श्रीमती उषा द्रविड़ भट्ट रचित कविता-सक्षम कौन-Janswar.com

 

रचना -श्रीमती उषा द्रविड़ भट्ट

संक्षिप्त परिचय-शिक्षिका पद से सेवामुक्त,प्राथमिक शिक्षक संघ में प्रदेश अध्यक्ष रहीं,राज्यआन्दोलनकारी,उत्तराखण्ड महिला मोर्चा की संस्थापक सदस्य।

        सक्षम कौन

वैसे तो जीवन है ही एक युद्ध का मैदान
यह रणभूमि है जिसमें रचे गये हैं अनेकों व्यूह,
निकलता है हाथों में तलवार थामे समर में,
देखता है तबाही का मंजर,
घर बरबाद होते हुए,
घाव देता है और देखता है
कटे अंगों की नुमायश 
जहां तहां बिखरे पड़े हुए
युद्ध की विभीषिका देख लगता है
इंसान की कीमत कीट पतंगों से अधिक नहीं,
एक द्वन्द है मन में
सक्षम कौन है,
लाल रक्त बहाने वाला हथियार
या
नीले रक्त की
हाथों में पकड़ी तलवार रूपी लेखनी की धार,
जो साक्षात्कार करवा देती है
मानव के विनाश की पूरी विभीषिका का,
प्रचण्ड रण कौशल का,
कि कैसे व्यूह रचना करे
कैसे भेदन करे,
युद्ध हर समाज, हर युग में दोहराये
जाने वाला सत्य विषय है,
रण,रणबांकुरे, युद्धरत् समाज,दर्शक
एक तय समय के अन्दर समाप्त हो जाते हैं
जिन्दा रहते हैं अविनाशी अक्षर,
अक्षरों को आकार प्रकार प्रदान करने वाली लेखनी,
लेखनी की तीक्ष्ण धार,
पुन:-पुन: इतिहास रचने के लिए।।

 

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