मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वन, सेवायोजन एवं कौशल विकास, श्रम तथा आयुष विभाग की समीक्षा की।#मुख्यसचिव ने सचिवालय में बद्रीनाथ-केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की।#एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध।#पौड़ी गढवाल में कोविड-19 की अद्यतन स्थिति।पढिए Janswar.Com में

समाचार प्रस्तुति-अरुणाभ रतूड़ी

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वन, सेवायोजन एवं कौशल विकास, श्रम तथा आयुष विभाग की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के साथ वन, सेवायोजन एवं कौशल विकास, श्रम तथा आयुष विभाग की समीक्षा की।
वन विभाग- वन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि उत्तराखण्ड के वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बुकिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया जाय। ऑनलाईन बुकिंग के लिए एप्प विकसित किया जाए। लकड़ी एवं आरबीएम के लिए लोगों को एप्लाई करने के बाद निश्चित समयावधि में अनुमति मिल जाय, इसके लिए लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो। लोगों के हक-हकूकों का पूरा ध्यान रखा जाय। इसको सेवा के अधिकार के तहत सम्मिलित किया जाय। व्यावसाईयों के लिए जो रवन्ने जारी हो रहे हैं, उनकी चैक पोस्ट पर नियमित चैकिंग की जाए। चैक पोस्टों पर कैमरे की व्यवस्था एवं पूरी प्रक्रिया ऑनलाईन की जाय। वन विभाग द्वारा जहां भी वृक्षारोपण करवाया जा रहा है,उन वृक्षों की सुरक्षा के लिए सुनियोजित कार्ययोजना बनाई जाय। हमारा उद्देश्य केवल वृक्षारोपण तक सीमित न हो, बल्कि इनकी सुरक्षा के लिए भी जिम्मेदारी तय की जाय। वृक्षारोपण एवं उनकी सुरक्षा के लिए जन सहयोग लिया जाय। वन विभाग द्वारा राजस्व वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाय। औषधीय आधारित ग्रोथ सेंटर विकसित करने के लिए योजना बनाई जाय। वन विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य करने वाले श्रमिकों का भुगतान समय पर हो। वनाग्नि को रोकने के लिए समुचित प्रयासों की जरूरत है।
कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि कार्बेट टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत ढेला ‘रेस्क्यू सेन्टर’ एवं पाखरो ‘टाइगर सफारी’ की स्थापना का कार्य प्रगति पर है, गर्जिया टूरिज्म जोन की स्थापना की जा रही है। धनगढ़ी म्यूजियम का उच्चीकरण किया जा रहा है। पिछले तीन सालों में प्रतिवर्ष औसतन 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया। प्रदेश में 14.77 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित है, जो राष्ट्रीय औसत से तीन गुना है। राज्य में 2006 में बाघों की संख्या 178 थी, जो 2018 तक बढ़कर 442 हो गई है। हाथियों की संख्या 2017 तक 1839 थी, जो अब बढ़कर 2026 हो गई है। वर्षा जल संरक्षण की दिशा में 02 वर्षों में लगभग 68.37 करोड़ ली0 वर्षा जलसंचय की संरचनाओं का निर्माण किया गया। इस वर्ष 41.00 करोड़ ली0 जल संचय का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों हेतु Springshed Management Consortium का गठन किया गया है। 68 जल धाराओं का पुनरोद्धार हेतु कार्य प्रगति पर है। वन विभाग द्वारा पिछले तीन सालों में विभिन्न योजनाओं के तहत 1 लाख 20 हजार लोगों को रोजगार दिया गया। जायका परियोजना के तहत ग्रोथ सेन्टर के माध्यम से संबंधित क्लस्टर फेडरेशन एवं स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास एवं पैकेजिंग सम्बंधित कार्यों को फैसिलिटेट किया जा रहा है। वर्ष 2020-21 में 5 तथा वर्ष 2021-22 में 10 ग्रोथ सेन्टर्स की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
आयुष विभाग- आयुष विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने निर्देश दिये कि आयुष विभाग द्वारा लोगों को योग, प्रणायाम डाइट चार्ट एवं आयुष से संबधित विभिन्न गतिविधियों के बारे में विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जाय। कोविड के दौरान आयुष और होम्योपेथी की ओर लोगों का रूझान बढ़ा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रयास किये जाय कि अधिकांश जगह पर लोगों को आयुष, होम्योपैथी एवं ऐलोपैथिक सुविधाएं मिल जाये। जिन जनपदों में आयुष विभाग का अपना भवन नहीं हैं, जिलाधिकारियों के माध्यम से लंबे समय से खाली सरकारी भवनों या स्कूलों में व्यवस्था की जाय। चरक डांडा में अन्तरराष्ट्रीय शोध संस्थान के लिए जल्द डीपीआर बनाई जाय।
आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि कोविड के दौरान आयुष विभाग द्वारा 02 लाख से अधिक काढ़ा के रूप में सुरक्षा किट वितरित की गई। आयुष विभाग द्वारा प्री कोविड और पोस्ट कोविड किट तैयार की गई है।
सेवायोजन एवं कौशल विकास- सेवायोजन एवं कौशल विकास की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन 25 आईटीआई को अपग्रेड किया जा रहा है। उनमें प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था के साथ ही प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों के प्रतिभा प्रदर्शन एवं प्रोत्साहित करने के लिए प्रोडक्शन एवं मार्केटिंग की व्यवस्था भी की जाय। समय एवं परिस्थितियों के साथ आईटीआई के स्वरूप में बदलाव लाना होगा। स्किल एवं लाइवलीहुड सेंटरों की मजबूती की दिशा में कार्य किये जाय। आधुनिकतम तकनीकि के साथ अभिनव प्रयोगों पर ध्यान देने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाय कि उत्तराखण्ड के औद्योगिक संस्थानों में 70 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। इसके लिए उद्योग विभाग की जिम्मेदारी तय की जाय।
श्रम विभाग- श्रम विभाग की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि वर्ष 2017 में उत्तराखण्ड दुकान और स्थापन अधिनियम में संशोधन किया गया जिसके अंतर्गत दस से कम कर्मकार नियोजित करने वाले दुकानों एवं स्थापनां को पंजीयन की आवश्यकता नहीं रह गई है। पंजीयन एक बार किया जायेगा। नवीनीकरण की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। कारखाना अधिनियम, 1948 के अन्तर्गत महिला कर्मकारों को भी कारखानों में तीनों पालियों में कार्य करने की छूट दी गई है। कारखाना अधिनियम, 1948 के अन्तर्गत कारखानों के लाइसेंस का नवीनीकरण 10 वर्ष तक किये जाने की व्यवस्था की गई है, जिससे व्यापार में सुगमता आई है। वैश्विक महामारी कोविड-19 के दृष्टिगत राज्य में स्थापित समस्त कारखानों को 12-12 घण्टे की दो पालियों में कार्य करने की अनुमति दी गई जिसमें 4 घण्टे ओवरटाईम के रखते हुये नियमानुसार भुगतान की व्यवस्था की गई। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अन्तर्गत किये गये सुधारों में विभिन्न श्रम अधिनियमों/कारखाना तथा ब्वॉयलर अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण तथा नवीनीकरण का समस्त कार्य ऑनलाईन किया जा रहा है। कारखानों में थर्ड पार्टी निरीक्षण/ऑडिट की व्यवस्था शुरू की गई है। विभागीय वेबसाईट को उद्योग विभाग के सिंगल विंडों सिस्टम तथा भारत सरकार के श्रम सुविधा पोर्टल के साथ इंटीग्रेट किया गया है।

इस अवसर पर पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस.नेगी, मुख्यमंत्री के तकनीकि सलाहकार डॉ. नरेन्द्र सिंह, प्रमुख सचिव श्री आनन्द वर्द्धन, सचिव श्री अमित नेगी, श्री हरबंस सिंह चुघ, श्री शैलेष बगोली, डॉ. रणजीत सिन्हा, प्रमुख वन संरक्षक श्रीमती रंजना काला, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यसचिव ने सचिवालय में बद्रीनाथ-केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की।

मुख्य सचिव श्री ओमप्रकाश ने बुधवार को सचिवालय में बद्रीनाथ-केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि केदारनाथ एवं बद्रीनाथ पुनर्निर्माण कार्यों को निर्धारित समय सीमा के अन्दर पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने सभी कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिए जाने के भी निर्देश दिए।
सचिव लोनिवि श्री आर सुधांशु ने बताया कि केदारनाथ हेतु नए मशीनी उपकरणों को एयरलिफ्ट कर लिया गया है, जो 17 नवम्बर तक असेम्बल कर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि केदारनाथ में 03 गुफाओं का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है। बताया गया कि केदारनाथ हैलीपैड के पास 50 फेब्रीकेटेड दुकानों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
मुख्य सचिव श्री ओमप्रकाश ने तीनों गुफाओं को 11 नवम्बर, 2020 तक गढवाल मंडल विकास निगम को हैंडओवर करने के निर्देश दिए। उन्होंने सोनप्रयाग की पार्किंग क्षमता वृद्धि कार्य को 31 दिसम्बर तथा सीतापुर में नवीन पार्किंग स्थल निर्माण की फाईनेंशियल बिडिंग का कार्य 15 नवम्बर तक पूर्ण करने के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने लोनिवि को केदारनाथ में आवश्यक स्टाफ की शीघ्र तैनाती करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केदारनाथ में फेज-2 के कार्यों की निविदा आबंटन का कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी नदी पर बनने वाले 60 मीटर पुल को दिसम्बर तक पूर्ण कर लिया जाए।
मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ में रोड शिफ्टिंग के कार्य हेतु लोनिवि एवं बीआरओ द्वारा संयुक्त सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसका फीजिबिलिटी टैस्ट एवं हिमस्खलन सम्भावित क्षेत्र में रोड की सुरक्षा समाधान के लिए तकनीकी सलाह लेने के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने मंदाकिनी फ्लड ज़ोन एवं अलकनन्दा फ्लड ज़ोन कार्य में तेजी लाने के निर्देश देते हुए इसे ससमय पूर्ण करने की बात कही।
मुख्य सचिव ने सचिव राजस्व को भूमिधरी अधिकार का शासनादेश शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बद्रीनाथ मास्टर प्लान हेतु आवश्यक सर्वे की अद्यतन स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ पुनर्निर्माण हेतु आवश्यक सर्वे हेतु समय सीमा निर्धारित करते हुए सर्वे का कार्य शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करवा लिया जाए।

इस अवसर पर सचिव पर्यटन श्री दिलीप जावलकर, आयुक्त गढ़वाल मंडल श्री रविनाथ रमन, सचिव राजस्व श्री सुशील कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध।                                                                                                                                                                           

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश की ओर से मूत्राशय, प्रजनन अंगों और किडनी के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। संस्थान के यूरोलाॅजी विभाग में इस बीमारी के निदान के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा के साथ ही उच्चस्तरीय तकनीक आधारित उपचार उपलब्ध है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार इस तकनीक से की जाने वाली सर्जरी के दौरान जहां जोखिम का खतरा निहायत कम हो जाता है, साथ ही रोगी को अस्पताल से जल्दी छुट्टी दे दी जाती है।

एम्स ऋषिकेश के यूरोलॉजी विभाग में मूत्र संबंधी रोगों, मूत्राशय, गुर्दे, प्रोस्टेट, लिंग और अंडकोष को प्रभावित करने वाले यूरोलॉजिकल कैंसर के निदान की अत्याधुनिक तकनीक की सभी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही संस्थान में मूत्र रोग से संबंधित किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित रोगियों की नई तकनीकियों के तहत रोबोट की सहायता से भी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि संस्थान के यूरोलाॅजी विभाग में पुरुष व महिलाओं के मूत्र पथ और पुरुष प्रजनन अंगों की कैंसर से जुड़ी बीमारियों के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम कार्य कर रही है।

प्रोस्टेट कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब करते समय परेशानी होना, पेशाब में रक्त आना, वीर्य में रक्त आना, पेल्विक क्षेत्र में असुविधा और रीढ़ की हड्डी में दर्द होना शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर का पता स्क्रीनिंग, डिजिटल रेक्टल जांच और रक्त परीक्षण (यानी सीरम पीएसए) के माध्यम से लगाया जाता है।

मूत्राशय के कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब में रक्त आना, पेशाब करते समय दर्द होना, पेल्विक( पेड़ू ) में दर्द और बार-बार पेशाब आना इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में शामिल है।

किडनी के कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब में खून आना, भूख में कमी होना, वजन में गिरावट, थकान होना, बुखार और पेट में गांठ बन जाना।


पौड़ी गढवाल में कोविड-19 की अद्यतन स्थिति।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में स्थापित वार रूम से प्राप्त आज दिनांक 04.11.2020 को समय 02ः00 बजे की रिर्पोट के अनुसार जनपद में आरटीपीसीआर, रेपिड एन्टीजन व ट्रूनेट रूप से 78 हजार 932 सैम्पल जांच हेतु भेजे गये, जिनमंे से 69 हजार 708 नेगेटिव, 6 हजार 249 लम्बित, 1 हजार 632 अस्वीकृत तथा 2 हजार 975 कोरोना संक्रमित रोगी पाये गये। कोरोना संक्रमित 2 हजार 975 में से 2 हजार 574 स्वस्थ हो चुके है, जबकि 32 की मृत्यु हुई तथा 369 एक्टिव केस हैं। वर्तमान समय में 98 रोगी आइसोलेशन में भर्ती हंै, जिनमंे 28 बेस हाॅस्पिटल श्रीकोट तथा 70 बेस हाॅस्पिटल कोटद्वार में है। कोविड केयर सेंटर के अन्तर्गत 35 लोग हैं, जिनमंे 21 नर्सिंग काॅलेज डोबश्रीकोट, 05 सीसीसी कोड़िया कैम्प मंे, 05 गीता भवन स्वर्गाश्रम ट्रस्ट तथा 04 डीसीसीसी सतपुली में है।

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