स्वीडन के राजा रानी कल मुनिकीरेती स्वर्गाश्रम क्षेत्र का भ्रमण कर कार्बेटपार्क जाएंगे।##बंगाण संघर्ष समिति, उत्तरकाशी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से भेंट की।##प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने लगे- कृषिमंत्री सुबोध उनियाल।##कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के दायित्वों में फेर बदल।##श्री गोरखनाथस्वास्थ्य सेवा यात्रा मे एम्स ऋषिकेश की टीम सम्मिलित होने रवाना।पढिए Janswar.com में।

समाचार प्रस्तुति-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी(वरिष्ठ पत्रकार)

स्वीडन के राजा रानी कल मुनिकीरेती स्वर्गाश्रम क्षेत्र का भ्रमण कर कार्बेटपार्क जाएंगे।

स्वीडन के किंग कार्ल 16 गुस्ताफ तथा क्वीन सिल्वा कल गुरूवार को उत्तराखण्ड के भ्रमण पर आ रहे हैं। इस सम्बन्ध में विदेश मंत्रालय के प्रोटोकोल प्रभाग के उप मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा मुख्य सचिव के साथ ही सम्बन्धित अधिकारियों को प्रेषित कार्यक्रम के अनुसार स्वीडन के किंग व क्वीन सिल्वा कल 5 दिसम्बर को मुम्बई से स्पेशल स्वीडिस फ्लाइट से पूर्वाहन 10 बजे जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट पहुॅंचेंगे। पूर्वाहन 10ः45 पर ऋषिकेश में रामझूला पुल, स्नान घाट तथा गीता मंदिर का भ्रमण करने के पश्चात् स्वीडन के किंग व क्वीन अपराह्न 12ः30 बजे सराय सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान्ट हरिद्वार के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने के पश्चात् जिम कार्बेट पार्क के ढेला एवं पनियाली फारेस्ट गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। तत्पश्चात अपराह्न 2ः30 पंतनगर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिये प्रस्थान करेंगे।

गुरूवार को विधानसभा में विधायक श्री मुन्ना सिंह चौहान के नेतृत्व में बंगाण संघर्ष समिति, उत्तरकाशी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से भेंट कर अगस्त 2019 में कोठीगाड़, बंगाण क्षेत्र के 09 ग्राम पंचायतों में बाढ़ व भूस्खलन से हुई क्षति के संबंध में ज्ञापन दिया।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आपदा राहत के मानकों के अनुसार क्षेत्र की समस्याओं का समाधान किया जायेगा। जो पुल, सरकारी स्कूल एवं अन्य कार्यालयों के भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनका पुनर्निर्माण किया जायेगा। इन क्षेत्रों में जो दुकानें बही हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख रूपये के मुआवजे की व्यवस्था की गई है। कृषि क्षति का पूरा आकलन कर नियमानुसार क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की जायेगी। प्रभावित क्षेत्रों में जिलाधिकारी उत्तरकाशी के माध्यम से विभिन्न प्रकार की क्षति का आकलन कर रिपोर्ट मंगाकर, हर संभव सहायता की जायेगी।इस अवसर पर आराकोट क्षेत्र से श्री मनमोहन सिंह, श्री राजेन्द्र नौटियाल, श्री विनोद रावत, श्री गबर सिंह आदि उपस्थित थे।

उत्तराखण्ड तो जैविक राज्य बनाये जाने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने लगे- कृषिमंत्री सुबोध उनियाल।

प्रदेश के कृषि, कृषि विपणन, कृषि प्रसंस्करण, कृषि शिक्षा, उद्यान एवं फलोद्योग एवं रेशम विकास मंत्री सुबोध उनियाल ने विधान सभा स्थित कार्यालय कक्ष में जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखण्ड को जैविक राज्य बनाने की दिशा में उठाये गये कदम के सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं।
उन्होंने कहा प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कटिबद्ध है। इसी क्रम में सरकार विधानसभा के आगामी सत्र में मंडी एक्ट के तहत रिवाल्विंग फंड में संशोधन विधेयक लाने जा रही है। जिसकी सैद्धान्तिक स्वीकृति पौड़ी कैबिनेट बैठक में ली गई है। विगत कैबिनेट बैठक में औपचारिक निर्णय पर मोहर लग गई है। उक्त आशय की जानकारी देते हुए कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि प्रदेश के काश्तकारों को उनकी उपज का उचित मूल्य देकर उनकी आर्थिकी में सुधार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी इस पर विधेयक लाया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार के इस निर्णय का इतना गहरा असर पड रहा है कि कानून लाने से पहले ही किसानों का जो आर्थिक शोषण हो रहा था वह थमने लगा है।
कृषि मंत्री ने बताया कि पौड़ी जनपद में इस वर्ष की जिला योजना में किसानों का शोषण होते देख पहली बार किसी राज्य में जिला योजना के तहत 1 करोड रूपये का प्राविधान जिला प्रशासन के माध्यम से भी किसानों के उत्पादों को खरीदने का प्राविधान किया गया था। इसका भी व्यापक असर पौड़ी जनपद के किसानों के हो रहे शोषण पर पडा। इससे वहां के किसानों का शोषण थमा। इससे यह प्रतीत होता हेै कि सरकार के इस निर्णय से आढतियों द्वारा किसानों का शोषण रूकेगा और उनकी उपज का उचित मूल्य उन्हें प्राप्त होगा। जिससे उनकी आर्थिकी मबजूत होगी। इससे सरकार के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प की मजबूती मिलेगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा विधेयक लाये जाने की जानकारी होने पर आढतियों ने खुद ही उपज के दाम बढ़ा दिये हैं। कृषकों की उपज जिसमें मंडुवा व चैलाई भी शामिल है इनका खरीद मूल्य स्वतः ही आढतियों द्वारा बढा दिया गया है। पहले काश्तकारों से आढतियों द्वारा 14 से 20 रूपये किग्रा मंडुवा तथा 34 से 40 रूपये प्रति किलोग्राम चैलाई की खरीद होती थी, जिसे अब बढ़ाकर 28 से 32 प्र्रति किग्रा मंडुवा तथा 56 से 60 रूपये प्रति किग्रा चैलाई का मूल्य कर दिया गया है।
कृषि मंत्री ने बताया कि जिला योजना के तहत 1 करोड़ रूपये की धनराशि प्राविधानित कर सीधे जिलाधिकारियों के माध्यम से कृषकों की उपज क्रय की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा एमएसपी तय नहीं हेाने के कारण राज्य सरकार उपज का एमएसपी निर्धारित करेगी, जिससे कृषकों को उनकी उपज का सही दाम मुहैया हो सकेगा। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जहाॅं पर किसानों की आर्थिकी बढाये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के इस बडे निर्णय से कृषकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, वहीं इससे कृषि क्षेत्र के उन्नति का भी संदेश जा रहा है। उन्होंने बताया कि विगत कैबिनेट बैठक में औपचारिक निर्णय पर मुहर लग गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के आगामी सत्र में मंडी एक्ट के तहत रिवाल्विंग फंड स्थापित किये जाने का विधेयक लाया जा रहा हैै।

कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के दायित्वों में फेर बदल.
उत्तराखंड शासन के कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-1के आदेश संख्या 1009 /XXX-1-2009 के अनुसार आज भारतीय प्रशासनिक सेवा के कुछ अधिकारियों के दायित्वों में फेर बदल किया है. कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव के हस्ताक्षर से जारी आदेश के अनुसार डा.रंजीत कुमार सिन्हा(भा.प्र.से.) सचिव (प्रभारी) से मुख्य परियोजना निदेशक CPD/project CO-ordinator ILSP, project Director ILSP, projecect Director UGVS, additional charge of project CO-ordinator /CPD का दायित्व लेकर श्री अरविन्द सिंह ह्यांकी (भा. प्र. से.) सचिव को पूर्व दायित्वों के साथ मुख्य परियोजना निदेशक CPD/project CO-ordinator ILSP, project Director ILSP, projecect Director UGVS, additional charge of project CO-ordinator /CPD का दायित्व दिया गया.श्री रामबिलास यादव (भा. प्र. से.) अपर सचिव से APD, ILSP का दायित्व लेकर डा. इकबाल (भा. प्र. से.) अपर सचिव को पूर्व दायित्वों के साथ ADP, ILSP का दायित्व दिया गया.

       श्री गोरखनाथस्वास्थ्य सेवा यात्रा मे एम्स ऋषिकेश की टीम सम्मिलित होने रवाना.                                                                                                                                                                                                भारत - नेपाल सीमा पर शुक्रवार से आयोजित होने वाली                                                                                                                                                                                                                           श्रीगोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के तहत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश की चिकित्सकीय टीम रवाना हो गई, जहां एम्स के चिकित्सक सीमा से सटे उत्तरप्रदेश के विभिन्न जनपदों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे।                                                                                                                                            बुधवार को एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने संस्थान से पांच सदस्यीय चिकित्सकीय दल को भारत-नेपाल सीमा पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए रवाना किया। निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि टीम छह से आठ दिसंबर के मध्य भारत-नेपाल सीमा से सटे उत्तरप्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्वास्थ्य सेवा यात्रा के तहत नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगी। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की स्वास्थ्य टीम उत्तराखंड के अलावा उत्तरप्रदेश, जम्मू एंड कश्मीर आदि सीमावर्ती राज्यों में लंबे अरसे से सततरूप से नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है।                                                                                                                                                                                                                                                                                           टीम का नेतृत्व कर रहे समन्यक डा. विनोद ने बताया ​कि नेपाल सीमा से सटे थारू जनजातियों व अन्य गरीब और मरीजों के स्वास्थ्य सबं​धित  दिक्कतों का समाधान करेगी। उन्होंने बताया कि एम्स की टीम छह दिसंबर को गुरु गोरखनाथ यात्रा पर निकलेगी, इस यात्रा में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी केजीएमयू, राम मनोहर लोहिया संस्थान लखनऊ व अयोध्या मेडिकल कॉलेज, इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक भी खासतौर से शामिल होंगे।                                                                                                                                                                                                                      शुक्रवार से भारत नेपाल सीमा पर आयोजित होने वाली तीन दिवसीय स्वास्थ्य सेवा यात्रा में टीम दोनों देशों की सीमा से सटे महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, लखीमपुर, बहराइच,स्रावस्ती व बलरामपुर जनपद में रहने वाले थारू जनजाति के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। साथ ही इस दौरान नेपाल के कैलाली जिले के कुछ मरीजों को भी यात्रा में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।                                                                                                  शिविर में थारू जनजाति के लोगों के रक्त के नमूने लेकर आनुवांशिक बीमारियों पर शोध किया जाएगा, बताया ​कि इस जनजाति में थैलीसीमिया, सिकिलसेल, अनीमिया जैसी बीमारियां अधिक पाई जाती हैं। एम्स की टीम में डा. विनोद के अलावा कॉर्डियोलॉजी विभाग के डा. रविराज, नेत्र रोग विभाग के डा. निशांत, मेडिसिन से डा. मनु, इमरजेंसी मेडिसिन से डा. हिमांशी शामिल हैं।

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