राज्यपाल ने राजभवन के मुख्य आरक्षी चालक की सेवानिवृति पर उन्हें सम्मानित किया# मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबन्ध की समीक्षा करते हुए रिस्पांस टाईम कम करने का निर्देश दिया# काशीपुर के आयुष्मान सूचीबद्ध ‘संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल’ पर निलंबन की कार्रवाई#उत्तराखंड में सूचीबद्व न्यूज पोर्टल पत्रकारों ने मुखमंत्री सेभेंट कर उन्हें सात सूत्र मांगपत्र दिया।www.janswar.com

-नागेन्द्रप्रसाद रतूड़ी

 

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बुधवार को राजभवन में मुख्य आरक्षी चालक श्री जगतराम भट्ट को सेवानिवृत्त होने पर सम्मानित किया। श्री भट्ट जी द्वारा पुलिस विभाग में 40 वर्ष से अधिक समय की सेवा की गयी। सन 1982 में पुलिस विभाग में आरक्षी के पद पर नियुक्त श्री भट्ट 2018 से राजभवन सुरक्षा में मुख्य आरक्षी चालक के पद पर नियुक्त रहे। राज्यपाल ने श्री भट्ट द्वारा 40 वर्षों की सेवा की सराहना करते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की।

 

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में आपदा प्रबंधन की समीक्षा करते हुए कहा कि रेस्पोंस टाईम कम से कम होना चाहिए। आपदा की स्थिति में राहत व बचाव कार्य तत्काल शुरू हो जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को  आपदा से संबंधित किसी भी चुनौती से निपटने के लिए हरदम अलर्ट रहने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अगले तीन माह महत्वपूर्ण हैं। आपदा की चुनौतियों से निपटने के लिए जिलाधिकारी अधिकांश निर्णय अपने स्तर पर लें। जिन समस्याओं का समाधान जिलास्तर पर नहीं हो पा रहा है, उन्हें ही शासन तक भेजा जाय। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। आपदा के दृष्टिगत अगले तीन माह अधिकारियों की छुट्टी विशेष परिस्थिति में ही स्वीकृत की जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जिलों में आपदा प्रबंधन के लिए जो धनराशि दी जा रही है, उसका आपदा मानकों के हिसाब से अधिकतम उपयोग हो, यह सुनिश्चित किया जाए। आपदा प्रभावितों को आपदा मानकों के हिसाब से मुआवजा यथाशीघ्र मिले।  आपदा प्रबंधन के दृष्टिगत रिस्पांस टाइम कम से कम हो। बारिश या भूस्खलन से सड़क, बिजली, पानी की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में कम से कम समय में आपूर्ति सुचारू की जाय। यह सुनिश्चित किया जाए कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों में जेसीबी की पर्याप्त व्यवस्था हो एवं उनके ट्रैकिंग सिस्टम की व्यवस्था की जाए। सभी सैटेलाईट फोन चालू अवस्था में रहें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य के पर्वतीय जनपदों एवं आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए खाद्य सामग्री, आवश्यक दवाओं एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की पूर्ण व्यवस्था रखी जाए।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर एसडीआरएफ की टीमें बढ़ायी जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन जनपदों में ड्रेनेज सिस्टम की समस्याएं हैं, ड्रेनेज प्लान शीघ्र भेजें। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि शासन स्तर पर जो बैठकें होती हैं, उससे पूर्व संबंधित विषयों पर जिलाधिकारी सभी विभागों की बैठक करें, ताकि शासन स्तर पर होने वाली बैठक में जिला स्तर पर आने वाली सभी परेशानियों को रखा जा सके।
मुख्यमंत्री वाहन दुर्घटना में मृतक परिजनों को दिये जाने वाले मुआवजे में वृद्धि का प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन के साथ ही चारधाम यात्रा एवं कांवड़ यात्रा भी महत्वपूर्ण है। इस वर्ष चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा से जुड़े जनपदों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि चारधाम यात्रा सुव्यवस्थित चले। कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी हरिद्वार, देहरादून, टिहरी एवं पौड़ी को पुलिस के साथ निरन्तर समन्वय बनाने के निर्देश दिये।
बैठक में मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, श्री आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के.सुधांशु, डीजीपी श्री अशोक कुमार, प्रमुख वन संरक्षक श्री विनोद कुमार सिंघल, सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, श्री शैलेश बगोली, डॉ. रंजीत सिन्हा, श्री नितेश झा, श्री रविनाथ रमन, डॉ. वी.बी.आर.सी. पुरूषोत्तम, श्री दिलीप जावलकर, संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, वर्चुअल माध्यम से कमिश्नर गढ़वाल श्री सुशील कुमार, कमिश्नर कुमांऊ श्री दीपक रावत, डीआईजी कुमांऊ डॉ. नीलेश आनंद भरणे, सभी जिलाधिकारी, एस.एस.पी एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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काशीपुर के आयुष्मान सूचीबद्ध ‘संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल’ पर निलंबन की कार्रवाई

-राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा 150 से अधिक मामलों में पाई गई अनियमितताएं

– जांच-पड़ताल के बाद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने उठाया कठोर कदम

देहरादून: राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण। काशीपुर के आयुष्मान सूचीबद्ध संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के क्लेम्स में पाई गई कई अनियमितताएं। इस बार यह मामला संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, मुरादाबाद रोड, काशीपुर, उधम सिंह नगर का है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की टीम द्वारा प्राप्त लगभग 150 से अधिक क्लेम्स के प्रशिक्षण में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई है। अधिक क्लेम लेने के प्रयास में हॉस्पिटल द्वारा मरीजों की आईसीयू बेड की फोटो उपलब्ध नहीं कराई गई है, आईसीयू  हेतु दाखिल की गई मरीजों की फोटो में आइवी लाइन दृष्टनीय नहीं है, मरीजों को आईसीयू से डायरेक्ट रिचार्ज दिखाया गया है, आवश्यक पैथोलॉजी जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हैं। जांच में यह भी पाया गया कि 50 से अधिक मामलों में हॉस्पिटल के डॉक्टर सौरभ मिश्रा द्वारा मरीजों का उपचार किया गया, जबकि डॉक्टर सौरव मिश्रा एक अधिकृत डॉक्टर नहीं हैं। ऐसी कई  अनियमितताएं सामने आई हैं। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार हॉस्पिटल ने NHA की गाइडलाइंस का पूरी तरह से उल्लंघन किया है। शिकायतों व जांच-पड़ताल के बाद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने काशीपुर के संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की सूचीबद्धता निलंबित कर दिया गया है। इस तरह के कृत्य से मरीजों की जान को भी खतरा हो सकता है। संबंधित हॉस्पिटल से रिकवरी की भी प्रक्रिया की जाएगी।

आयुष्मान योजना को संचालित कर रहे स्वास्थ्य प्राधिकरण के चेयरमैन डी.के. कोटिया ने बताया कि काशीपुर के संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओर से भुकतान के लिए भेजे गए 150 से अधिक मामलों में अलग-अलग तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि आईसीयू में इलाज दिखाकर मरीजों के फोटो सामान्य वार्ड के पाए गए हैं, मरीजों की फोटो में आइवी लाइन दृष्टनीय नहीं है। साथ ही आवश्यक पैथोलॉजी जांच रिपोर्ट का ना होना और अधिकृत डॉक्टर द्वारा मरीजों का इलाज ना कराना। ऐसी तमाम तरह की अनियमितताओं को देखते हुए अस्पताल को योजना से बाहर करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल को नोटिस भेजकर 5 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आयुष्मान योजना का संचालन कर रहे राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से जहां बेहतर कार्य करने वाले अस्पतालों को समय-समय पर प्रोत्साहित किया जाता है वहीं किसी तरह की लापरवाही या अनियमितताएं करने वाले हॉस्पिटलों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी की जाती है।

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पत्रकारों की सात सूत्रीय मांगों पर सीएम धामी की सहमति, सीएम बोले पत्रकारों के हित नहीं होने दियें जायेंगे प्रभावित.!

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों की सात  सूत्रीय मांग  पर सचिव  सूचना क़ो जारी  किये दिशा-निर्देश.!

देहरादून। उत्तराखंड में सूचीबद्व न्यूज पोर्टल पत्रकारों ने वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल के नेतृत्व में आज देहरादून सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस दौरान सचिव सूचना अभिनव कुमार, महानिदेशक सूचना रणवीर सिंह चौहान सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इस मुलाकात में पत्रकार हितों से जुड़ी सात सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सात सूत्रीय मांगों पर सीएम धामी की सहमति
मुख्यमंत्री धामी ने सभी मांगों पर मौखिक सहमति जताते हुए सचिव  सूचना  अभिनव  कुमार  क़ो मांग-पत्र अग्रसरित  कर सात सूत्रीय मांग पर जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा न्यूज पोर्टल पत्रकारों के हितों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दिया जायेगा। इसको लेकर जल्द एक बेहत्तर नीति बनाई जायेगी। राज्य में कार्य कर रहे न्यूज पोर्टल पत्रकारों को प्रथामिकता दी जायेगी। सीएम धामी ने राज्य में जीसीएसटी देने वालों को प्राथमिकता देने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।

पत्रकारों के हितों की रक्षा करे सरकार-अरूण शर्मा
मुख्यमंत्री का अभिवादन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अरुण शर्मा ने पत्रकारों की विभिन्न मुद्दों क़ो मुख्यमंत्री धामी के समक्ष रखते  हुए कहा कि विश्व भर में जिस तरह तेजी से सोशल मीडिया का ट्रेंड बहुत व्यापकता के साथ प्रचारित प्रसारित हो रहा है उस सब से हमारा प्रदेश भी अछूता नहीं है और तो और प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी से लेकर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने न्यूज़ पोर्टल्स की  महत्तता  क़ो अपनाया है।

मनोज इष्टवाल बोले न्यूज पोर्टल के लिए बने नीति
वरिष्ठ पत्रकार मनोज  इष्टवाल ने कहा है कि सूचना विभाग हर न्यूज़ पोर्टल्स मॉनिटरिंग करे  ताकि  यह साबित हो सके कि हम सरकार कि विकास योजनाओं क़ो बतौर पत्रकार कितनी प्राथमिकता के साथ उठा  रहे हैं! साथ ही ज़ब भी न्यूज़ पोर्टल्स क़ो लेकर कोई पॉलिसी बने उसमें कम से कम हर संगठन से एक पत्रकार क़ो शामिल कर उसकी रूप रेखा  पर विचार  किया जाय।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार पंकज पंवार सहित अन्य पत्रकारों ने भी  पत्रकारों के हितों व प्रदेश की विकास योजनाओं पर परिचर्चा की। साथ ही मुख्यमंत्री से पत्रकारों की मांगों पर शीध्र कार्रवाई की बात कही। पत्रकारों ने सात सूत्रीय मांग पत्र मुख्यमंत्री क़ो सौंपा। प्रतिनिधि मंडल में वरिष्ठ पत्रकार मनोज  इष्टवाल, अरूण शर्मा, चंदन एस कैंतुरा, पंकज पंवार, रतन नेगी, सोनू कुमार, डा बीपी बलोदी, रजनीश सैनी, राकेश बिजलवाण, धनश्याम जोशी, अजीत काम्बोज, आकाश गौड़, अमित अमोली, आशीष नेगी, रमन जायसवाल, अवधेश नौटियाल आदि मौजूद रहे।

एक नजर न्यूज पोर्टल पत्रकारों की 7 सूत्रीय मांगो पर

1-सूचना विभाग द्वारा टीवी चैनलों व समाचार पत्रों की भांति न्यूज पोर्टलों के लिए भी जल्द से जल्द नीति का गठन कर ठकेदारी प्रथा को बंद किया जाये। नीति बनाने वाली कमेटी में सुझाव देने के लिए हमारे संगठन के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाये।

2-सूचना विभाग द्वारा जब तक नीति का गठन नहीं होता और टेंडर प्रक्रिया जारी रहती है ऐसे में विभाग द्वारा टीवी चैनलों व समाचार पत्रों की भांति विज्ञापन की न्यूनतम दर तय करके टेंडर प्रक्रिया सुचारू रखी जाये। पिछले टेंडरों में देखने में आया है कि कुछ लोग जानबूझकर इतनी कम दरें भरते हैं कि सरकार और पत्रकारों में टकराव हो। इसलिए न्यूज पोर्टलों की विभिन्न श्रेणियों के विज्ञापन की न्यूनतम दर टीवी चैनलों व समाचार पत्रों की भांति तय करने के बाद ही सूचना विभाग टेंडर प्रक्रिया शुरू करे।

3-जब तक नीति का गठन नहीं होता है तब तक के लिए पूर्व में सूचीबद्ध किए गए न्यूज़ पोर्टल्स को दुबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने के स्थान पर उन्हें पूर्व निर्धारित सूचीबद्धता में ही बनाये रखा जाय। टेंडर प्रक्रिया केवल नये न्यूज पोर्टलों को शामिल करने के लिए ही अपनाई जाये।

4-उत्तराखंड में रहकर कार्य करने वाले न्यूज पोर्टलों को ही टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जाये। राज्य से बाहर के ऐसे न्यूज पोर्टलों को (जिनका वोटर आईडी कार्ड व अन्य दस्तावेजों में पता प्रदेश से बाहर का हो) टेंडर प्रक्रिया में शामिल न किया जाय।

5-सूचना विभाग द्वारा सभी श्रेणियों में सूचीबद्व न्यूज़ पोर्टल्स को प्रत्येक माह सम्मानजनक राशि का विज्ञापन दिया जाये। विगत 6 माह में सूचीबद्व न्यूज पोर्टलों को विज्ञापन के नाम पर ना मात्र की राशि देकर विभाग द्वारा महज खानापूर्ति की गई है।

6-मुख्यमंत्री के क्रियाकलापों व जनहित से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को लेकर स्पेशल आर्टिकल लिखने वाले न्यूज़ पोर्टल्स को स्पेशल विज्ञापन की परिधि में सम्मिलित किया जाय। सामान्य विज्ञापनों के साथ समय-समय पर स्पेशल विज्ञापन जारी किये जायें।

7- सूचना विभाग में सूचीबद्व न्यूज़ पोर्टल्स के संपादक को उनके पत्रकारिता अनुभव के आधार पर राज्य/जिला मान्यता की सुविधा प्रदान की जाये।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी सात सूत्रीय महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सूचना विभाग अधिकारियों को जल्द कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।

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