संतुलित विकास, उत्तराखण्ड सरकार की प्राथमिकता: मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र##एम्स ऋषिकेश में स्तन कैंसर व कटे होठ व तालू विषय पर व्याख्यान. पढें janswar. Com में.

    समाचार प्रस्तुति-नागेन्द्रप्रसाद रतूड़ी                                                                                                                                                                                           

संतुलित विकास, उत्तराखण्ड सरकार की प्राथमिकता: मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र

टिहरी में रैबार कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के विकास को लेकर किया गया मंथन।
उत्तराखण्ड के विकास के लिए प्रतिभागियों ने शपथ ली।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत, एनटीआरओ के पूर्व प्रमुख श्री आलोेक जोशी, कोस्ट गार्ड के पूर्व महानिदेशक श्री राजेन्द्र जोशी, उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, उच्च शिक्षा मंत्री श्री धन सिंह रावत सहित विभिन्न हस्तियों ने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा आयोजित ‘रैबार-2‘ कार्यक्रम में शिरकत की।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि संतुलित विकास से ही जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप उत्तराखण्ड का निर्माण किया जा सकता है। पिछले ढाई वर्षों में सरकार ने ऐसी नीतियां बनाई हैं, जिनसे पर्वतीय क्षेत्रों का विकास हो और विकास का लाभ दूरवर्ती पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचे। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र टिहरी में आयोजित रैबार-2 कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने रैबार में आए अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पिछली बार यह कार्यक्रम देहरादून में आयोजित किया गया था। इस बार टिहरी झील के किनारे का स्थान चुना गया है, टिहरी ऐतिहासिक स्थल है, जहां कप्फू चौहान जैसे वीर पैदा हुए थे। माधो सिंह भण्डारी जिनकी वीरता तो प्रसिद्ध थी ही परन्तु उनके कृषि के क्षेत्र में किये गये प्रयास एवं बलिदान से आज भी सब अचम्भित हैं। विक्टोरिया क्राॅस विजेता गब्बर सिंह जैसे वीरों की धरती आज निश्चित रूप से हम प्रदेशवासियों को प्रेरणा देती है। हम भी यह चाहते हैं कि यह रैबार कार्यक्रम एक प्रेरणा देने वाला कार्यक्रम बने। अपने गांव के लिए कुछ करें, अपने प्रदेश के लिए कुछ करें, इस सोच के साथ रैबार कार्यक्रम विगत वर्ष से आयोजित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार के सफल परिणाम आए हैं। कोस्ट गार्ड का रिक्यूरिंग सेन्टर हमें मिला है। तमाम विकास की योजनाओं में हमें जो समर्थन मिला है उसमें कहीं न कहीं रैबार कार्यक्रम का भी योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम कहते हैं कि शहीद राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं के अनुरूप उत्तराखण्ड बने तो इसका आशय प्रदेश के संतुलित विकास से होता है। हमें उन क्षेत्रों में आगे बढ़ना होगा जिसमें हमारा एकाधिकार हो सकता है। उत्तराखण्ड स्वाभाविक रूप से आर्गेनिक राज्य है। हमने पूरे प्रदेश में आर्गेनिक क्लस्टर तैयार किये है।
पिरूल को हम अभिशाप मानते हैं, वो हमारे लिए वरदान साबित होने वाला है। हम पिरूल से बिजली बनाने के लिए नीति बनायी है। पिरूल की पत्तियों से बिजली बनाने के 23 प्रोजेक्ट शीघ्र ही राज्य में शुरू होने वाले हैं, जिससे कुछ ही दिनों में बिजली बनना आरम्भ हो जायेगा। गैस की अपेक्षा पिरूल की पत्तियों से होने वाली ऊर्जा की लागत काफी कम है, जल्द ही हम पाईन की पत्तियों से फ्यूल बनाने का पहला प्रोजेक्ट लगाने जा रहे है। चीड़ वनों में विनाश का कारण बन रहा था, पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा था, वही चीड़ की पत्तियों से हमे अब ऊर्जा मिलेगी, हजाराें लोगों को रोजगार मिलेगा, यह हमारे विकास का आधार बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार कार्यक्रम के बाद इन्वेस्टर्स समिट के समय हम 10 नई पाॅलिसी लेकर आए और 05 पाॅलिसी में परिवर्तन किया। परिणामस्वरूप एक वर्ष एक माह में ही प्रदेश में 17,000 करोड़ रूपए से अधिक का निवेश आॅन ग्राउण्ड हुआ है। सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में भी हम आगे बढ़े हैं। सोलर में राज्य में 600 करोड़ रूपये का निवेश हुवा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखण्ड की प्रति व्यक्ति आय 01 लाख 98 हजार से ज्यादा है। परन्तु जब हम जनपदों की आपसी तुलना करें तो काफी अन्तर नजर आता है। हमें इस अंतर को दूर करना है। इसके लिए हमने ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग बनाया। इस आयोग के माध्यम से गांव-गांव का अध्ययन कराकर डाटा जुटाया गया। यह डाटा भविष्य का फ्यूल है, इसी डाटा के माध्यम से हम राज्य के विकास का सही ढंग से नियोजन कर सकते हैं। इसलिये हमारी पूरी कोशिश है कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा इन्वेस्टमेंट आए। फिल्म शूटिंग में उत्तराखण्ड को विशेष पहचान मिली है। उत्तराखण्ड को बेस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का अवार्ड मिला है। उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुन्दरता, जैव विविधता और मानव संसाधन हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र है। प्रकृति का संरक्षण करके इसका उपयोग राज्य के विकास को गति प्रदान करने में कर रहे हैं। सबसे पहले भ्रष्टाचार पर प्रहार करने की जरूरत है। पिछले ढाई वर्षों में हमने भ्रष्टाचार पर कड़े प्रहार किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखण्डी बार-त्यौंहार पर अपने गांव आएं। वर्ष भर में कम से कम दो-तीन बार हमें अपने गांवों में रहना चाहिए। इससे भी बड़ा फर्क पड़ेगा। राज्य में विकास की सम्भावनाओं की कमी नहीं है। उत्तराखण्ड में आसानी से उपलब्ध कण्डाली से भी कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने रैबार-2 को अपनी भूमि से जोड़ने का एक अभिनव प्रयोग बताते हुए कहा कि उत्तराखण्ड के चारधामों के प्रति देश व दुनिया के श्रद्धालु अपनी सच्ची श्रद्धा रखते हंै। गंगा व जमुना जैसी पवित्र नदियां जिस प्रदेश ने देश को दी हो वह निश्चित ही अतुलनीय है।

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के कैंसर सर्जरी विभाग द्वारा कनखल, हरिद्वार स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में मासिक कैंसर परीक्षण एवं उपचार शिविर आयोजित किया गया। जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों ने 40 मरीजों की जांच की व उन्हें आवश्यक परामर्श दिया। शिविर में संस्थान द्वारा मरीजों को कैंसर के प्रति जागरुक करने के लिए व्याख्यानमाला का आयोजन भी किया गया। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि एम्स संस्थान उत्तराखंड में कैंसर के समुचित उपचार के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। इसी उद्देश्य से संस्थान द्वारा नियमित शिविरों के माध्यम से लोगों की जांच व उपचार के साथ साथ उन्हें इस घातक व जानलेवा बीमारी के प्रति जागरुक किया जा रहा है, जिससे वह समय रहते स्वास्थ्य परीक्षण व उपचार सुनिश्चित करा सकें। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि उत्तराखंड में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना का उद्देश्य उत्तराखंड व समीपवर्ती राज्यों के लोगों के स्वास्थ्य की त्वरित जांच व समुचित उपचार सुविधाएं मुहैया कराना है। लिहाजा संस्थान में मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिविर के दौरान आयोजित व्याख्यान में संस्थान की स्तन रोग विशेषज्ञ प्रो. बीना रवि ने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल के चिकित्सकों,कर्मचारियों व अन्य महिलाओं को स्तन कैंसर संंबंधी विस्तृत जानकारियां दी व उन्हें इस बीमारी के प्रति जागरुक किया। उन्होंने बताया कि स्तन रोग के उपचार के लिए सभी तरह की जरुरी सुविधाएं एम्स संस्थान में निहायत कम शुल्क पर उपलब्ध हैं व इसके लिए बाकायदा संस्थान में इंटिग्रेटेड ब्रेस्ट कैंसर स्पेशल क्लिनिक का संचालन किया जा रहा है। प्नो. बीना रवि ने महिलाओं को अपने स्तनों की स्वयं जांच व स्तन कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों से अवगत कराया। उन्होंने बताया ​कि स्तनों के आकार में बदलाव, गांठ का होना, निपल से रक्त या पानी का आना, निपल पर जख्म का होना आदि स्तन कैंसर के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण पाए जाने पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। इस अवसर पर मासिक शिविर में एम्स के सर्जिकल ओंकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एसपी अग्रवाल, डा. पंकज कुमार गर्ग व डा. धर्माराम पूनिया ने मरीजों का सघन परीक्षण किया और उन्हें उचित परामर्श दिया। इस अवसर पर एम्स की डा. अनुभा अग्रवाल, मिशन के स्वामी दयाधिपानंद महाराज, रेखा अग्रवाल आदि मौजूद थे।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में आयोजित कटे होंठ व तालु विषय पर आधारित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में विधिवत शुरू हो गया। छह नवंबर तक आयोजित होने वाले सम्मेलन के दौरान देश व विदेश से आए प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञ जन्मजात कटे होंठ व तालू से ग्रस्त मरीजों का उपचार करेंगे। इसके लिए 25 मरीजों ने संस्थान में पंजीकरण कराया,जिनमें से 15 मरीजों को सर्जरी के लिए चयनित किया गया। एम्स ऋषिकेश के सहयोग से मिशन स्माइल व स्माइल एशिया संस्था के तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का बतौर मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कटे होंठ व तालू से ग्रसित मरीजों के लिए मिशन स्माइल की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर विस्तृत चर्चा की और इसके लिए संस्था की सराहना करते हुए कहा कि संस्था के सहयोग से एम्स ऋषिकेश में आयोजित कार्यशाला के दौरान ऐसे बच्चों की निशुल्क सर्जरी व उपचार किया जाएगा। संस्थान का प्लास्टिक चिकित्सा विभाग 2016 से अब तक इस तरह के ऑपरेशन कर 92 मरीजों को लाभान्वित कर चुका है। मिशन स्माइल के निदेशक डा. रामकुमार ने बताया कि उनकी संस्था वर्ष 2002 से इस मिशन से जुड़ी है। उन्होंने इस आयोजन के लिए एम्स संस्थान के सहयोग के​ लिए आभार जताया।
कार्यशाला में प्लास्टिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डा. विशाल मागो, डा.संजय अग्रवाल व डा. राजकुमार ने मरीजों की स्क्रिनिंग की व सर्जरी के लिए उनका चयन करते हुए बताया कि कटे होंठ व तालू में छेद से ग्रसित बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए यह एक अनोखी पहल है, उपचार के बाद ऐसे बच्चों को सुनने व खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं होती है। डा. मागाे ने बताया कार्यशाला के तहत सोमवार से मरीजों की सर्जरी शुरू की जाएगी, जो छह नवंबर तक चलेगा.

कार्यशाला में मास्को के डा. टिकोन, कोलकाता की प्लास्टिक सर्जन डा. अपर्णा,एम्स एनेस्थिसिया विभाग के डा. संजय अग्रवाल व मिशन की ओर से डा. रामकुमार, डा. तरुण मित्तल, डा. जूही सहयोग करेंगे।

कार्यशाला में मास्को के डा. टिकोन, कोलकाता की प्लास्टिक सर्जन डा. अपर्णा,एम्स एनेस्थिसिया विभाग के डा. संजय अग्रवाल व मिशन की ओर से डा. रामकुमार, डा. तरुण मित्तल, डा. जूही सहयोग करेंगे। कार्यशाला में डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता, एमएस डा. ब्रह्मप्रकाश,डीन एलुमिनाई प्रो. बीना रवि,डीन नर्सिंग प्रो. सुरेश शर्मा, डा. देवरति चटोपाध्याय, डा. मधुवरी वाथुल्या,डा. अल्ताफ,डा. अक्षय आदि मौजूद थे।

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