पांचवीं स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वगीर’ की पहली समुद्री यात्रा।## महिला और बाल विकास मंत्रालय की कवच योजनायें: मिशन पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य# ऊर्जा मंत्रालय ने आवासीय उपभोक्ताओं के लिए छत पर सौर प्लांट  लगाने की सरल प्रक्रिया जारी की##डीएम पौड़ी गढवाल लाईसेंसी हथियार जमा करने के निर्देश दिये।Janswar.com

-अरुणाभ रतूड़ी

पांचवीं स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वगीर’ की पहली समुद्री यात्रा।

भारतीय नौसेना की कलवरी श्रेणी में प्रोजेक्ट 75, यार्ड 11879 की पांचवीं पनडुब्बी ने पहली फरवरी, 2022 को अपनी समुद्री परीक्षण यात्रा शुरू की। पनडुब्बी को नवंबर 2020 में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) के कान्होजी आंग्रे वेट बेसिन से लॉन्च किया गया था। कमीशनिंग के बाद इस पनडुब्बी का नाम वगीर रखा जाएगा।

कोविड महामारी के बावजूद एमडीएल ने वर्ष 2021 में प्रोजेक्ट – 75 की दो पनडुब्बियों की ‘डिलीवरी’ की है और पांचवीं पनडुब्बी का समुद्री यात्रा परीक्षण शुरू करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

पनडुब्बी अब प्रोपल्शन प्रणाली, हथियार और सेंसर सहित समुद्र में अपनी सभी प्रणालियों के गहन परीक्षणों से गुजरेगी। इन परीक्षणों के पूरा होने के बाद वर्ष 2022 में पनडुब्बी को भारतीय नौसेना को सौंपना निर्धारित किया गया है।

 

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—————————————————-महिला और बाल विकास मंत्रालय की कवच योजनायें:

मिशन पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य

कुपोषण समस्या के समाधान तथा महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण, विकास और सुरक्षा के लिये रणनीतिक हस्तक्षेप।

भारत की आबादी में महिलाओं और बच्चों की संख्या 67.7 प्रतिशत है। उनके सशक्तिकरण को तथा सुरक्षित और संरक्षित माहौल में उनके सकारात्मक विकास को सुनिश्चित करना जरूरी है। इस कदम से देश का सतत और समतावादी विकास होगा। उल्लेखनीय है कि आर्थिक परिवर्तन और सामाजिक बदलाव को हासिल करने के लिये इसकी बहुत जरूरत है। महिला और बाल विकास मंत्रालय यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि बच्चों का अच्छा पोषण हो, वे खुशहाल हों तथा महिलायें आत्मविश्वास से परिपूर्ण हों और आत्मनिर्भर बनें। इसके लिये उन्हें ऐसा माहौल प्रदान किया जाना है, जो उनकी पहुंच में हो, भरोसेमंद हो, आसान हो तथा हर तरह के भेदभाव और हिंसा से मुक्त हो। मंत्रालय का प्रमुख उद्देश्य है महिलाओं और बच्चों के लिये राज्यों द्वारा किये जाने वाले कामों में जो खामियां रह गई हैं, उन्हें समाप्त किया जाये। साथ ही इस दिशा में अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय तालमेल को प्रोत्साहित करने का भी लक्ष्य है, ताकि लैंगिक समानता तथा बच्चों को ध्यान में रखकर कानून, नीतियां और कार्यक्रम बनाये जा सकें।

उपरोक्त लक्ष्य को हासिल करने के लिये मंत्रिमंडल ने हाल ही में मंत्रालय की तीन महत्त्वपूर्ण कवच योजनाओं को मिशन मोड में क्रियान्वित करने को मंजूरी दी है। ये योजनायें हैं – मिशन पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य।

मिशन पोषण 2.0 एक एकीकृत पोषण समर्थन कार्यक्रम है। यह बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और दुग्धपान कराने वाली माताओं में कुपोषण की चुनौतियों का समाधान करता है। इसके लिये पोषण तत्त्वों और उनकी आपूर्ति की एक रणनीतिक पहल की जाती है। इसके अलावा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये एक ईको-प्रणाली बनाई जाती है, ताकि ऐसे तौर-तरीकों को विकसित और प्रोत्साहित किया जा सके, जो स्वास्थ्य, आरोग्य और रोग-प्रतिरोधक क्षमता का पोषण करें। पोषण 2.0 पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत खाद्य-पदार्थों की गुणवत्ता तथा उनकी आपूर्ति को बेहतर बनाया जाता है।

मिशन पोषण 2.0 देश के मानवीय पूंजी विकास में योगदान करेगा, कुपोषण की चुनौतियों का समाधान करेगा, सतत स्वास्थ्य और आरोग्य के लिये पोषण जागरूकता तथा खान-पान की अच्छी आदत को प्रोत्साहित करेगा और प्रमुख रणनीतियों के जरिये पोषण सम्बंधी अभावों को दूर करेगा। कार्यक्रम के तहत, पोषण नियम और मानक तथा टीएचआर की गुणवत्ता और परीक्षण में सुधार लाया जायेगा। इसके साथ ही हितधारकों और लाभार्थियों की संलग्नता को प्रोत्साहित किया जायेगा। इसके अलावा पारंपरिक सामुदायिक खान-पान आदतों को भी प्रोत्साहित किया जायेगा। पोषण 2.0 के दायरे में तीन महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम/योजनायें हैं, जैसे आगनवाड़ी सेवा, किशोरियों के लिये योजना और पोषण अभियान।

पोषण 2.0 का पूरा जोर मातृत्व पोषण, नवजात शिशु और बच्चों के आहार नियम, आयुष के जरिये एमएएम/एसएएम का उपचार और आरोग्य पर रहेगा। वह संचालन, शासन और क्षमता-निर्माण पर आधारित है। पोषण अभियान जन संपर्क का प्रमुख माध्यम है तथा इसके तहत पोषण समर्थन, आईसीटी हस्तक्षेप, मीडिया के जरिये प्रसार और संपर्क, सामुदायिक संपर्क तथा जन आंदोलन सम्बंधी नवोन्मेषों को रखा गया है।

मिशन पोषण 2.0 में कई प्रमुख रणनीतियों को शामिल किया गया है, जो इन उद्देश्यों की पूर्ति करेंगे, जैसे सुधारात्मक रणनीतियां, पोषण जागरूकता रणनीतियां, संचार रणनीतियां और हरित ईको-प्रणाली की संरचना। मिशन पोषण 2.0 के तहत उद्देश्यों को प्रमुख मंत्रालयों/विभागों/संगठनों के सहयोग से तथा मजबूत पहलों पर आधारित एकीकरण गतिविधियों के जरिये पूरा किया जायेगा।

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने एक मार्च, 2021 को “पोषण ट्रैकर” की शुरूआत की थी। इसके तहत राष्ट्रीय ई-शासन प्रखंड एक ऐसा माध्यम है, जो पोषण आपूर्ति समर्थन प्रणालियों को मजबूत बनायेगा और उनमें पारदर्शिता लायेगा। पोषण ट्रैकर के तहत प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बच्चों में कम वजन होने, उनके अंग-प्रत्यंग के विकारों की पहचान करने तथा पोषण सेवा आपूर्ति की निगरानी करने में किया जाता है।

मिशन शक्ति महिलाओं के लिये एक एकीकृत नागरिक-केंद्रित जीवनपर्यन्त समर्थन योजना है। एकीकृत देखभाल, सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्वास और सशक्तिकरण के जरिये महिलाओं को बंधन मुक्त किया जाता है। जीवन के विभिन्न चरणों में महिलाओं की प्रगति के क्रम में इसका इस्तेमाल किया जाता है। मिशन शक्ति की दो उप-योजनायें हैं – सम्बल और सामर्थ्य। सम्बल उप-योजना महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षण के लिये है, जबकि सामर्थ्य उप-योजना महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये है। सम्बल उप-योजना में एकल केंद्र (ओएससी), महिला हेल्पलाइन (181-डब्लूएचएल) और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी मौजूदा योजनायें शामिल हैं। इसके अलावा नारी अदालतें जैसा नया घटक जोड़ा गया है, जो महिलाओं को विवादों के वैकल्पिक समाधान तथा समाज और परिवारो में लैंगिक न्याय मुहैया करायेगा। सामर्थ्य उप-योजना में महिलाओं का सशक्तिकरण शामिल है। इसके तहत उज्ज्वला, स्वाधार गृह और कामकाजी महिला हॉस्टल जैसी मौजूदा योजनाओं को रखा गया है। इनके अतिरिक्त कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिये राष्ट्रीय क्रेच योजना तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को भी ‘सामर्थ्य’ में समाविष्ट कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि पहले ये आईसीडीएस योजना में शामिल थीं।

बच्चों से सम्बंधित मिशन वात्सल्य को नीति निर्माताओं ने सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्पदा के रूप में माना है। भारत में 18 वर्ष तक की आयु के 472 मिलियन बच्चे हैं, जो देश की कुल आबादी का 39 प्रतिशत हैं। मिशन वात्सल्य का उद्देश्य है भारत के हर बच्चे को स्वस्थ और खुशहाल बचपन प्रदान करना। इसके अलावा योजना के उद्देश्यों में बच्चों के विकास के लिये एक संवेदनशील, सहायक और समयानुकूल ईको-प्रणाली बनाना, बाल न्याय अधिनियम, 2015 के तहत न्याय प्रदान करने में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सहायता करना तथा सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना भी शामिल है।

मिशन वात्सल्य के तहत घटकों में नियामक निकाय, सेवा आपूर्ति संरचना, संस्थागत देखभाल/सेवा, गैर-संस्थागत समुदाय आधारित देखभाल, आपात सेवा संपर्क, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण शामिल हैं।

सभी तीनों अभियानों को 15वें वित्त आयोग अवधि 2021-22 से 2025-26 के दौरान क्रियान्वित किया जायेगा।

पोषण अभियानों को जोड़कर मिशन पोषण 2.0 का कुल वित्तीय खर्चा 1,81,703 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्रीय योगदान के रूप में 1,02,031 करोड़ रुपये और राज्यों का हिस्सा 79,672 करोड़ रुपये है। केंद्रीय हिस्से में लगभग 10,108.76 करोड़ रुपये (10.99 प्रतिशत) का इजाफा किया गया है। मिशन पोषण 2.0 की कुल लागत का आकलन केंद्र तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच खर्च उठाने के औसत के आधार पर किया गया है। इसे सरकार द्वारा मंजूर कर लिया गया है और केंद्र तथा विधान मंडल सहित राज्यों के लिये यह औसत 60:40 है, केंद्र और पूर्वोत्तर क्षेत्र तथा हिमालयी राज्यों के लिये 90:10 है तथा विधान मंडल रहित जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के लिये 100 प्रतिशत है।

मिशन शक्ति का कुल वित्तीय खर्च 20989 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 15761 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 5228 करोड़ रुपये है। ‘सम्बल’ की उप-योजना को केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना के तौर पर क्रियान्वित किया जायेगा, जिसमें निर्भया निधि/एमडब्लूसीडी के जरिये 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण मिलेगा। इसमें धनराशि को सीधे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जिलाधिकारी या सम्बंधित निदेशालय/आयुक्तालय को जारी किया जायेगा। ‘सामर्थ्य’ उप-योजना को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में क्रियान्वित किया जायेगा, जिसका वित्तपोषण केंद्र तथा विधामंडल सहित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 60:40 के अनुपात में वहन किया जायेगा। विधान मंडल की मौजूदगी वाले पूर्वोत्तर और विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच वित्तपोषण का औसत 90:10 के हिसाब से होगा। जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधान मंडल कार्यरत नहीं हैं, वहां केंद्र 100 प्रतिशत वित्तपोषण करेगा। मिशन शक्ति के तहत केंद्र के हिस्से में लगभग 24 प्रतिशत का इजाफा किया गया है तथा यह 12742 करोड़ रुपये से बढ़कर 15761 करोड़ रुपये हो गया है।

मिशन वात्सल्य का कुल वित्तीय खर्च 10916 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 6298 करोड़ रुपये तथा राज्य का हिस्सा 3988 करोड़ रुपये है। पिछले पांच वर्षों के दौरान बाल संरक्षण सेवा (सीपीएस) योजना के तहत कुल आबंटन 3852 करोड़ रुपये किया गया था, जिससे पता चलता है कि सीपीएस योजना की तुलना में मिशन वात्सल्य के तहत लगभग 63.68 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने आवासीय उपभोक्ताओं के लिए छत पर सौर प्लांट  लगाने की सरल प्रक्रिया जारी की

उपभोक्ता ओं द्वारा अनुदान प्राप्तप करने के लिए राष्ट्रीय पोर्टल विकसित करना, नेट मीटरिंग के लिए आवेदन करना

आम जनता को वेबसाइटों / सोशल मीडिया पर प्रकाशित की जा रही भ्रामक / झूठी सूचनाओं से दूर रहने की सलाह दी गई

Posted Date:- Feb 02, 2022

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने छतों पर सौर प्लांट स्थापना कार्यक्रम (रूफटॉप सोलर प्रोग्राम) के अंतर्गत आवासीय उपभोक्ताओं के लिए स्वयं या अपनी पसंद के किसी भी विक्रेता के माध्यम से छत पर सौर प्लांरट लगाने की सरल प्रक्रिया जारी की है।

नई सरलीकृत प्रक्रिया इस प्रकार होगी :
(i) लाभार्थी से प्राप्त आवेदन पंजीकृत करने, उसकी स्वीकृति और प्रगति पर नज़र रखने के लिए एक राष्ट्रीय पोर्टल विकसित किया जाएगा। डिस्कॉम के स्तर पर समान प्रारूप में एक पोर्टल होगा और दोनों पोर्टलों को आपस में जोड़ा जाएगा।
(ii) नई व्यवस्था के अंतर्गत छत पर सौर प्लांेट (रूफटॉप सोलर – आरटीएस) स्थापित करने का इच्छुक लाभार्थी  अब राष्ट्रीय  पोर्टल पर अपना आवेदन भेजेगा। लाभार्थी को अपने उस बैंक खाते के विवरण सहित आवश्यक जानकारी जमा करनी होगी जिस पर अनुदान  राशि हस्तांतरित की जाएगी  आवेदन के समय, लाभार्थी को पूरी प्रक्रिया और उस अनुदान  राशि के बारे में सूचित किया जाएगा जिसे आरटीएस प्लांूट की स्थापना के लिए प्राप्त किया जा सकता है।
(iii) तकनीकी व्यवहार्यता अनुमोदन जारी करने के लिए आवेदन अगले 15 कार्य दिवसों के भीतर संबंधित डिस्कॉम को ऑनलाइन अग्रेषित किया जाएगा। आवेदन डिस्कॉम (डीआईएससीओएम) को हस्तांतरित किए जाने के बाद इसे डिस्कॉम पोर्टल पर भी प्रदर्शित किया जाएगा।
(iv) तकनीकी व्यवहार्यता प्राप्त करने के बाद, लाभार्थी डीसीआर की शर्तों को पूरा करने वाले सौर मॉड्यूल का चयन करके और मॉडल एवं निर्माताओं की स्वीकृत सूची (एएलएमएम)  और जे3आईएस द्वारा प्रमाणित इनवर्टर को सूचीबद्ध करके अपनी पसंद के किसी भी विक्रेता से आरटीएस संयंत्र खरीदकर स्थापित करेगा। पैनल में शामिल विक्रेताओं की सूची पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। उपकरणों की गुणवत्ता और स्थापना के बाद की सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) आरटीएस संयंत्र के लिए मानक और विनिर्देश एवं लाभार्थी तथा विक्रेता के बीच निष्पादित किए जाने वाले समझौते का एक प्रारूप जारी करेगा। अन्य नियमों और शर्तों के साथ समझौते में यह सुनिश्चित करने का प्रावधान होगा कि छत पर स्थापित सौर प्लांकट (रूफटॉप सोलर प्लांट –आरटीएस) सुरक्षा और प्रदर्शन के मानकों को पूरा करता है तथा विक्रेता समझौते की शर्तों के अनुसार अगले 5 वर्ष  या उससे अधिक अवधि के लिए प्लांाट का रखरखाव करेगा।
(v) लाभार्थी को एक निर्धारित अवधि के भीतर अपना प्लांसट स्थापित करना होगा अन्यथा उसका आवेदन रद्द कर दिया जाएगा और उसे आरटीएस प्लां ट की स्थापना के लिए फिर से आवेदन करना होगा।
(vi) आरटीएस प्लांट स्थापित होने पर लाभार्थी राष्ट्रीय पोर्टल पर नेट-मीटरिंग के लिए आवेदन करेगा, जिसे संबंधित डिस्कॉम को ऑनलाइन अग्रेषित किया जाएगा। संबंधित डिस्कॉम या तो नेट-मीटर की खरीद और स्थापना करेगा अथवा वह लाभार्थी को निर्धारित विनिर्देशों के अनुसार नेट-मीटर की खरीद करने और डिस्कॉम अधिकृत प्रयोगशाला से उसका परीक्षण करने की सलाह देगा। डिस्कॉम का निर्णय पोर्टल पर डाला जाएगा।
(vii) नेट-मीटर लगाने के बाद डिस्कॉम अधिकारी राष्ट्रीय पोर्टल पर उसे शुरू करने और उसकी निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा जो डिस्कॉम पोर्टल पर भी दिखाई देगी।
(viii) निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने पर डिस्कॉम द्वारा अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाएगी।
(ix)  पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी और इसके लिए शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाएगा।
आशा है कि लगभग छह से आठ सप्ताह में राष्ट्रीय पोर्टल विकसित हो जाएगा। राष्ट्रीय पोर्टल के शुरू होने तक, डिस्कॉम के माध्यम से रूफटॉप सोलर प्लांट की स्थापना के लिए सब्सिडी प्राप्त करने की वर्तमान प्रक्रिया चलती रहेगी और यह नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से अनुदान प्राप्त करने की एकमात्र अधिकृत प्रक्रिया होगी। राष्ट्रीय पोर्टल स्थापित होने के बाद लाभार्थी के पास किसी भी उपलब्ध विकल्प का लाभ उठाते हुए छत पर स्थापित सौर प्लांट स्थापित करने का विकल्प होगा।

आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे वेबसाइटों / सोशल मीडिया पर प्रकाशित होने वाली किसी भी ऐसी भ्रामक / झूठी सूचना पर विश्वास न करें जो विशेष रूप से रूफटॉप सोलर प्लांट की स्थापना के लिए भारत सरकार से अनुदान राशि (सब्सिडी) प्राप्त करने के लिए पंजीकरण शुल्क या अन्य किसी भुगतान के लिए कहती हो। इस संबंध में प्रामाणिक जानकारी मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in या स्पिन पोर्टल www.solarrooftop.gov.in पर उपलब्ध कराई जाएगी।
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डीएम पौड़ी गढवाल लाईसेंसी हथियार जमा करने के निर्देश दिये।

विधान सभा सामान्य निर्वाचन-2022 के दृष्टिगत कानून एवं शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिये जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी गढ़वाल डॉ0 विजय कुमार जोगदण्डे ने समस्त शस्त्र लाईसेंसधारियों के शस्त्रों को शत-प्रतिशत नजदीकी पुलिस थानों में जमा करने के निर्देश दिये। इस सम्बन्ध में जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा शस्त्रों को जमा कराये जाने के सम्बन्ध में कार्यालयादेश जारी किया गया है। जिसके क्रम में वर्तमान में थाना एवं तहसीलों के मालखानों में शस्त्रों को जमा कराये जाने की कार्यवाही गतिमान है।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि अतिरिक्त ऐसे लाईसेंसधारी जिन्होंने अभी तक अपने शस्त्रों को नजदीकी थानों/तहसीलों के मालखानों में जमा नहीं कराया है। उन्हें इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अन्तिम अवसर देते हुए सूचित किया गया है कि वे अपने शस्त्रों को नजदीकी पुलिस थानों/तहसीलों के मालखाने में जमा कराना सुनिश्चित करें। कहा शस्त्र जमा नहीं किया गया तो संबंधित का लाईसेंस निरस्त किये जाने की कार्यवाही अमल में लायी जायेगी तथा निरस्तीकरण की कार्यवाही के दौरान किसी भी प्रकार प्रार्थना पत्र पर विचार नहीं किया जायेगा व शस्त्र लाईसेंसधारी निरस्तीकरण हेतु स्वयं जिम्मेदार होंगे।

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