मु.मं. श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रतिभाग किया और महाराष्ट्र के राज्यपाल से भेंट की।##ऐम्स में हुई गोष्ठी##जि.अ. नैनीताल ने दिए डेंगू से निपटने के निर्देश। पढिएJanswar.com में।

लेख प्रस्तुति-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रतिभाग किया और महाराष्ट्र के राज्यपाल से भेंट की।

प्रस्तुति-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुंबई के राजभवन में मुलाकात की। यह एक शिष्टाचार भेंट थी।

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कल मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रतिभाग किया। उन्होंने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के विभिन्न सत्रों में उत्तराखंड के सौंदर्य, योग व आध्यात्म वेलनेस तथा निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने अपने सम्बोधन में विशेषकर निवेशकों को उत्तराखण्ड में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि आप यहां निवेश के लिए आएंगे तो आपको आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होगी, आप स्वस्थ मुस्कराहट के साथ वापस लौटेंगे। शान्ति और मुस्कुराहट हमारे राज्य के सबसे बड़े USP हैं।
काॅन्क्लेव में मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सन् 2000 में झारखण्ड, छत्तीसगढ़ सहित उत्तराखण्ड राज्य भी अस्तित्व मंे आया। इन 19 वर्षों के सफर में अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखण्ड ने तेजी से विकास किया है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1,98,738 रूपए हो गयी है। उन्हांेने कहा कि उत्तराखंड में समुद्र और रेगिस्तान को छोड़कर प्रकृति अपने हर रूप में मौजूद है। यहां झील, झरना, बर्फीली चोटियां, नीला साफ आकाश, जंगल, बाघ, एडवेंचर योग व आध्यात्म सब कुछ मौजूद है। उत्तराखण्ड को न केवल प्रकृति ने खुबसूरत बनाया है बल्कि यहां का परिश्रमी मानव संसाधन जो देवभूमि एवं वीरभूमि के साथ ही अपनी ईमानदारी के लिए विशेष पहचान रखता है। वो राज्य आज सम्भावनाओं का राज्य है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। आॅल वेदर रोड चारो धाम के लिए विकसित की जा रही है साथ ही रेल कनेक्टीविटी के कार्य में भी तेजी आयी है। प्रदेश के विकास को नयी पहचान दिलाने हेतु एयर कनेक्टीविटी, रेल व रोड कनेक्टीविटी के साथ ही अब इसमें चौथा आयाम रोपवे कनेक्टीविटी को भी जोड़ा गया है। उत्तराखण्ड पर्यटन प्रदेश के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। हमारे यहां देश विदेश से पर्यटक आते हैं, पर्यटक आध्यात्मिक सुख के लिए भी आते हैं तथा योग की राजधानी ऋषिकेश में योग के लिए भी आते हैं। उन्होंने कहा कि वैलनेस टूरिज्म पर भी राज्य आगे बढ़ रहा है। आगामी अप्रैल माह मे प्रदेश में वैलनेस समिट भी आयोजित होना है जिसके लिए आप सभी आमंत्रित है। उत्तराखण्ड में माउंटेनियरिंग, रिवर राफ्टिंग, ट्रैकिंग, केम्पिंग, पैराग्लाईडिंग, माउंटेन बाईकिंग आदि की बहुत सम्भावनाएं हैं। हम 13 जिलों में 13 नए थीम बेस्ड डेस्टीनेशन विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में तमाम उद्योग स्थापित किये गये हैं, जिनमें आॅटो एवं फार्मा उद्योग काफी तेजी से बढ़ा है। राज्य सरकार की नीति, निवेश को प्रोत्साहित करने की है। पिछले वर्ष अक्टूबर में प्रदेश में पहली बार ‘डेस्टीनेशन उत्तराखण्ड’ के नाम से इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया था।
उन्होंने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि आप यहां निवेश के लिए आएंगे तो आपको यहां बेहतर जलवायु, प्रभावी सिंगल विंडो सिस्टम, बेहतर शांति व कानून व्यवस्था, इन्वेस्टर्स फ्रेंडली सिस्टम के साथ ही श्रम असंतोष की कोई समस्या नही होगी। प्रदेश में पर्यटन, वैलनैस, आर्गेनिक कृषि, क्लीन एनर्जी, आई.टी. सहित सर्विस सेक्टर में असीमित सम्भावनाएं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश को बढ़ाने हेतु नई नीतियां बनाकर निवेश के अनुकूल वातावरण बनाया गया है। हमने संशोधित सौर ऊर्जा नीति 2018 जारी की है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में शांति व कानून व्यवस्था दूसरे राज्यों से बेहतर है। पहले उत्तराखण्ड के दो पुलिस थानों, नैनीताल के वनभूलपूरा थाना व देहरादून की ऋषिकेश कोतवाली ने देश के शीर्ष दस थानों में जगह बनाई है। इसके बाद पिथौरागढ़ जिले में स्थित मुन्स्यारी थाने ने भी देश के टाॅप टैन थानों में अपनी जगह बनाई है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड में फिल्म इंडस्ट्रीज का आकर्षण भी काफी बढ़ा है। गत वर्ष राज्य में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं द्वारा जो सुझाव दिये गये थे, उन्हें शामिल करते हुए फिल्म नीति 2019 लागू की गई। इसके साथ ही मुम्बई में आयोजित कार्यक्रम में फिल्म जगत की बङी हस्तियों से संवाद कर उन्हें उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग के लिए आमंत्रित किया गया था। फलस्वरूप वर्ष 2017 से अभी तक लगभग 200 फिल्मों, धारावाहिक, डाक्यूमेंट्री,जिनमें डिस्कवरी चैनल का मैन वर्सेज वाईल्ड आदि आदि की शूटिंग की गई है।
हमने फिल्म निर्माताओं की सुविधाओं के दृष्टिगत आकर्षक फिल्म नीति लागू की है। बड़ी संख्या मे दक्षिण के फिल्मकार भी राज्य के प्रति आकर्षित हुए हैं। उत्तराखण्ड का सौन्दर्य फिल्मों के अनुकूल है। यहां का शांत माहौल, अपनत्व व भाई चारा फिल्म निर्माताओं को पसन्द आया है।
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ऐम्स ऋषिकेश मेंपीएमआर विभाग व आईएएफएमआर की राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में पीएमआर विभाग व इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहेबिलिटेशन की ओर से आयोजित वार्षिक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने दुर्घटनाओं में गंभीर घायल होने वाले मरीजों के पुनर्वास विषय पर व्याख्यान दिए। एम्स के फिजिकल एंड मेडिकल रिहेबिलिटेशन पीएमआर विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वार्षिक संगोष्ठी के मौके पर अपने संदेश में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि ट्रामा रिहेबिलिट्रेशन ट्रामा के कारण शारीरिक विकलांगता से प्रभावित मरीजों के रोजमर्रा के कार्य करने व व्यासायिक जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि करता है व उसे पुनर्स्थापित करता है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने कहा कि पूर्ण विश्वास है कि राष्ट्रीयस्तर की यह संगोष्ठी सभी प्रतिभागियों को ट्रामा रिहेबिलिटेशन के क्षेत्र में उनकी जानकारी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी और उन्हें इस कार्य में आगे आने को प्रेरित करेगी। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक भारत सरकार डा.आरके श्रीवास्तव ने कहा ​कि ट्रामा केयर पब्लिक हेल्थ का विषय बन गया है, ऐसे में पीएमआर विभाग ग्रसित लोगों की तात्कालिक चिकित्सा में अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी चाहिए।
भारत सरकार की नेशनल ट्रॉमा केयर पॉलिसी तैयार करने में विशेष भूमिका निभाने वाले व संगोष्ठी के विशिष्ठ अतिथि पूर्व चिकित्सा महानिदेशक डा. बीडी अथानी ने ट्रामा या पॉली ट्रामा मल्टी स्पेशलिटी क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि देशभर में एक्सप्रेस हाईवे के विस्तारीकरण से सड़क दुर्घटनाओं में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है,लिहाजा घटनाओं से ग्रसित होने वाले मरीजों को परिणामत: विकलांगता का शिकार होना पड़ता है। ऐसे में वर्तमान समय की मांग है कि चोट लगने के प्रथम दिन की चिकित्सा के समय से ही पीएमआर विभाग को मरीज के पुनर्वास पर ध्यान देने की आवश्यकता है। लिहाजा पीएमआर चिकित्सक को ट्रॉमा टीम में महत्वपूर्ण भूमि निभानी चाहिए। आईएपीएमआर के अध्यक्ष संजय वाधवा व सचिव डा. नविता व्यास ने इस आयोजन पर हर्ष जताया और एम्स ऋषिकेश के पीएमआर विभाग की प्रगति व विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों पर संतोष जताया। इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश की आयुष विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना, डा. श्रीपर्णा बासू,आयोजन समिति की अध्यक्ष डा. राजलक्ष्मी एच. अय्यर, आयोजन सचिव डा. राजकुमार यादव, डा. ओसामा नेयाज, डा. अंकिता काबि, डा. आशुतोष कौशल, डा. संजय अग्रवाल, डा. निशीथ गोविल,डा. पूनम अरोड़ा, डा. भारत भूषण भारद्वाज, डा. देवेंद्र त्रिपाठी, डा. सुबोध कुमार, डा. मृदुल धर,सीएमसी वैल्लूर के डा. हेनेरी प्रकाश, बीटीएस, इटली की क्लिनिकल एक्सपर्ट मिखौल कोलूसिनी, डा. विनय कन्नौजिया, डा. सुव्रत गुप्ता, डा. देवाशीष, डा. राहुल,डा. विनायक,डा. प्राची,डा. रिद्धिमा, आकृति, तनुज आदि ने सहयोग किया।
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जिलाधिकारी ने डेंगू से निपटने के दिए निर्देश हल्द्वानी-  डेंगू एवं वायरल फीवर को देखते हुए जिलाधिकारी श्री सविन बसंल ने शनिवार की देर सांय आईएमए के साथ ही स्थानीय पैथोलोजी लैब संचालकों तथा प्राईवेट चिकित्सालयों से अपील की है कि वह जनपद में विशेषकर हल्द्वानी महानगर में डेंगू के प्रकोप को नियंत्रित करने में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य महकमें का सहयोग करें। श्री बंसल ने बेस चिकित्सालय की पैथोलोजी लैब में बीडी पाण्डेय चिकित्सालय के डाॅ.प्रियांशु श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से बेस चिकित्सालय में रविवार से ही सम्बद्ध करने के आदेश जारी किये। उन्होंने बेस चिकित्सालय पैथोलोजी लैब में 2 लैब टैक्नीशियन व 4 पेरामेडिकल स्टाफ, 2 डाटा एंट्री आॅपरेटर तैनात करने के निर्देश भी दिये।
जिलाधिकारी ने बताया कि मौसम में परिवर्तन के चलते डेंगू में कमी होने लगी है, फिर भी एहतियात जरूरी है। आने वाले लगभग 40 दिन डेंगू से निपटने के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बेस अस्पताल में एलाईजा का परीक्षण निःशुल्क है, लेकिन प्राईवेट पैथोलाॅजी लेब में अत्यधिक पैसे लिए जा रहे हैं तथा हर लेब की दरें भी अलग-अलग हैं, मानवीय दृष्टिकोण को अपनाते हुए प्राईवेट पैथोलाॅजी लेबों की दरें निर्धारित की जायेंगी। इस हेतु उन्होंने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ.रश्मि पन्त को प्राईवेट लेब संचालकों के साथ तत्काल बैठक कर सहमति के आधार पर दरों का निर्धारण कराने के निर्देश दिए। डेंगू एवं वायरल फीवर को देखते हुए तीन अतिरिक्त मेडिकल आॅफीसर व एक चेस्ट फिजीशियन को बेस चिकित्सालय में तैनात किया गया है।
श्री बंसल ने प्रमुख चिकित्साधीक्षक बेस चिकित्सालय को पोस्ट आॅपरेशन वार्ड में खाली पड़े बेड़ों पर डेंगू मरीजो के लिए आरक्षित करने एवं रखे जाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने बताया कि बेस चिकित्सालय को विभिन्न मदों तथा डेंगू से सम्बन्धित औषधि व अन्य कार्य हेतु शासन से 54 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी गयी है।
बैठक में नगर निगम द्वारा डेंगू नियंत्रण के लिए नगर निगम द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए मेयर डाॅ.जोगेन्द्र पाल सिं रौतेला ने बताया कि इससे निपटने के लिए निगम व स्वास्थ्य महकमें को ठोस रणनीति से कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा डेंगू से बचाव एवं उपचार सम्बन्धी पोस्टर, बैनरों के अलावा विभिन्न विद्यालयों के माध्यम से क्षेत्रों में जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा महानगर में प्रातः 8 बजे से 2 बजे तक तथा अपरान्ह 3 बजे से रात्रि 8 बजे तक विशेष फोगिंग का कार्य किया जा रहा है

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