भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का राष्ट्र के नाम विदाई संदेश # प्रधानमंत्री जी के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है :सीएम धामी#मुख्यमंत्री ने श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।www.Janswar.com

-अरुणाभ रतूड़ी

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का राष्ट्र के नाम विदाई संदेश

प्यारे देशवासियो,

नमस्कार!

  1. आज से पांच साल पहले, आप सबने मुझ पर अपार भरोसा जताया था और अपने निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से मुझे भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना था। आज मेरा कार्यकाल पूरा हो रहा है। इस अवसर पर मैं आप सभी के साथ कुछ बातें साझा करना चाहता हूं।
  1. सबसे पहले, मैं आप सभी देशवासियों के प्रति तथा आपके जन-प्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। पूरे देश में अपनी यात्राओं के दौरान, नागरिकों के साथ हुए संवाद और संपर्क से मुझे निरंतर प्रेरणा मिलती रही। छोटे-छोटे गांवों में रहने वाले हमारे किसान और मजदूर भाई-बहन, नई पीढ़ी के जीवन को संवारने वाले हमारे शिक्षक, हमारी विरासत को समृद्ध बनाने वाले कलाकार, हमारे देश के विभिन्न आयामों का अध्ययन करने वाले विद्वान, देश की समृद्धि बढ़ाने वाले उद्यमी, देशवासियों की सेवा करने वाले डॉक्टर व नर्स, राष्ट्र-निर्माण में संलग्न वैज्ञानिक व इंजीनियर, देश की न्याय व्यवस्था को योगदान देने वाले न्यायाधीश व अधिवक्ता, प्रशासन तंत्र को सुचारु रूप से चलाने वाले सिविल सर्वेंट्स, हर वर्ग को विकास से जोड़ने में सक्रिय हमारे सामाजिक कार्यकर्ता, भारतीय समाज में आध्यात्मिक प्रवाह को बनाए रखने वाले सभी पंथों के आचार्य व गुरुजन आप सभी ने मुझे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में भरपूर सहयोग दिया है। संक्षेप में कहूं तो समाज के सभी वर्गों का मुझे पूरा सहयोग, समर्थन व आशीर्वाद मिला है।
  1. मेरे मनो-मस्तिष्क में वे सभी क्षण विशेष रूप से अंकित रहेंगे जब मेरी मुलाक़ात अपनी सेनाओं, अर्धसैनिक बलों, तथा पुलिस के बहादुर जवानों से होती थी। उन सभी में देशप्रेम की अद्भुत भावना देखने को मिलती है। अपनी विदेश यात्राओं के दौरान, जब भी प्रवासी भारतीयों के साथ मेरा मिलना हुआ, हर बार मुझे मातृभूमि के प्रति उनके गहरे प्यार और अपनेपन का एहसास हुआ। देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार समारोहों के दौरान, मुझे अनेक असाधारण प्रतिभाओं से मिलने का अवसर मिला। वे सभी पूरी लगन, अटूट समर्पण और दृढ़ निष्ठा के साथ एक बेहतर भारत के निर्माण में सक्रिय हैं।
  1. इस प्रकार, अनेक देशवासियों से मिलने के बाद मेरा यह विश्वास और भी दृढ़ हुआ कि हमारे निष्ठावान नागरिक ही वास्तविक राष्ट्र-निर्माता हैं। और वे सभी भारत को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे सभी निष्ठावान देशवासियों के हाथों में हमारे महान देश का भविष्य सुरक्षित है।

प्यारे देशवासियो,

  1. अपने इन अनुभवों से गुजरते हुए अक्सर मुझे अपना बचपन भी याद आता रहा है कि किस तरह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं हमारे व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती रहीं।
  1. जब अपने छोटे से गांव में, एक साधारण बालक के नजरिए से मैं जीवन को समझने की कोशिश कर रहा था, तब देश को आजादी हासिल किए हुए कुछ ही साल हुए थे। देश के पुनर्निर्माण के लिए लोगों में एक नया जोश दिखाई देता था; उनकी आंखों में नए सपने थे। मेरे दिलो-दिमाग में भी एक धुंधली सी कल्पना उभर रही थी कि एक दिन शायद मैं भी अपने देश के निर्माण में भागीदारी कर सकूंगा। कच्चे घर में गुजर-बसर करने वाले एक परिवार के मेरे जैसे साधारण बालक के लिए हमारे गणतंत्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बारे में कोई भी जानकारी होना कल्पना से परे था। लेकिन यह भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि इसमें हर नागरिक के लिए ऐसे रास्ते खुले हैं जिनपर चलकर वह देश की नियति को संवारने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कानपुर देहात जिले के परौंख गांव के अति साधारण परिवार में पला-बढ़ा वह राम नाथ कोविन्द आज आप सभी देशवासियों को संबोधित कर रहा है, इसके लिए मैं अपने देश की जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था की शक्ति को शत-शत नमन करता हूं।
  1. चूंकि मैंने अपने गांव का उल्लेख किया है, तो मैं इस बात का भी उल्लेख करना चाहूंगा कि राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान अपने पैतृक गांव का दौरा करना और अपने कानपुर के विद्यालय में वयोवृद्ध शिक्षकों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना मेरे जीवन के सबसे यादगार पलों में हमेशा शामिल रहेंगे। इसी साल प्रधानमंत्री जी भी मेरे गाँव परौंख आए और उन्होंने मेरे गांव की धरती का मान बढ़ाया। अपनी जड़ों से जुड़े रहना भारतीय संस्कृति की विशेषता है। मैं युवा पीढ़ी से यह अनुरोध करूंगा कि अपने गाँव या नगर तथा अपने विद्यालयों तथा शिक्षकों से जुड़े रहने की इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहें।

प्यारे देशवासियो,

  1. आजकल सभी देशवासी ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं। अगले महीने हम सब भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे। हम 25 वर्ष की अवधि के उस ‘अमृत काल’ में प्रवेश करेंगे, जो स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष अर्थात 2047 में पूरा होगा। ये विशेष ऐतिहासिक वर्ष हमारे गणतंत्र के प्रगति-पथ पर मील के पत्थर की तरह हैं। हमारे लोकतन्त्र की यह विकास यात्रा, देश की स्वर्णिम संभावनाओं को कार्यरूप देकर विश्व समुदाय के समक्ष एक श्रेष्ठ भारत को प्रस्तुत करने की यात्रा है।
  1. आधुनिक काल में, हमारे देश की इस गौरव यात्रा का आरंभ ब्रिटिश हुकूमत के दौरान राष्ट्रवादी भावनाओं के जागरण और स्वाधीनता संग्राम के साथ हुआ। उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान पूरे देश में पराधीनता के विरुद्ध अनेक विद्रोह हुए। देशवासियों में नयी आशा का संचार करने वाले ऐसे विद्रोहों के अधिकांश नायकों के नाम भुला दिए गए थे। अब उनकी वीर-गाथाओं को आदर सहित याद किया जा रहा है। उन्नीसवीं सदी के अंतिम तथा बीसवीं सदी के आरंभिक वर्षों में नवीन जन-चेतनाओं का संचार हो रहा था और स्वाधीनता संग्राम की अनेक धाराएँ प्रवाहित हो रही थीं।
  1. वर्ष 1915 में जब गांधीजी स्वदेश लौटे, उस समय देश में राष्ट्रीयता की भावना और भी प्रबल हो रही थी। अनेक महान जननायकों की उज्ज्वल आकाश-गंगा का जैसा प्रकाश हमारे देश को बीसवीं सदी के आरंभिक दशकों में प्राप्त हुआ, वह विश्व इतिहास में अतुलनीय है। जहां एक ओर आधुनिक युग के एक ‘ऋषि’ की तरह, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, हमारी सांस्कृतिक विरासत से देशवासियों को फिर से जोड़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर बाबासाहब भीमराव आम्बेडकर समानता के आदर्श की ऐसी पुरजोर वकालत कर रहे थे जैसा अधिकांश विकसित देशों में भी दिखाई नहीं दे रहा था। तिलक और गोखले से लेकर भगत सिंह और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस तक; जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुकर्जी से लेकर सरोजिनी नायडू और कमलादेवी चट्टोपाध्याय तक – ऐसी अनेक विभूतियों का केवल एक ही लक्ष्य के लिए तत्पर होना, मानवता के इतिहास में अन्यत्र नहीं देखा गया है।
  1. मेरे मस्तिष्क में और भी कई विभूतियों के नाम उभर रहे हैं, लेकिन मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि स्वाधीन भारत की विभिन्न परिकल्पनाओं से सम्पन्न अनेक महान नेताओं ने भारत की स्वाधीनता के लिए त्याग और बलिदान के अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किए। इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वाधीनता संग्राम पर गांधीजी के परिवर्तनकारी विचारों का प्रभाव सबसे अधिक पड़ा और उस दौरान उन्होंने कोटि-कोटि देशवासियों की जीवनधारा को नयी दिशा दे दी।

देवियो और सज्जनो,

  1. लोकतन्त्र के जिस पथ पर हम आज आगे बढ़ रहे हैं उसकी रूप-रेखा हमारी संविधान सभा द्वारा तैयार की गयी थी। उस सभा में पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने वाले अनेक महानुभावों में हंसाबेन मेहता, दुर्गाबाई देशमुख, राजकुमारी अमृत कौर तथा सुचेता कृपलानी सहित 15 महिलाएं भी शामिल थीं। संविधान सभा के सदस्यों के अमूल्य योगदान से निर्मित भारत का संविधान, हमारा प्रकाश-स्तम्भ रहा है और इसमें निहित आदर्श, चिरकाल से संरक्षित भारतीय जीवन-मूल्यों का हिस्सा रहे हैं।
  1. संविधान को अंगीकृत किए जाने से एक दिन पहले संविधान सभा में अपने समापन वक्तव्य में, डॉक्टर आम्बेडकर ने लोकतंत्र के सामाजिक और राजनीतिक आयामों के बीच के अंतर को स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि हमें केवल राजनीतिक लोकतंत्र से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। मैं उनके शब्दों को आप सबके साथ साझा करता हूं। उन्होंने कहा था, “हमें अपने राजनीतिक लोकतंत्र को एक सामाजिक लोकतंत्र भी बनाना चाहिए। राजनीतिक लोकतंत्र टिक नहीं सकता यदि वह सामाजिक लोकतंत्र पर आधारित न हो। सामाजिक लोकतंत्र का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है जीवन का वह तरीका जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुता को जीवन के सिद्धांतों के रूप में मान्यता देता है। स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के इन सिद्धांतों को एक त्रिमूर्ति के अलग-अलग हिस्सों के रूप में नहीं देखना चाहिए। उनकी त्रिमूर्ति का वास्तविक अर्थ यह है कि उनमें से किसी भी हिस्से को एक-दूसरे से अलग करने पर लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।”

प्यारे देशवासियो,

  1. जीवन-मूल्यों की यह त्रिमूर्ति आदर्श-युक्त, उदारता-पूर्ण और प्रेरणादायक है। इस त्रिमूर्ति को अमूर्त अवधारणा मात्र समझना गलत होगा। केवल आधुनिक ही नहीं बल्कि हमारा प्राचीन इतिहास भी इस बात की गवाही देता है कि वे तीनों जीवन-मूल्य हमारे जीवन की सच्चाई हैं; उन्हें हासिल किया जा सकता है, और वस्तुत: उन्हें विभिन्न युगों में हासिल किया भी गया है। हमारे पूर्वजों और हमारे आधुनिक राष्ट्र-निर्माताओं ने अपने कठिन परिश्रम और सेवा भावना के द्वारा न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्शों को चरितार्थ किया था। हमें केवल उनके पदचिह्नों पर चलना है और आगे बढ़ते रहना है।
  1. सवाल उठता है कि आज के संदर्भ में एक सामान्य नागरिक के लिए ऐसे आदर्शों का क्या अर्थ है? मेरा मानना ​​है कि उन आदर्शों का प्रमुख लक्ष्य सामान्य व्यक्ति के लिए सुखमय जीवन का मार्ग प्रशस्त करना है। इसके लिए, सबसे पहले सामान्य लोगों की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी की जानी चाहिए। अब संसाधनों की कमी नहीं है। हर परिवार के पास बेहतर आवास, तथा पीने के पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध हो – इस दिशा में हम काम कर रहे हैं। यह बदलाव, विकास की बढ़ती हुई गति तथा भेदभाव से पूर्णत: मुक्त सुशासन द्वारा ही संभव हो सका है।
  1. मूलभूत आवश्यकताओं को उपलब्ध कराने के बाद, यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक अपनी क्षमताओं का उपयोग करते हुए खुशी के अवसर तलाशे तथा अपने नितांत निजी गुणों का समुचित उपयोग करते हुए अपनी नियति का निर्माण करे। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा ही मुख्य साधन है। मेरा मानना ​​है कि ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ युवा भारतीयों के लिए अपनी विरासत से जुड़ने और इक्कीसवीं सदी में अपने पैर जमाने में बहुत सहायक सिद्ध होगी। उनके विकासमान भविष्य के लिए अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं अनिवार्य हैं। कोविड की वैश्विक महामारी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में और अधिक सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। मुझे खुशी है कि सरकार ने इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाते हुए हमारे देशवासी सक्षम बन सकते हैं और आर्थिक सुधारों का लाभ लेकर अपने जीवन निर्माण के लिए सर्वोत्तम मार्ग अपना सकते हैं। 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए हमारा देश सक्षम हो रहा है, यह मेरा दृढ़ विश्वास है।

प्यारे देशवासियो

  1. अपने कार्यकाल के पांच वर्षों के दौरान, मैंने अपनी पूरी योग्यता से अपने दायित्वों का निर्वहन किया है। मैं डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, डॉक्टर एस. राधाकृष्णन और डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जैसी महान विभूतियों का उत्तराधिकारी होने के नाते बहुत सचेत रहा हूं। जब मैंने राष्ट्रपति भवन में प्रवेश किया था, तब मेरे तत्कालीन पूर्ववर्ती, श्री प्रणब मुखर्जी ने भी मेरे कर्तव्यों के बारे में मुझे बुद्धिमत्तापूर्ण सुझाव दिए। फिर भी, जब कभी मुझे किसी तरह का संशय हुआ, तब मैंने गांधीजी का और उनके द्वारा सुझाए गए मूल-मंत्र का सहारा लिया। गांधीजी की सलाह के मुताबिक सबसे अच्छा मार्गदर्शक-सिद्धान्त यह था कि हम सबसे गरीब आदमी के चेहरे को याद करें और खुद से यह सवाल पूछें कि हम जो कदम उठाने जा रहे हैं, क्या वह उस गरीब के लिए सहायक होगा? मैं गांधीजी के सिद्धांतों पर अपने अटूट विश्वास को दोहराते हुए आप सबसे यह आग्रह करूंगा कि आप प्रतिदिन, कुछ मिनटों के लिए ही सही, गांधीजी के जीवन और शिक्षाओं पर अवश्य विचार करें।

प्यारे देशवासियो,

  1. हम सबके लिए माता की तरह पूज्य प्रकृति, गहरी पीड़ा से गुजर रही है। जलवायु परिवर्तन का संकट हमारी धरती के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। हमें अपने बच्चों की खातिर अपने पर्यावरण, अपनी जमीन, हवा और पानी का संरक्षण करना है। अपनी दिनचर्या में तथा रोज़मर्रा की चीजों का इस्तेमाल करते समय हमें अपने पेड़ों, नदियों, समुद्रों और पहाड़ों के साथ-साथ अन्य सभी जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए बहुत सावधान रहने की जरूरत है। प्रथम नागरिक के रूप में, यदि अपने देशवासियों को मुझे कोई एक सलाह देनी हो तो मैं यही सलाह दूंगा।
  1. अपने वक्तव्य का समापन करते हुए मैं एक बार फिर सभी देशवासियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। भारत माता को सादर नमन करते हुए मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता हूं।

 

धन्यवाद,

जय हिन्द!

 

उत्तराखण्ड सरकार
मा.मुख्यमंत्री प्रेस सूचना ब्यूरो
(सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग)
सचिवालय परिसर, सुभाष रोड, देहरादून
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  1. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये “विकल्प रहित संकल्प“ का मंत्र लेकर निरन्तर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने  नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में प्रतिभाग किया।

    मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के विकास में  प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 21 वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक होने के सपने को साकार करने हेतु उत्तराखण्ड  @ 2025 एवं  @ 2030 का दृष्टिपत्र तैयार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विजन प्लान के अन्तर्गत राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत वृद्धि दर के माध्यम से आगामी 05 वर्षो में दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मेलन में राज्य में किये गये विकास कार्यों व आगे के विजन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

    उत्तराखण्ड राज्य के विजन प्लान को साकार करने हेतु इस वित्तीय वर्ष में पूंजीगत व्यय को विगत वर्ष के बजट के सापेक्ष 13 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया गया है। इस वृद्धि के परिणाम स्वरूप राज्य ने भारत सरकार द्वारा अपेक्षित पूंजीगत व्यय को राज्य की राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 4 प्रतिशत करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। इसी श्रृंखला में राज्य की आर्थिक गति को शक्ति देने हेतु आगामी 05 वर्षों में बाह्य सहायता के माध्यम से लगभग रू0 25000 करोड़ की आधारभूत संरचनायें विकसित की जायेंगी।

    विभागों के मध्य बेहतर सामंजस्य सुनिश्चित करने एवं पूंजीगत परियोजनाओं के सटीक नियोजन हेतु “पी०एम० गति शक्ति योजना“ की तर्ज पर राज्य गति शक्ति मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। राज्य द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना को अगले 6 माह में पूर्ण किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    थ्रस्ट सेक्टर्स  जैसे (पर्यटन, परिवहन, सेवा क्षेत्र, कृषि एवं उद्यान, फार्मा) आदि के माध्यम से विजन प्लान के महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त किया जायेगा । प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग व टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

    राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण के लिये सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से उद्योगों को विभिन्न विभागों की अनुमतियां तेज गति से दी जा रही है।
    भारत सरकार द्वारा राज्य को इज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में एचीवर्स की श्रेणी में चयनित किया गया है।

    राज्य में रोजगार उन्मुखी योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री नैनो योजना के माध्यम से अब तक रू0 600 करोड़ से अधिक का निजी निवेश आकर्षित कर एक लाख से अधिक नवीन रोजगार के अवसर सृजित किये गये हैं। उत्तराखण्ड राज्य प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अन्तर्गत देश के अग्रणी राज्यों में निरन्तर सम्मिलित है। इसी क्रम में एक जिला- एक उत्पाद, महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, स्टार्ट-अप पॉलिसी जैसी योजनाओं के सृजन एवं कुशल प्रबन्धन से उत्तराखण्ड राज्य देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित है। देश के कुल स्टार्टअप का 10 प्रतिशत भाग यहां स्थित है।

    राज्य में पर्यटन की अपार सम्भावनाओं को देखते हुए राज्य द्वारा भारत सरकार के सहयोग से  पर्वतमाला रोप-वे श्रृंखला एवं टनल पार्किंग सुदृढ़ कर होम स्टे के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। चारधाम की तर्ज पर कुमाऊँ मण्डल में मानस खण्ड मन्दिर माला एवं 13- जनपद 13- गन्तव्य जैसी नवीन योजनाओं के माध्यम से उत्तराखण्ड को देश का शीर्ष पर्यटन केन्द्र बनाने के सशक्त प्रयास किये जा रहे हैं।
    मानसखण्ड मंदिर माला के तहत कुमाऊं के प्रमुख मंदिरों को बेहतर सड़कों से कनेक्ट किया जाएगा। गढ़वाल और कुमाऊं के बीच रोड कनेक्टिविटी भी सुधारी जाएगी। इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों से तत्काल उनके जनपदों के प्रमुख मंदिरों और पर्यटन स्थलों की रिपोर्ट मांगी गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद विगत वर्ष में निर्यात पर फोकस कर लगभग रू0 17000 करोड़ का निर्यात किया है जिसमें फार्मा सेक्टर का विशेष योगदान है। राज्य द्वारा रूस- यूक्रेन युद्ध के दौरान यूरोप को उत्तराखण्ड के परम्परागत खाद्यान्न जैसे मडुवा, झिंगोरा का निर्यात किया गया। निर्यात को बढ़ावा देने हेतु एक जिला एक उत्पाद योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु उत्पाद का चयन कर जिला स्तरीय एक्सपोर्ट प्लान तैयार कर लिया गया है।

    प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से “अमृत सरोवर’ योजना के द्वारा जल प्रबंधन एवं मत्स्य उत्पादन में राज्य निरन्तर प्रगति कर रहा है। अमृत सरोवर योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 13 जनपदों में 1240 अमृत सरोवर बनाने का निश्चय किया गया है। जिनमें से 939 अमृत सरोवरों में कार्य प्रारम्भ हो गया 2022 तक 375 अमृत सरोवरों में कार्य पूर्ण हो जाएगा।

    रूरल बिजनेस इन्क्यूबेटर और ग्रोथ सेंटरों  के माध्यम से 106 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जाएंगे। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता बढ़ाकर लगभग तीस हजार से अधिक किसानों एवं शिल्पकारों (श्री केदारनाथ एवं श्री बदरीनाथ शिल्प केन्द्र) की आय में वृद्धि की जा रही है।

    प्रधानमंत्री जी द्वारा दिये गये निर्देश के क्रम में राज्य द्वारा पीएम किसान निधि, सॉयल हेल्थ कार्ड एवं आयुष्मान भारत योजनाओं में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। इस वित्तीय वर्ष में राज्य द्वारा पीएम आवास योजना ग्रामीण, जलजीवन मिशन, पीएमजीएसवाई, और स्वामित्व योजना में समस्त लाभार्थियों एवं लक्ष्य को प्राप्त किया जायेगा ।
    शेष सभी फ्लैगशिप योजनाओं को सितम्बर- 2024 तक प्राप्त करने हेतु मासिक लक्ष्य निर्धारित कर प्रभावी निगरानी की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वात्सल्य योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ऐसे बच्चों के संरक्षण का दायित्व लेती है, जिनके अभिभावकों का निधन कोरोना के कारण हुआ है।
    उत्तराखण्ड राज्य आयुष्मान योजना में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। अब तक राज्य में 47 लाख कार्ड बनाये जा चुके हैं जो राष्ट्रीय औसत का 2.5 गुना है। शत प्रतिशत पात्र परिवारों के कम से कम एक सदस्य का कार्ड बनाया जा चुका है। उत्तराखण्ड में  एक राष्ट्र- एक राशन कार्ड योजनान्तर्गत आतिथि 58000 परिवारों को राशन उपलब्ध कराया गया हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवा के बाद उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जहां समान नागरिक आचार संहिता को लागू करने के उद्देश्य हेतु तीव्र गति से कार्य किया है। इस विषय पर राज्य सरकार द्वारा 27 मई 2022 को पांच सदस्यों की कमेटी का गठन किया जा चुका है। कमेटी अभी तक दो बैठकें कर चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि  राज्य में विभिन्न योजनाओं के सफल संचालन एवं प्रोजेक्टों को निर्धारित समय पर पूर्ण करने तथा नियमित अनुश्रवण हेतु प्रत्येक विभाग का वार्षिक कार्य कैलेंडर तैयार किया गया है जिसकी समीक्षा उच्च स्तर पर प्रतिमाह की जा रही है।

    राज्य द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अन्तर्गत 4457 आंगनबाड़ी केन्द्र जो प्राथमिक विद्यालय परिसर में ही स्थापित थे उनमें माह जुलाई 2022 में बाल वाटिका की स्थापना की जा चुकी है।

    राज्य द्वारा प्रौद्योगिकी का उपयोग कर जीएसटी संग्रहण में वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं।
    इसी परिप्रेक्ष्य में टैक्स चोरी को रोकने हेतु एवं ई-वे बिल प्रणाली को प्रभावी बनाये जाने हेतु आटोमेटेड नम्बर प्लेट रिकॉगनेशन सिस्टम के माध्यम से वीडियो एनालिटिक्स एवं इमेज प्रोसेसिंग की कार्य योजना गतिमान है। राज्य के जी०एस०टी० की गहन मॉनिटरिंग हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय ड्रोन नीति के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य में ड्रोन रिसर्च सेंटर की स्थापना की जा चुकी है।
    प्रदेश के प्रत्येक जनपद में ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल की स्थापना का कार्य गतिमान है। राज्य द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल आपदा प्रबन्धन में “नभनेत्र“ प्लेटफार्म के माध्यम से किया जा रहा है। प्राइवेट इन्वेस्टर द्वारा रुड़की में देश की सबसे बड़ी ड्रोन फैक्ट्री स्थापित की जा चुकी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य द्वारा ट्रांसपेरेंट फंड फ्लो  सुनिश्चित करने हेतु डीबीटी  का उपयोग 215 लाभार्थीपरक योजनाओं में किया जा रहा है।
    उत्तराखण्ड देश के प्रथम तीन राज्यों में है, जहाँ मनरेगा के सभी लाभार्थियों के बैंक अकाउंट आधार सीडेड हैं।
    राज्य में सरकारी खरीद को पारदर्शी बनाने हेतु जेम पोर्टल को  जरूरी कर दिया गया है।

    उत्तराखण्ड राज्य की सीमायें संवेदनशील हैं। ऐसे में राज्य के सीमान्त जनपदों में एनसीसी का विस्तार योजनाबद्ध तरीके से कर राज्य की 35951 नियमित सीटों के अतिरिक्त 4007 सीटें उपलब्ध करायी गयी। उत्तरकाशी एवं चमोली जैसे सीमान्त जनपदों में पूर्व  से स्थापित एनसीसी कम्पनी को अपग्रेड कर बटालियन की स्थापना की गयी। राज्यपाल महोदय द्वारा भी सीमान्त जनपदों के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्र जैसे गुंजी, धारचूला आदि का भ्रमण कर अग्रिम चौकियों में तैनात सैन्य एवं अर्द्धसैनिक बलों के साथ सीधा संवाद किया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि  कि इस बार करीब 28 लाख लोगों ने चारधाम यात्रा में प्रतिभाग लिया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन व निर्देशन में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का पुर्ननिर्माण व सौंदर्यीकरण के लिए देवभूमि की सवा करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद दिया।
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