वरिष्ठ पत्रकार व राज्य आन्दोलनकारी की गांव के बीच स्थित दुकान का रात में शरारती तत्वों ने  ताला लगा शटर खांचे से निकाल खोला।janswar.com

-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी

(वरिष्ठ पत्रकार व  राज्य आन्दोलनकारी)

वरिष्ठ पत्रकार व राज्यआन्दोलनकारी की गांव के बीच स्थित दुकान का रात में शरारती तत्वों ने  ताला लगा शटर खांचे से निकाल खोल डाली।

31अक्तूबर 2021 को सुबह लगभग साढे पांच बजे मेरे दुकान के भवन के स्वामी भूपेन्द्र नेगी का फोन आया कि ताऊ जी आपकी दुकान का शटर खुला है लाईट जली है,सुनकर मेरे मष्तिष्क को झटका लगा।मेरा निवास मुख्य गांव सीला जहां मेरी दुकान है से लगभग 1 किमी दूर सीला मल्ली में है। मैं अपने घर की पुताई कराने में व्यस्त होने के कारण 29 अक्तूबर से दुकान नहीं जा पाया था। मैं तुरंत दुकान की ओर चल पड़ा । 10-15मिनट बाद जब मैं दुकान पर पहुंचा तो वहां मुझे भूपेन्द्र सिं के अलावा गांव के कुछ लोग खड़े मिले। शटर खुला था। लाईट जली थी।
शटर कैसे खुला जब इसका निरीक्षण किया गया तो पाया कि शटर एक तरफ की पट्टी खांचे से बाहर निकली थी। जिसे खिसका कर दूसरी ओर की कड़ी बाहर निकल गई और शटर आसानी से ताला सहित ऊपर उठ गया। शटर की एक तरफ का कुण्डा ही काम करता है।उसका सेंट्रल लॉक चाबी फंसने से बेकार हो रखा है तथा दूसरी तरफ का कुण्डा टूटा है जिसे ठीक करने का आश्वासन भवनस्वामी कई बार दे चुका है पर आश्वासन तो आश्वासन होते हैं।
उस शटर को मकान मालिक भूपेन्द्रसिंह ने ठीक से खांचे पर बिठाया। अन्दर देखने पर पता चला कि बेंच पर रखे टॉफी के डिब्बे इलॉक्ट्रानिक तराजू सहित कई सामान नीचे फेंका गया था। सामान का निरीक्षण करने पर पता चला कि कोई सामान गायब नहीं है। दस दस के नोटों की एक गड्डी जो वहां रखी हुई थी वह भी सुरक्षित रखी हुई थी रेजगारी की दो पोटली यथावत् थीं।अन्य सामान भी जैसे का तैसा था।
मेरी समझ में नहीं आया कि आखिर यह किस प्रकार की शरारत है। ग्रामीणों ने बताया कि उस रात वहां दो युवक जो निकटवर्ती गांव फेडुवा के थे। शराब पीकर हुड़दंग कर रहे थे। पर वे नौ – साढे नौ तक हमारे गांव मल्ली सीला अपने घोड़ों सहित पहुंच चुके थे। सीला के ही एक प्रतिष्ठित व्यक्ति ने बताया कि उसे किसी ने बताया कि लगभग दो बजे के बीच उनमें से एक युवक सीला में देखा गया। जब उन प्रतष्ठित व्यक्ति से पूछा गया क्या उसने युवक को देखा है तो उसने बताया कि नहीं मैंने नहीं किसी और ने देखा है।उस और व्यक्ति का नाम उन्होंने नहीं बताया।
न उस युवक से और न गांव के किसी भी व्यक्ति से मेरा कोई झगड़ा है न दुश्मनी।अगर उसने ऐसा किया तो रात दो बजेे उसे सब्बल या लोहे की कोई वस्तु कहां से मिली जिससे वह शटर खोलता।फिर उसने कुछ उठाना ही नहीं था तो यह मेहनत क्यों की। जो भी हो जिसने भी यह कार्य किया वह शातिर मालूम होता है क्यों कि उसे मालूम था कि शटर कहां से व कैसे खुलेगा।किससे खुलेगा।
आज से लगभग तीस वर्ष पहले गांव के ही मनमोहन प्रसाद रतूड़ी दुकान करते थे।उनकी दुकान में दीवाल पर छेद करके चोरी की गयी थी।अब प्रश्न यह है कि मेरी दुकान का शटर उठाना क्या मेरे और मकान मालिक के बीच गलतफहमी पैदा करना था या दूसरे दुकानदार जिनकी दुकान गांव से कुछ दूरी पर हैं के बीच गलतफहमी पैदा करना था।अगर शटर तोड़ने वाला गांव का नहीं था तो उसे सब्बल कहां से मिली।आखिर शटर खुलने की आवाज रात के सन्नाटे में गांव में किसी ने क्यों नहीं सुनी?जब कि वह खोलने में काफी आवाज करता है।कहीं यह मुझे यह चेतावनी तो नहीं है।
अब प्रश्न यह है कि उन युवकों को शराब कहां से मिली।सुनने में आय़ा है कि यहां निकट में ही अंग्रेजी शराब अवैध रूप से उपलब्ध हो जाती है यह कहां तक सच है जांच से ही पता लग सकता है कि शऱाब कहां और कैसे उपलब्ध होती है।जो भी हो यह पहाड़ी क्षेत्र में लॉ एण्ड ऑर्डर को चुनौती है।
मेरे पास राजस्व पुलिस का फोन नंबर नहीं था कि वहां शिकायत दर्ज कर सकूं।न मैं शारीरक रूप से इतना सक्षम नहीं कि पैदल बिथ्याणी जा सकूं।मैंने ग्राम प्रधान श्रीमती उर्मिला देवी को फोन से सारी जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि “कल ग्रामसभा की बैठक है,बैठक में प्रार्थनापत्र दे देना।” घटना के अगले दिन मैंने बैठक में उनके माध्यम से प्रार्थनापत्र जो राजस्व उप निरीक्षक को संबोधित था उन्हें सौंप दिया है।

 

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