों पर किये गये अनधिकृत निर्माणों एवं अवैध अतिक्रमणों में ध्वस्तीकरण, चिन्हीकरण व सीलिंग का कार्य पुनः शुरू हो गया है।   अपर मुख्य सचिव श्री ओमप्रकाश ने बताया कि आज दिनांक 25 सितम्बर, 2019 को इस अभियान के अन्तर्गत 130 अवैध अतिक्रमण का ध्वस्तीकरण व 237 अतिक्रमणों का REVERIFICATION OF DEMARCATION व 01 अतिक्रमण का चिन्हीकरण के कार्य सम्पादित करने के साथ ही अतिक्रमण किये गये 101 भवनों के सीलिंग/पार्किंग स्थलों पर संबंधित व्यक्तियों के विरूद्ध नोटिस भी जारी किये गये है। अपर मुख्य सचिव श्री ओमप्रकाश ने अतिक्रमण हटाने के दौरान अतिक्रमण हटाओ टास्क फोर्स के अधिकारियों/कर्मचारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिये है, ताकि मा.न्यायालय द्वारा दिये गये आदेशों का शत्-प्रतिशत पालन शीघ्रता से सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने अतिक्रमण हटाओ टास्क फोर्स के अधिकारियों को निर्देश दिये कि मुख्य मार्गों से अतिक्रमण हटाने के कार्य में और अधिक तेजी लाई जाए, जिससे 28 सितम्बर, 2019 तक अवैध अतिक्रमण हटाने का कार्य पूर्ण हो सके। उन्होंने टास्क फोर्स, एम.डी.डी.डी, विद्युत, लोनिवि, सिंचाई, नगर निगम आदि संबंधित विभाग के अधिकारियों को अपने विभाग से संबंधित कार्यों को समयबद्धता के साथ पूरा करने के निर्देश दिये है।   ————————————————– एम्स में आयोजित कार्यशाला में दी गयीं अहम जानकारियां।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में उत्तराखंड के विभिन्न ब्लड बैंकों के चिकित्सा अधिकारियों की कार्यशाला के तीसरे दिन विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रतिभागियों को व्याख्यानमाला व प्रयोगशाला में रक्तकोष से जुड़ी कई अहम जानकारियों का प्रशिक्षण दिया। एम्स की रक्तकोष विभागाध्यक्ष डा. गीता नेगी ने क्वालिटी मैनेजमेंट जैसे उपयोगी विषय पर व्याख्यान दिया, जिसमें प्रतिभागियों को उच्च गुणवत्ता संबंधी जानकारियां दी गई। संस्थान की माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. प्रतिमा गुप्ता ने रक्तधान से होने वाले संक्रमण संबंधी अहम पहलुओं के बारे में बताया और ऐसी स्थिति में रखी जाने वाली सावधानियों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। दून के मैक्स हेल्थ केयर के रक्तकोष प्रभारी डा. विनय ने क्रॉसमैचिंग व क्वालिटी कंट्रोल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराया। संस्थान की ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की फैकल्टी डा. दलजीत कौर ने एंटीग्लोबुलिन टेस्ट व रक्तधान से होने वाले संक्रमण के परीक्षण, डा. सुशांत कुमार मीनिया ने रक्तदाता के चयन व डा. आशीष जैन ने रक्तदान प्रक्रिया व रक्तकोष के इक्यूपमेंट मैनेजमेंट,डा. ईशा गुप्ता ने बायोसेफ्टी व डा. पनदीप कौर ने बायोमेडिकल पेस्ट मैनेजमेंट विषय पर व्याख्यान दिए।

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