मुख्यमंत्री ने दि हिमालयन कप ऑल इण्डिया फुटबॉल टूर्नामेंट की विजेता टीम को  प्रदान की ट्रॉफी#एम्स ऋषिकेश में काग्निटिव फंक्शन टेस्टिंग एण्ड द रॉल ऑफ इमेरजिंग टैक्नीक’ विषय  पर सीएमई कम वर्कशॉप आयोजित-www.janswar.com

-अरुणाभ रतूड़ी

 

  • मुख्यमंत्री ने दि हिमालयन कप ऑल इण्डिया फुटबॉल टूर्नामेंट की विजेता टीम को  प्रदान की ट्रॉफी
  • प्रदेश में खेल एवं खिलाड़ियों के प्रोत्साहन हेतु बनायी गई है नई खेल नीति
  • देश में विभिन्न खेलों में बन रही है उत्तराखण्ड की पहचान
  • सफलता का एक ही मूल मंत्र विकल्प रहित संकल्प- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के युवा खिलाड़ियों से दृढ़ इच्छा शक्ति एवं मेहनत के साथ विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन पर ध्यान देने की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि सफलता का एक ही मूलमंत्र है विकल्प रहित संकल्प। युवा खिलाड़ी अपना लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिये पूरी मेहनत एवं एकाग्रता के साथ प्रयास करे। युवा जिस भी क्षेत्र में जाए वहां लीडर बनने का प्रयास करें।

सोमवार को स्थानीय पवेलियन ग्राउण्ड में दि हिमालयन कप ऑल इण्डिया फुटबाल टूर्नामेंट के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे युवा खिलाड़ी विभिन्न खेल की प्रतियोगिताओं में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहे ह,ै जिससे देश में उत्तराखण्ड की पहचान बन रही है। यह हमारे खिलाड़ियों की खेलों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिचायक है। हमारा यह भी प्रयास है कि भारत के पौराणिक खेलों जैसे कबड्डी , खो-खो, फुटबॉल अथवा प्राचीन मल्ल, अखाड़ों से निकला गतका और मलखम्ब को विश्व पटल पर पहचान दिलायी जाए। एक समय पर भुला दिए गए ये सभी खेल आज देश-विदेश में खूब प्रसिद्ध हो रहे हैं। हमारा निरंतर यह प्रयास है कि हम खेलों के माध्यम से भी सांस्कृतिक संवर्धन का कार्य करें ताकि हमें अतीत का ज्ञान रहे और लुप्त हो रही विधाएं जीवित रहें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं भी फुटबॉल के प्रशंसक रहे हैं। खेल के मैदान में भी उत्तराखंड अग्रणी राज्य बने, इसी के तहत राज्य में खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन हेतु नई खेल नीति बनाई गई है। हमारी सरकार ने खेल दिवस-2022 के अवसर पर “मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना“ प्रारंभ की थी तथा कुछ समय पहले राज्य के प्रतिभाशाली उभरते खिलाड़ियों के लिए खेल छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया था जो शुरू कर दी गयी है। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना में 08 से 14 वर्ष के उभरते खिलाड़ियों को 1500 रूपये प्रतिमाह की खेल छात्रवृत्ति दी जा रही है। हर जिले के 150 बालक और 150 बालिकाओं अर्थात प्रदेश के कुल 3900 उभरते खिलाड़ियों को खेल छात्रवृत्ति दी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पोर्ट्स कॉलेज रायपुर को अंतराष्ट्रीय स्तर की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाने हेतु प्रयास किये जा रहे हैं। खेल छात्रावासों के खिलाड़ियों का दैनिक भत्ता 175 रूपए से बढ़ाकर 225 रूपए प्रति छात्र किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री स्वस्थ युवा, स्वस्थ उत्तराखंड योजना के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर ओपन जिम के लिए 10 करोड़ रूपए का बजट में प्राविधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में नये भारत, शक्तिशाली भारत और गौरवशाली भारत का निर्माण हो रहा है। आज पूरे देश का युवा पूरी तरह से प्रधानमंत्री श्री मोदी के साथ है। पूरे विश्व में प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हर क्षेत्र की भांति खेलों में भी भारत का मान सम्मान बढ़ रहा है। दुनिया में कहीं भी खेल का मैदान हो, आज भारत का तिरंगा लहराता दिख रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की। खेलो इंडिया कार्यक्रम इसी सोच का एक अच्छा उदाहरण है। आज खेल प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें हर जरूरी सहयोग देना शुरू किया गया है। बेहतर ट्रेनिंग सुविधाएं खिलाड़ियों को दी जा रही हैं। भारत खेल शक्ति के तौर पर भी उभर रहा है। हमारे खिलाड़ियों के जीते सोने और चांदी के पदकों ने देश के आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है। विश्व स्तर पर भी हमारे खिलाड़ियों को सम्मान प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की अपेक्षा के अनुरुप वर्ष 2025 तक उत्तराखण्ड को प्रत्येक क्षेत्र में आदर्श राज्य बनाने के लिए हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं तथा इसके लिये हम संकल्पबद्ध भी है। देवभूमि उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के लिए पूरी निष्ठा से हमे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा तभी सबके समेकित प्रयासों से हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एम वी एजुकेशन सोसाइटी द्वारा आयोजित ऑल इण्डिया हिमालयन फुटबॉल कप टूर्नामेंट में विजेता टीम गढ़वाल हीरोज को ट्रॉफी प्रदान की।

समापन समारोह में कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, मेयर श्री सुनील उनियाल गामा, विशेष प्रमुख सचिव श्री अभिनव कुमार एवं खेल विभाग के अधिकारी, खेल संघों के प्रतिनिधि, फुटबॉल के साथ ही अन्य खिलाड़ी उपस्थित थे।

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एम्स ऋषिकेश में काग्निटिव फंक्शन टेस्टिंग एण्ड द रॉल ऑफ इमेरजिंग टैक्नीक’ विषय  पर सीएमई कम वर्कशॉप आयोजित

 

एम्स ऋषिकेश में आयोजित नेशनल स्तर की सीएमई कम वर्कशॉप में देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मेडिकल के क्षेत्र में कॉग्निटिव साईंस को बहुउपयोगी बताया। इस दौरान प्रतिभागियों को प्रशिक्षण भी दिया गया।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के फिजियोलॉजी विभाग के तत्वाधान में ’काग्निटिव फंक्शन टेस्टिंग एण्ड द रॉल ऑफ इमेरजिंग टैक्नीक’ विषय पर आयोजित सीएमई कम वर्कशॉप में मेडिकल के क्षेत्र में ज्ञानात्मक साईंस की उपयोगिता के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन और फिजियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. लतिका मोहन के नेतृत्व में आयोजित इस नेशनल स्तर की सीएमई में वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए एक-दूसरे के साथ उक्त विषय पर अपने अनुभव साझा किए। फार्माकोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष व कार्यवाहक अधिष्ठाता प्रो. एस.एस हांडू ने कार्यशाला को प्रशिक्षण की दृष्टि से फार्माकोलॉजी विभाग के लिए भी भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने फिजियोलॉजी विभाग द्वारा न्यूरो डायग्नोस्टिक के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि इससे मेडिकल के अन्य छात्र भी अनुभव हासिल कर सकेंगे।
इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव कुमार मित्तल ने कहा कि काग्निटिव साईंस के माध्यम से रोगी की देखभाल और उसके उपचार में भी लाभ उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला से न केवल बेसिक साईंस के रेजिडेन्टों को अपितु न्यूरोलॉजी व मेडिसिन के छात्रों को भी लाभ प्राप्त होगा। प्रो. मित्तल ने कहा कि संस्थान की निदेशक प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में संस्थान मेडिकल के विभिन्न क्षेत्रों में उन्नति की ओर अग्रसर है।

कार्यक्रम के सह अध्यक्ष फिजियोलॉजी विभाग के प्रो. प्रशान्त पाटिल ने सीएमई और कार्यशाला के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन के माध्यम से बेसिक मेडिकल साईंस और क्लीनिकल के छात्रों को विभिन्न स्तर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रो. पाटिल ने कहा कि वर्तमान में काग्निटिव र्साइंंस का विभिन्न क्षेत्रों में लाभ लिया जा रहा है। विभिन्न जांचों और मेडिकल तकनीकों में भी यह उपयोगी है।

सीएमई में एम्स नागपुर के डॉक्टर अशिलेष पाटिल, नेशनल इंस्टीटूयट ऑफ मेन्टल हेल्थ एण्ड न्यूरो साईंसेज बंगलौर के प्रो. देवव्रता कुमार और एम्स ऋषिकेश के फिजियोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रो. डॉ. सुनीता मित्तल सहित कई अन्य गेस्ट फेकल्टी ने अपने व्याख्यान दिए। इसके अलावा एम्स बिलासपुर की प्रो. रूपाली पार्लेवार, नॉर्थ ईस्टन इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एण्ड मेडिकल साईंसेज शिलांग की प्रो. ऋतु पर्णा बरुआ, जनरल मेडिसिन विभाग एम्स ऋषिकेश की विभागाध्यक्ष प्रो. मीनाक्षी धर और आयोजन सचिव फिजियोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अश्वनी महादुले ने भी संबोधित किया।

फिजियोलॉजी विभाग की डॉ. जयन्ती पन्त के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. योगेश, डॉ. अरूण गोयल, डॉ. पूर्वी कुलश्रेष्ठ, डॉ. पुनीत धमीजा, डॉ. मनीषा बिष्ट सहित कई चिकित्सक और मेडिकल के छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

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