मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंस स जिलाधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की।##मानवाधिकार आयोग में वादों की अंतिम सुनवायी 31अगस्त तक नहीं होगी।#एम्स ऋषिकेश में एक युवती के पेट के 41किलो का ट्यूमर का सफल ऑपरेशन#पौड़ी में होम स्टे योजना के आवेदकों का साक्षात कार#जनपद पौड़ी के दुधारू पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान योजना को पूरे जनपद में चलाया जाएगा।पढिए Janswar.comमें।

समाचार प्रस्तुति-अरुणाभ रतूड़ी

मुख्य सचिव श्री ओम  प्रकाश ने सचिवालय में कोविड-19 पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने निर्देश दिये की होम आईसोलेशन का नियमानुसार पालन किया जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि होम आइसोलेशन किट सभी को शीघ्र मिल जाय। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा होम आइसोलेट किये गये लोगों के घरों पर जाकर उनको सभी जानकारी एवं आवश्यक दवाई उपलब्ध कराई जाय। उन्होंने कहा कि सोमवार से राज्य में आने वाले लोगों को बॉर्डर पर कुछ रियायते दी जायेंगी, जिससे आने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी। एक माह बाद त्योहारों का सीजन भी शुरू हो जायेगा, जिससे आवागमन में तेजी से वृद्धि होगी। इन बातों को ध्यान में रखते हुए सभी जिलाधिकारी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर लें। पर्यटक स्थलों पर भी लोगों की संख्या बढ़ेंगी। इसके लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाय। जिलाधिकारी पर्याप्त मैन पावर की व्यवस्था कर लें। अस्पतालों आक्सीजन बैड, आईसीयू और वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था हो। अगर किसी गम्भीर मरीज को रेफर करना हो तो, इसकी सूचना संबंधित अस्पताल को भी दी जाय, ताकि अस्पताल इसके लिए पहले से तैयार रहे।
       मुख्य सचिव श्री ओम प्रकाश ने कहा कि देहरादून में लोगों से शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ प्राइवेट लेब में टेस्ट कराने पर रिपोर्ट पॉजिटव आ रही है, जबकि सरकारी अस्पताल में उसी व्यक्ति की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। यह भी शिकायतें आ रही हैं कि देहरादून के प्राइवेट लेबों से लगभग 50 प्रतिशत लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिये कि जिन लोगों के प्राइवेट लेब में टेस्ट पॉजिटव आये हैं, उनमें से कुछ लोगों की सरकारी अस्पतालों में टेस्टिंग की जाय। यदि किसी प्राइवेट लैब द्वारा गलत रिपोर्ट दी जा रही है, तो उन पर सख्त कारवाई की जाय। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि यदि कोई गर्भवती महिला कोविड पॉजिटिव आ रही हैं, तो उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाय। उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ की संख्या को बढ़ाने के लिए नर्सिंग कॉलेज के फाइनल ईयर के बच्चों को हॉयर किया जाय। एनएचएम के मानकों के हिसाब से उन्हें वेतन दिया जाय। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने वालों और मास्क का प्रयोग न करने वालों पर लगातार कारवाई की जाय।  
        सचिव स्वास्थ्य श्री अमित नेगी ने कहा कि सभी जनपदों में कोविड कन्ट्रोल रूम में  सुपरविजन के लिए वरिष्ठ अधिकारी को रखा जाय। 24 घण्टे कार्मिकों की ड्यूटी हो, लोगों की समस्याओं का शीघ्र निदान किया जाय। कोविड केयर सेंटर, होम आईसोलेशन एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एम्बुलेंस की अलग-अलग व्यवस्था की जाय। कोविड केयर सेंटर में दिन में दो बार स्वास्थ्य परीक्षण जरूर करवाएं। सभी कोविड सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था हो। ट्रू-नॉट मशीन से सेंपलिंग और बढ़ाई जाय। फ्रन्ट लाइन कोरोना वॉरियर्स को भी आईवर मेक्टिन दवा दी जाय। सभी जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जनपदों में दवा की पर्याप्त उपलब्धता हो।
       इस अवसर पर सचिव श्री पंकज पाण्डेय, दून मेडिकल कॉलेज के डॉ आशुतोष सयाना, आईजी श्री संजय गुंज्याल, अपर सचिव श्री युगल किशोर पंत, श्रीमती सोनिका, डीजी स्वास्थ्य डॉ. अमिता उप्रेती, वीसी के माध्यम से सभी जिलाधिकारी, एसएसपी एवं सीएमओ उपस्थित थे
वादकारियों को व्यक्तिगत रूप से आने की जरूरत नहीं अपना प्रत्युत्तर डाक/ईमेल/फैक्स से भेज सकते हैं- मानवाधिकार आयोग

कोविड-19 के दृष्टिगत उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग, देहरादून में पूर्व से निर्धारित प्रतिवादों की अंतिम सुनवाई दिनांक 31 अक्टूबर, 2020 तक नहीं होगी। अतः वादकारियों को व्यक्तिगत रूप से आयोग कार्यालय में उपस्थित होने की आवश्यकता नही है। वादकारी अपना प्रतिउत्तर डाक/ई-मेल/फैक्स द्वारा भेज सकते हैं।
यह जानकारी प्रशासनिक अधिकारी, उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग श्री हरीश चन्द्र पाण्डेय द्वारा दी गई।
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एम्स ऋषिकेश में 24 वर्षीय युवती के शरीर से 41 किलोग्राम के ओवरियन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के चिकित्सकों ने बिजनौर निवासी एक 24 वर्षीय युवती के शरीर से 41 किलोग्राम के ओवरियन ट्यूमर का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर युवती को जीवनदान दिया है। चिकित्सकों ने बताया कि ओवरियन कैंसर ट्यूमर का यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने युवती की जान बचाने के लिए इस जटिल सर्जरी की सफलता पर चिकित्सकीय टीम की प्रशंसा की है। एम्स निदेशक ने बताया कि हम खासतौर पर कैंसर से ग्रस्त गरीब और जरुरतमंद महिला रोगियों के लिए विशेष सेवा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में जल्द ही आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) की सुविधा शुरू हो जाएगी। स्त्री एवं प्रसूति विभाग में रोबोटिक और लेप्रोस्कोपी विधि के माध्यम से भी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। साथ ही विभागीय चिकित्सकों की अलग-अलग टीमों द्वारा समय-समय उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश के स्कूलों और सुदूरवर्ती गांवों में नियमिततौर पर चिकित्सा एवं परामर्श शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
एम्स के गाइनी विभाग के चिकित्सकों के अनुसार यह युवती बिजनौर से पेट में गांठ व दर्द की शिकायत लेकर एम्स ऋषिकेश आई थी, बताया गया कि महिला को पिछले 6 वर्षों से यह शिकायत थी व उसके पेट में ट्यूमर छह साल से धीरे-धीरे बढ़ रहा था। पिछले एक साल से उसे चलने फिरने और खड़े रहने में कठिनाई होने लगी थी। उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश आने से पूर्व उक्त युवती उत्तरप्रदेश के कई सरकारी व निजी अस्पतालों में अपने रोग के उपचार के लिए गई थी, मगर हर जगह से निराशा ही हाथ लगी व उसे इलाज संभव नहीं होने की बात कहकर रेफर कर दिया गया। आखिरकार थक-हारकर वह एम्स ऋषिकेश आई। जहां युवती की संपूर्ण जांच के बाद उसके पेट में 50×40 सेमी. का ओवरियन ट्यूमर पाया गया।

एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डा. कविता खोईवाल और उनकी टीम मेंबर डा. ओम कुमारी, डा. राहुल मोदी व डा. अंशु गुप्ता ने युवती ऑपरेशन किया जिसमे 41 किलोग्राम का ओवरियन कैंसर ट्यूमर निकाला गया। इसके अलावा इस ऑपरेशन में एनेस्थिसिया विभाग की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसमें डा. प्रियंका गुप्ता और उनकी टीम के अन्य सदस्य शामिल रहे।
संस्थान की स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. कविता खोईवाल ने बताया कि यह एक जटिल चुनौती थी, क्योंकि हमें एक महिला रोगी के शरीर से बड़े साइज के ट्यूमर को हटाना था, जो कि मरीज के शरीर के कुल वजन का लगभग 60 प्रतिशत था। उन्होंने बताया कि ओवरियन कैंसर ट्यूमर का यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डा. जया चतुर्वेदी ने बताया कि युवती की बीमारी से जुड़ा यह मामला विशेषकर दूरदराज के गांवों की महिलाओं की दुर्दशा को उजागर करता है, जिन्हें चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिल पाता है और वह इस तरह की अवस्था तक पहुंच जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के ओवरियन ट्यूमर के मामले काफी कम सामने आते हैं, साथ ही ट्यूमर के इतने बड़े आकार व इस स्थिति में आने से मरीज को बचा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
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जिलाधिकारी श्री धीराज सिंह गर्ब्याल के दिशा निर्देशन में आज विकास भवन सभागार पौड़ी में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित वीरचंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना एवं दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत जिला पर्यटन विकास अधिकारी कुशाल सिंह नेगी ने गठित कमेटी की मौजूदगी में योेजना से आधारित आवेदकों की साक्षात्कार ली। जिसमें आवेदकों द्वारा प्रेषित दस्तावेजों की जांच परीक्षण कर, उनके योजना के प्रति लगाव की जानकारी भी टटोली की गई। साक्षातकार हेतु 19 आवेदकों के आनलाइन आवेदन प्राप्त हुए।  
    शनिवार को विकास भवन सभागार में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना एवं दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत कुल 19 अभ्यार्थी द्वारा आवेदन किए। जिसमें 06 होम स्टे के लिए, 10 वाहन के लिए व 03 होटल/रेस्टोरेन्ट के लिए आवेदन आनलाइन के माध्यम से प्राप्त हुई। आयोजित साक्षात्कार  में आवेदको के दस्तावेजों की जांच के दौरान 01 होम स्टे के लिए व 04 वाहन आवेदकोे के दस्तावेज आवेदन अपूर्ण पाये गये। जिला पर्यटन विकास अधिकारी श्री नेगी ने आवेदकों को सुझाव देते हुए कहा कि उक्त योजना की सुगमता पूर्वक लाभ लेने हेतु अपनी क्षमता के अनुसार बैंकों से ऋण ले। जिससे बैंक के साथ बेहतर समन्यवय एवं व्यवसायिक को गति मिल सकें। उन्होने राज्य सरकार की इस महत्वकांक्षी योेजना का अधिक से अधिक लाभ उठाते हुए अपने ही क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने को कहा। जिससे लाभार्थी अपनी आर्थिकीय को मजबूत कर सकेंगें। उन्होंने यह भी कहा कि अब समस्त आवेदक आनलाइन ही आवेदन कर सकेंगे।
इस अवसर में लीड बैंक अधिकारी भूपेश नौटियाल, नवार्ड बैंक के अधिकारी भूपेंद्र सिंह, आरसेटी बैंक के जे0के0 जोशी, एआरटीओ बीरेंद्र विराटिया, उद्योग विभाग से माधव सिंह रावत उपस्थित थे।

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पौड़ी गढवाल:प्रधानमंत्री मा0 नरेन्द्र मोदी का महत्वकाक्षी योजना के तहत पशुपालन के क्षेत्र में किसानों की आय को दो गुना करने के कार्यो में तेजी लाते हुए, जिलाधिकारी ने जनपद में अपने सूझबूझ से जिला योजना के तहत माॅसएआई/सामूहिक कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को विकसित करने की कवायद शुरू किया है। क्षेत्र में जन जागरूकता हेतु शिविर के माध्यम से वृहद बछिया प्रदर्शनी का आयोजन कर, उत्कृष्ट बछिया के पशुपालक को पुरस्कृत भी किया जा रहा है। जबकि कृत्रिम गर्भाधान हेतु चयनित गायों को चारा भी मुहैया करा रहे है। जिसके तहत ग्रामीण पशुपालकों ने अपने गायों को उच्च नस्ल की जर्सी से कृत्रिम गर्भाधान कर, अपनी पशुधन को व्यवसायिक स्वरूप देने में जुटी है।
योजना के तहत जिन गायों से पशुपालन प्रतिदिन औसतन तीन किलो दूध प्राप्त करते आ रहे है। उनके बछिया तीन वर्ष गर्भित होकर माॅ बनने पर प्रतिदिन 9 किलो दूध दे सकते है। कृत्रिम गर्भाधान से हुए हर गाय तीन गुना अधिक दूध प्रतिदिन देती है। यही नहीं माॅसएआई/सामूहिक कृत्रिम गर्भाधान से अनावश्यक वचनों से किसानों को राहत मिल सकेंगा। साथ ही आवारा एवं बेसहारा पशुओं की दर्दनाक मौत को भी टाला जा सकेगा। सड़कों पर आवारा नर पशु की दुर्घटनाओं में क्षति एवं जन सामान्य को होने वाली शारीरिक एवं आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए भी कृत्रिम गर्भाधान एक क्रांतिकारी तरीका है। जिलाधिकारी गढ़वाल के मार्गदर्शन में पशुपालन विभाग द्वारा जलागम ग्राम्या के सहयोग से पोखड़ा एवं एकेश्वर विकास खंडों में गायों में बांझपन की समस्या दूर करने के साथ-साथ समूह में नस्ल सुधार करने हेतु महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में माॅसएआई/सामूहिक कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम की शुरुआत की गई। जिसमें दोनों विकास खंडों में 2000 गायों में सामूहिक कृत्रिम गर्भाधान का कार्य जर्सी नश्ल से किया गया। उक्त कार्यक्रम की सफलता दर लगभग 42 प्रतिशत रही है, दोनों विकास खंडों में उच्च अनुवांशिक गुणवत्ता युक्त 616  बछिया अभी तक पैदा हो चुकी है एवं 200 से अधिक गाय वर्तमान में गर्भित है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 एस. के. बर्तवाल ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर दोनों विकास खंडों की सफलता से प्रेरित होकर सामूहिक कृत्रिम गर्भाधान का विस्तार पूरे जनपद में जिला योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। जिसके तहत जनपद के अन्य क्षेत्रों में 1000 से अधिक गायों मे सामूहिक कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है तथा 1300 से भी अधिक गायों में सामूहिक कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के अंतर्गत नस्ल सुधार कार्य प्रगति पर है। जनपद में राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के अंतर्गत नश्ल सुधार कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसमें केवल लिंग वर्गीकृत उपयोग करना सुनिश्चित कर पशु पालकों की आय में वृद्धि करने एवं बछड़ो के उत्पादन को रोकना सुनिश्चित करने के लिए जनपद गढ़वाल में एक अनूठी पहल शुरूआत की गई है। जो कि आने वाले समय में अन्य जनपदों में हेतु मार्गदर्शक के रुप में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। जनपद में कृत्रिम गर्भाधान हेतु पशुपालक द्वारा संपर्क किए जाने पर उसे समस्त नस्लों के कृत्रिम गर्भाधान हेतु मात्र रू 100 का भुगतान करना होगा। शेष धनराशि जिला योजना अंतर्गत दिए गए अनुदान से समायोजित की जाएगी।

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