चिकित्सक मरीजों को तर्कसंगत दवा लिखें-एम्स निदेशक प्रो.रविकांत ###36 लोगों ने रक्तदान किया।पढिए Janswar.com में।

चिकित्सक मरीजों को तर्कसंगत दवा लिखें – एम्स निदेशक प्रो.रविकांत

समाचार प्रस्तुति-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से दवाइयों के दुष्प्रभाव की रोकथाम की रिपोर्टिंग, विश्लेषण व बचाव विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को दवाओं के दुष्प्रभाव की रोकथाम व बचाव के बारे में विस्तृत जानकारियां दी। कार्यशाला में देशभर के विभिन्न मेडिकल व पैरामेडिकल संस्थानों से सौ से अधिक चिकित्सकों व विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। रविवार को संस्थान के औषधी विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेंद्र हांडू की अध्यक्षता में आयोजित फार्माको विजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया के एम्स ऋषिकेश स्थित रीजनल रिसोर्स सेंटर में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न हो गई। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने चिकित्सकों को मरीज को तर्कसंगत दवाएं लिखने को प्रेरित किया गया। साथ ही दवाओं से होने वाले दुष्प्रभावों के बाबत ज्यादा से ज्यादा रिपोर्ट करने को कहा गया। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने कहा कि चिकित्सकों के इस मामले में जिम्मेदारी निभाने व संवेदनशील होने पर ही दवाओं के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए ठोस व कारगर कदम उठाए जा सकते हैं। फार्माको विजिलेंस के नेशनल सेंटर से आए डा. जयप्रकाश ने देशभर से सेंटर में परीक्षण के लिए आने वाली दवाओं के दुष्प्रभावों की रिपोर्ट व उसके विश्लेषण के तौर तरीके बताए। एम्स के जनरल मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डा. रविकांत ने बेहतरीन फार्माको विजिलेंस सिस्टम के बाबत विस्तृत जानकारी दी। आयुष विभाग की ओर से डा. मीनाक्षी पाटिल ने आयुर्वेद व घरेलू नुस्खों से मरीज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों और दवाइयों की गुणवत्ता के बारे में व्याख्यान दिया। राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के डा. मयंक बडोला ने उत्तराखंड में टीकाकरण से मरीजों को होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी व राज्य से आने वाली इससे जुड़ी रिपोट्स से अवगत कराया। एम्स के फार्माकोलॉजी विभाग के डा. पुनीत धमीजा ने टेलीमेडिसिन एवं तकनीकि विकास के तरीकों से दवाइयों के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग व इससे मरीज पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को कम करने की जानकारी दी गई। कार्यशाला में देशभर से जुटे मेडिकल व पैरामेडिकल कॉलेजों के स्नातक व परास्नातक के छात्र-छात्राओं ने डा. मनीषा बिष्ट,डा. अनुभा अग्रवाल,दून मेडिकल कॉलेज के डा. रंगील सिंह, डा. पल्लवी श्रीवास्तव, डा. पुनीत धमीजा आदि विशेषज्ञों ने दवाइयों के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग के तौर तरीके, विश्लेषण एवं बचाव संबंधी प्रशिक्षण लिया। कार्यशाला में डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, एमएस डा. ब्रह्मप्रकाश,प्रो. बीना रवि,फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. शैलेंद्र हांडू,प्रो.किम जैकब मेमन,डा. गौरव चिकारा, डा. साजिद हसन, डा.विनोद आदि मौजूद थे।
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36लोगों ने किया रक्तदान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश व उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ शाखा ऋषिकेश के तत्वावधान में नगर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 36 लोगों ने महादान किया। शिविर में स्वैच्छिक रक्तदान के लिए महासंघ से जुड़े पदाधिकारियों व सदस्यों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। शिविर में लोगों को अमूल्य जीवन की रक्षा के लिए रक्तदान के लिए आगे आने को प्रेरित किया गया।

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