बापू ग्राम क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए और जिन लोगों की जमीन वन विभाग ने अपने कब्जे में ली है, उन्हें वापस किया जाए: डॉ. प्रेम चंद अग्रवाल।
गैरसैंण:- (भराड़ीसैंण) में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं ऋषिकेश विधायक डॉ. प्रेम चंद अग्रवाल ने ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के बापू ग्राम सहित अन्य क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई का महत्वपूर्ण मुद्दा सदन में उठाया।
डॉ. अग्रवाल ने नियम–300 के अंतर्गत सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के बापू ग्राम का प्रकरण वर्तमान में माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। वर्ष 2018 में इस क्षेत्र को नगर पालिका ऋषिकेश के क्षेत्राधिकार में सम्मिलित किया गया, जिसके बाद यहां के कई वार्ड नगर निगम के अंतर्गत आ गए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र की जनसंख्या लगभग 25 हजार थी, लेकिन वर्तमान में यहां की आबादी तेजी से बढ़ी है। अनुमानतः आज लगभग 15 हजार परिवार और करीब 60 हजार लोग यहां स्थायी एवं अस्थायी रूप से निवास कर रहे हैं। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र को बार-बार फॉरेस्ट क्षेत्र बताते हुए कार्रवाई की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल बना हुआ है।
डॉ. अग्रवाल ने सदन को अवगत कराया कि कुल लगभग 2866 एकड़ भूमि का मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जिसमें से करीब 2287.10 एकड़ भूमि पर एम्स ऋषिकेश, आईडीपीएल, सिंचाई विभाग, ऊर्जा विभाग, औद्योगिक विभाग सहित विभिन्न सरकारी संस्थान और कॉलोनियां स्थापित हैं। शेष लगभग 578.90 एकड़ भूमि पर लंबे समय से स्थानीय लोग निवास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी से पूर्व इस क्षेत्र में रहने वाले लोग आजीविका के लिए खेती-किसानी करते थे और महात्मा गांधी जी के शिष्य मीराबेन के प्रयासों से सरकार द्वारा उन्हें भूमि उपलब्ध कराई गई थी। वर्ष 1950 में यहां कृषि सहकारी समिति का गठन हुआ और लगभग 39 एकड़ भूमि पर छोटे-छोटे आवासीय भूखंड आवंटित किए गए। यहां रहने वाले लोगों को लगभग 200-200 गज भूमि दी गई, जिसमें से 100 गज में उन्होंने आवास बनाए और शेष भूमि पर खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण किया।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वन विभाग द्वारा नई नीति के तहत कई जमीनों को वन भूमि घोषित कर दिया गया है, जिससे यहां के निवासियों को बेदखली का सामना करना पड़ रहा है और उनका जीवन-यापन कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अधिकांश लोग पर्वतीय क्षेत्र से आकर बसे हैं और कई लोग 75-80 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि बापू ग्राम क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए और जिन लोगों की जमीन वन विभाग ने अपने कब्जे में ली है, उन्हें वापस किया जाए। साथ ही यहां निवास कर रहे लोगों को उनकी भूमि का वैध मालिकाना हक दिया जाए, जिससे उन्हें स्थायी राहत मिल सके।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़ा विषय है, इसलिए सरकार को इस पर संवेदनशीलता के साथ सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि वर्षों से यहां रह रहे लोगों के हितों की रक्षा हो सके।
