नवरात्रि पंचम दिवस: माँ स्कंदमाता की सिंह-सवारी और भक्तों की रक्षा।
(अरुणाभ रतूड़ी):- चैत्र नवरात्रि के पंचम दिन हम माँ स्कंदमाता की आराधना करते हैं। माँ दुर्गा का यह स्वरूप भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। सिंह पर सवार, कमलासन पर विराजमान माँ स्कंदमाता भक्तों को सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं। पंचम दिन शक्ति जागरण और मातृत्व की महिमा का प्रतीक है। उत्तराखंड में इस दिन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
स्कंदमाता की पौराणिक महिमा:-स्कंदपुराण के अनुसार, जब तारकासुर का आतंक बढ़ा, तब भगवान शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ। माँ पार्वती ने उन्हें दूध पिलाकर शक्ति दी, इसलिए वे स्कंदमाता बनीं। माँ के आठ भुजाओं में कमल, कमंडलु, तलवार जैसे दिव्य अस्त्र हैं। भक्तों को दर्शन मात्र से मोक्ष मिलता है। कुमाऊं के जागेश्वर और गढ़वाल के तपोवन जैसे स्थानों पर विशेष उत्सव मनाया जाता है।
सामग्री: सफेद फूल, दूध, मिश्री, खीर का भोग।
विधि: मूर्ति को सिंह-यान पर स्थापित करें। “ॐ स्कंदमातायै नमः” का 108 बार जाप। आरती के बाद प्रसाद वितरण।
व्रत भंग: केसरिया खीर या फलों का सेवन। महिलाएं संतान सुख की प्रार्थना करती हैं।
उत्तराखंड रिवाज: गंगा-यमुना स्नान के बाद पूजा, लोक भजन गायन।
माँ का आशीर्वाद: शक्ति और स्वास्थ्य:- माँ स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि मातृत्व की शक्ति अजेय है। आज के स्वास्थ्य जागरूक समय में दूध-मिश्री लीवर (SGPT) को मजबूत रखता है। नवरात्रि के इस दिन माता से प्रार्थना करें – परिवार की रक्षा, सफलता और समृद्धि के लिए। प्रकृति से जुड़ें, शाकाहारी भोजन अपनाएं।
जय माता दी! पंचम नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
