वनमंत्री डा.हरकसिंह रावत ने प्रधानमंत्री को बताया कि उत्तराखण्ड बाघों का सबसे बड़ा संरक्षक,कंडीरोड़ निर्माण को प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील.पढिएJanswar.com में।

प्रस्तुति-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी.(राज्यमान्यताप्राप्त स्वतंत्रपत्रकार)

प्रदेश के वन एवं वन्य जीव, पर्यावरण एवं ठोस, अपशिष्ट निवारण, श्रम, सेवायोजन, प्रशिक्षण, आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने आज दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी साथ बैठक में प्रतिभाग किया। 
बैठक में वन मंत्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2018 की गणना के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य बाघों के संरक्षण में प्रथम स्थान पर है। सम्पूर्ण भारत में बाघों की संख्या, मध्य प्रदेश में 526 एवं कर्नाटक में 524 एवं उत्तरखण्ड राज्य 442 है। परन्तु बाघों के आंकड़ा और राज्य का क्षेत्रफल के अनुपात में देखा जाए तो, उत्तराखण्ड राज्य बाघांे के संरक्षण के लिए प्रथम स्थान पर है। 
दूसरे आधार पर भी देखा जा सकता है, सम्पूर्ण भारत के कार्बेट टाइगर डिविजन में बाघों की संख्या और राज्य के क्षेत्रफल का अनुपात की दृष्टि से उत्तराखण्ड राज्य बाघांे के संरक्षण के लिए प्रथम स्थान पर है। सम्पूर्ण भारत में उत्तराखण्ड राज्य में 250 बाघ इस आधार पर गणना किया गया है। यह संख्या सम्पूर्ण देश के प्रथम स्थान पर है। 
तीसरे आधार से नाॅन टाइगर डिविजन के आधार पर भी बाघों की संख्या सम्पूर्ण भारत के किसी भी राज्य के नाॅन टाइगर डिविजन में उत्तराखण्ड प्रथम स्थान पर है। 
चैथे आधार से देखा जाए, उत्तराखण्ड के सभी 13 जनपदों में टाइगर की मौजूदगी प्राप्त हुई है। भारत के किसी भी राज्य के सम्पूर्ण जनपद में टाइगर नहीं पाया गया है। अर्थात इस दृष्टि से भी बाघ संरक्षण की दिशा में उत्तराखण्ड राज्य प्रथम स्थान पर है। 
वन मंत्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने बताया कि बाघों की गणना राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की देख-रेख में किया गया है। इस कार्य की वन मंत्री ने स्वयं माॅनिटरिंग भी की है। 
बैठक के दौरान वन मंत्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल एवं कुमायूॅ को जोड़ने वाले कण्डी मोटर मार्ग के निर्माण के सम्बन्ध में अपनी तार्किक मांग भी रखी। उन्होंने अपने मांग पत्र के माध्यम से कण्डी मार्ग के निर्माण हेतु, प्रधानमंत्री से अपने स्तर से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। 
वन मंत्री हरक सिंह ने बताया कि व्यापक जनहित की दृष्टि से हरिद्वार-चिल्लरखाल-कोटद्वार-पाखरो-रामनगर कण्डी मार्ग निर्माण हेतु प्रयास किया जा रहा है। इस मार्ग के बन जाने से कुमायू गढ़वाल की दूरी 85 किमी0 कम हो जायेगी। यह सड़क उत्तराखण्ड की जीवन रेखा सिद्ध होगी। प्रदेश के चहुमुखी-विकास और पर्यावरण, जीव-जन्तु के संरक्षण हेतु यह मार्ग बनाया जाना जरूरी है। 

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