यमकेश्वर की विधायक को सीएम हेल्पलाईन में शिकायत करने पर ऐतराज होता है।पढिए Janswar.com. में।


यमकेश्वर की विधायक को सीएम हेल्पलाईन में शिकायत करने पर ऐतराज होता है।

लेख-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी(राज्य मान्यताप्राप्त स्वतंत्र पत्रकार)

 

जनपद देहरादून से मिले जनपद पौडी गढवाल के यमकेश्वर ब्लॉक का दुर्भाग्य है कि वह पिछले 21 सालों से भाजपा के विधायक को विजयी बनाती आरही है। पहले तीन विधान सभा चुनाव में श्रीमती विजयबड़थ्वाल विधायक रहीं। 2017 के चुनाव में यहां के कई बार सांसद रहे श्री भुवनचन्द्र खण्डूड़ी की सुपुत्री श्रीमती ऋतुभूषण खण्डूड़ी को यहां की जनता ने अंधा समर्थन देकर विजयी बनाया। इन विधायकों ने क्षेत्र का जो भी विकास किया वह इस क्षेत्र के भ्रमण पर आने से ही पता लग सकता है।
मेरे गांव सीला मे सभी प्राकृतिक संसाधन हैं समतल भूमि,कलकल बहती नदी। तीन ओर साल वृक्षों से भरा सघन वन क्षेत्र। पर यहां आज भी यातायात के साधन नहीं हैं।
इस सीला ग्राम सभा का एक लाल जहां उ.प्र.के मुख्यमंत्री के रूप में वहां के विकाास में संलग्न है वहीं यहां का मुख्य गांव सीला आज भी यातायात से वंचित है।
बहुत पहले सन् 1958 में कोटद्वार -लालढांग -धारकोट-फेडुवा मोटरमार्ग बना था ।यह मोटर मार्ग लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज ने बनाया था।सड़क यद्यपि फेडुवा तक बननी थी परन्तु इसे सीला के बनसारी तोक तक अधूरा छोड़ दिया गया। ग्राम सीला व तिमल्याणी ग्रामसभा के खैराणी तोक के बीच सतेड़ी गाढ जो लालढांग पहुँच कर रवासण कहलाती है। इस नदी पर सन्1958 में एक पुल बनाया गया था।जो कि सन् 2014 की आपदा में यह पुल जड़ से उखड़ कर बह गया था।
सन् 1960 ई.को इस मोटर मार्ग पर जीएमओ की पहली बस चली थी। बरसात में यह मार्ग कई जगह पर टूटने से बन्द हो जाता था फिर अगले सीजन के लिए इसकी मरम्मत हो जाती थी इस प्रकार इस पर सन् 1963-64 तक इस पर बसें चलीं।बाद में लालढांग व धारकोट के बीच बखमलगढ नामक स्थान पर व ग्रामसभा तिमल्याणी के दुज्याला नामक स्थान पर भूस्खलन होने से यह मार्ग बन्द हो गया था ।कुछ साल बाद दुज्याला के ऊपर टूटी सड़क को और ऊपर से निकाला गया पर उसे अधूरा छोड़ दिया गया।नब्बे के दशक में जनान्दोलन होने पर कौडिया(गंगाभोगपुर)- किमसार मोटर मार्ग बना।जो कौडिया से लौहसिद्ध(तल्ला बनास) तक राजाजी राष्ट्रीय पार्क के बीच निकली।कुछ समय बाद इसे धारकोट तक पुरानी सड़क तक जोड़ दिया गया। धारकोट से कांडई तक इसकी मरम्मत कराकर इसे छोटी गाड़ियों के चलने योग्य बना दिया गया।कुछ साल बाद इस सड़क को तिमल्याणी की तरफ मोड़ दिया गया।तिमल्याणी मोड़ से सीला पुल तक का लगभग पांच किमी भाग आज भी सन् 1958 का बना हुआ है। जिसपर जैसे तैसे मैक्स वाहन व छोटे ट्रक चलते हैं।
सीला से आगे जो सड़क अधूरी छूटी थी उसे सन् 2005 में (जब मैं ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तराखण्ड का महासचिव था)मेरे एक पत्र पर तत्कालीन मुख्यमंत्री पं.नारायणदत्त तिवारी के आदेश पर वन विभाग ने फेडवा तक बना दिया था।जिस पर जनता को बुकिंग पर यातायात सुुविधा मिल रही थी पर दैवयोग से 2014 की आपदा में सतेड़ी गाड़ का पुल जड़ से उखड़ कर बह गया।
तब से इस पुल को बनवाने के लिए सीला गांव के लोग प्रयारत थे इस गांव के समाजसेवी व राज्य आन्दोलनकारी स्व.श्री केपी रतूड़ी ने इसे बनवाने के लिए थलनदी में मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा करवायी गयी। मुख्यमंत्री द्वारा 24 मी.स्पान मोटर पुल बनाने की घोषणा करायी गयी। मुख्यमंत्री की घोषणा की संख्या-156/2018 थी। जिसपर शासन के संयुक्त सचिव श्री एस.एस.टोलिया ने 24 मीटर स्पान के पुल का शासननादेश संख्या 5618/III(2)/18-36/2017 दिनांक 20 नवम्बर 2018 को इसके निर्माण के लिए 57.406लाख रुपये प्रथम किश्त के रूप में स्वीकृत किये।धन स्वीकृति के बाद भी जब इस पुल के निर्माण पर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो जनता ने क्षेत्रीय विधायक से मोटर पुल बनाने की मांग की।जिस पर विधायक ने जिला प्लान से एक पैदल पुल स्वीकृत करवा दिया।
5 जुलाई 2021को क्षेत्रीय विधायक अपनी पार्टी के दल बल व लोनिवि के अधिशासी अभियन्ता के साथ उक्त स्थल पर आयीं इनके साथ ब्लाक प्रमुख व जिला पंचायत सदस्य उमरोली कु.आरती गौड़ भी थे। ग्राम प्रधान द्वारा सूचित किए जाने पर मैं भी उक्त स्थल पर पहुंचा तो टूटे मोटर पुल के स्थान पर नपायी हो रही थी। जब मैंने पूछा कि क्या यहां पर मोटर पुल के निर्माण की कार्यवाही हो रही है तो उत्तर मिला कि नहीं पैदल पुल के निर्माण की नपायी ।जिसका हम सब ग्रामवासियों ने विरोध किया तथा मांग की यहांपर मोटर पुल बने।पैदल पुल पचास मीटर नीचे बनाया जाय।परन्तु लोनिविके अधिकारी वहीं पुल बनाने पर अड़े रहे। ग्रामवासियों के विरोध को देखते हुए वे उस स्थान पर गये जहां जनता पैदल पुल बनाना चाह रही थी। उन्होंने उस स्थान पर पैदल पुल बनानें में आनाकानी की।विधायक ने भी कहा कि जनता के कहने पर काम नहीं होगा जो अधिकारी कहेंगे वही होगा।

आज की तिथि में सीला गांव एक ऐसा गांव है जो किसी भी सड़क से नहीं जुड़ा है। पंचूर(उ.प्र.के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जन्मभूमि ) से एक तीन किमी सड़क गाजसेरा तक निकाली गयी।गाज सेरा व सीला के बीच एक गांव दालमीसेरा पड़ता हैं दालमी सेरा के 50 मीटर दूर तक उत्तरी व 50 मीटर दूर तक दक्षणी भाग  उत्तरी भाग लो.नि.वि.ने बनवायी दालमी सेरा के एक व्यक्ति की आपत्ति से सीला से पिछले प्रधान आशीष रतूड़ी ने सीला पुल से दालमीसेरा मिलान तक जो सड़क बनायी गयी वहां से लोनिवि की  सड़क की दूरी जो लगभग 100 -150 मी. होगी दालमीसेरा के एक व्यक्ति जिसके मकान के पीछे सड़क बननी है की आपत्ति से नहीं बन पायी अब उक्त व्यक्ति द्वारा इस शर्त पर अनापत्ति दी गयी है कि सड़क बनने में उसके मकान को कोई नुकसान न पहुंचे ।जब विधायक जी से उस भाग जो लगभग100- 200 मीटर होगा जिसके बनने से सीला स्व.जगमोहनसिंह राजमार्ग से जुड़ जाएगा, को बनवाने कहा गया तो लोकनिर्माण विभाग के अधिकारी ने कहा कि जिस मकान के पीछे से सड़क निकलेगी उसपर मलबा तो गिरेगा ही गिरेगा।जब उनको बताया गया कि कई स्थानों ऐसी स्थिति में सडकें बनी हैं मकान भी सुरक्षित हैं सड़क भी बन गयी है अभियन्ता यही राग अलापते रहे कि यहां सड़क नहीं बन सकती।
इस पुल व सड़क को बनवाने के लिए मैंने एक नागरिक की हैसियत से मुख्यमंत्री हेल्पलाईन में अनुरोध किया जिस पर विधायक को आपत्ति थी उनका कहना था कि सीएम हेल्पलाईन में शिकायत करने से काम करने में बाधा आती है। तब मुझे कहना पड़ा कि आप सीएम हेल्पलाईन बन्द क्यों नहीं करवा देतीं तो वे खिसिया गयीं।
चुनाव जीतने पर धन्यवाद देने के बाद विधायक इस गांव में साढे चार साल बाद आयीं।जिसपर एक बच्चे ने टिप्पणी की कि अब चुनाव नजदीक आगये हैं तो आप अगले चुनाव में वोट पाने के लिए आगयी हैंं।

गाव के लोगों मे चर्चा है कि विधायक जी को साढे चार साल तक जनता का दर्द नहीं दिखाई दिया साढे चार साल तक जनता की सुध नहीं ली।कार्यकाल के अन्तिम दिनों में  कैसे पैदल पुल बनाने का ध्यान आया। जनता के मन में यह भी प्रश्न है कि पुराने मोटर पुल के स्थान पर पैदल पुल बनाने का प्रयास करवाना कहीं मोटर पुल न बनने देने प्रयास तो नहीं है। 
जनता का कहना हैं कि पैदल पुल बने,पर वहां पर नहीं जहां मोटर पुल था। वहां से ऊपर या नीचे कहीं भी पैदल पुल बनाया जाय।जनता में यह भी चर्चा है कि हमारी वोट से विधायक बनीं विधायक हमारी बात न मान कर अधिकारियों को वरियता दे रही हैं। ऐसे में हमें अगले चुनाव में अपना वोट देने के लिए सोचना पड़ेगा ।कहीं ऐसा न हो कि भाजपा विधायक की बेरुखी से जनता भाजपा का विरोध न कर बैठे।

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