राज्यआन्दोलनकारी रि.सुबेदार हरिसिंह नेगी अब हमारे बीच नही रहे हैं।Janswar.com.

-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी स्वतंत्र पत्रकार
यमकेश्वर क्षेत्र के दीर्घजीवियों मे से एक राज्यआन्दोलनकारी रि.सुबेदार हरिसिंह नेगी अब हमारे बीच नही रहे हैं उन्होंने जोलीग्रांट के स्वामीराम अस्पताल में कुछ पहले इस संसार से विदा ली। वे 92 वर्ष के थे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सगे सबसे बड़े मामा श्री हरिसिंह नेगी का जन्म पौड़ी गढवाल जनपद के जयहरी मल्ली में 01जनवरी सन् 1929 को जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक श्री अमरसिंह नेगी के घर बडे़ बेटे के रूप में हुआ। पढाई व खेलकूद में तेज होने के कारण श्री नेगी का रुझान सेना की ओर था। वे सेना की मेडिकल कोर में बतौर नर्सिंग सहायक के रूप में सम्मिलित हुए। जब कि उनसे छोटा एक भाई राजकीय कॉलेज में प्रवक्ता व दूसरा प्रधानाचार्य और तीसरा वन विभाग की सेवा से सेवामुक्त जीवन जी रहे हैं।
राज्यआन्दोलनकारी श्री हरिसिंह सेवा मुक्ति के बाद शहरों की ओर नहीं भागे उन्हें अपने गांव जयहरी में ही रहना श्रेयकर लगा।लगभग 5 किमी की दूरी पर स्थित भृगुखाल में उन्होंने अपना मेडिकल स्टोर खोला और रोज पांच किमी आना व पांच किमी जाना याने दस किमी की पैदल दूरी तय करने लगे। यह दूरी उन्होंने लगभग 45वर्ष तक तय की।
फौजी होने के कारण वे नैतिक मूल्यों को अधिक महत्व देते थे। पूर्व सांसद स्व.चन्द्रमोहन सिंह नेगी से रिश्ता होने पर भी वे 1980 ई. के संसदीय चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री उ.प्र.स्व.हेमवतीनन्दन बहुगुणा के पक्ष में ताल ठोक कर खड़े रहे। संभवतया इसके लिए उन्हें अपने रिश्तेदारों का आक्रोश भी झेलना पड़ा होगा पर अपने निर्णय पर अडिग रहे।वे बहुगुणा जी के बहुत निकटतम थे।
राज्यआन्दोलन में उनका लगभग पूरा परिवार ही आन्दोलन में था।लालकिले में हुए सम्मेलन में फौज की वर्दी पहने दहाड़ते हुए उनकी एक फोटो देश की एक प्रतिष्ठित साप्ताहिक पत्रिका के मुखपृष्ठ पर छपी थी पत्रिका का मुखपृष्ठीय शीर्षक था “फौजी को गुस्सा क्यों आता है।”
उनके बडे़ बेटे हरि बसन्त जो पशुपालन विभाग में अधिकारी रहे हैं ने व छोटे बेटे रूप बसंत ने राज्य आन्दोलन में सक्रियता से भाग लिया।जिला आन्दोलनकारी चयन समिति का सदस्य होने के कारण जब मैं उनका चयन न करा सका तो मैने उन्हें स्वयं 31दिसम्बर2019 को पौड़ी डीएम कार्यालय में आने को कहा। उनके पौड़ी जाने पर उनका व उनके छोटे बेटे रूप बसंत का चयन आन्दोलनकारी के रूप में हो सका है।
उनके दो बेटे व दो बेटियां हैं।छोटी बेटी के भतीजे तीनों सेनाओं के पहले प्रमुख जनरल विपिन रावत हैं।
श्री नेगी हमेशा चुस्त दुरुस्त रहते थे।उनके दैनिक पहनावे में टाई आवश्यक थी।आन्दोलनकारी चयनित होने पर वे मेरे घर धन्यवाद देने आये तो मुझे अच्छा लगा।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के सगे मामा होने पर भी कभी उन्होंने उनकी स्थिति का लाभ उठाने की सोचा तक नहीं।वे बहुत ही मिलनसार व खुशमिजाज आदमी थे ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति व परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।उनकी मृत्यु से क्षेत्र ने एक समाजसेवी को खो दिया है जिसकी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती।

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