कृषकों की आय में वृद्धि के लिए हर्बल एवं मेडिसनल प्लांट के उत्पादों को बढ़ावा दिया जाय-मुख्यमंत्री# मुख्यमंत्री ने स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा सभी जिलों में आयोजित करने के दिये निर्देश।परीक्षा जून में।पेयजल मंत्री ने दिए मानसून से पहले टैंक ,चेम्बरों को साफ वहाईपो ब्लीच करने के निर्देश #एम्स ऋषिकेश की गरुड़ टेलिमेडिसन सेवा का लाभ उठाने को मोबाईल नम्बर जारी।पढिए Janswar.com में

  • द्वारा-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ (वरिष्ठ पत्रकार)
  • कृषकों की आय में वृद्धि के लिए हर्बल एवं मेडिसनल प्लांट के उत्पादों को बढ़ावा दिया जाय-मुख्यमंत्री
  • राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार कलस्टर बनाये जाय।
  • हर्बल हीलिंग एवं वैलनेस सेंटर की स्थापना जल्द की जाय।
  • अच्छी गुणवत्ता के प्लांट मैटीरियल उपलब्ध कराये जाय।

मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत ने सचिवालय में जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान तथा उत्तराखण्ड संगन्ध पौधा केन्द्र (कैप) सेलाकुई की योजनाओं की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषकों की आय में वृद्धि करने के लिए एग्रीकल्चर एवं हार्टिकल्चर के साथ हर्बल उत्पादों को बढ़ावा दिया जाय। हर्बल उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लोगों में जागरूकता लाने के साथ ही इसकी प्रशिक्षण की व्यवस्था भी जाय। किसानों की मदद कैसे की जा सकती है, इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। किसानों को अच्छी गुणवत्ता के प्लांटिंग मैटीरियल उपलब्ध हों। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग प्रजातियों के उत्पादों के कलस्टर बनाये जाय। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कैप की शोध एवं विकास टीम द्वारा बनाये गये ‘गनिया’ हर्बल हैण्ड सेनिटाइजर को लाँच किया।
जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियो को निर्देश दिये कि कुछ बड़े उत्पादों को बढ़ावा दिया जाय। तीन-चार ऐसे उत्पाद चयनित  किये जाय, जिससे उत्तराखण्ड की देश में अलग पहचान बने। इसके लिए मार्केटिंग प्लान भी हो। पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने एवं किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए उत्पादों को अलग पहचान देना जरूरी है। इसके लिए उत्पादों का चयन जल्द करें। यह सुनिश्चित किया जाय कि 06 माह के अन्दर परिणाम दिखने शुरू हो जाय। एच.आर.डी.आई द्वारा आयुष विभाग की सहायता से जल्द एक हर्बल हीलिंग एवं वैलनेस सेंटर की स्थापना की जाय। उत्तराखण्ड की हर्बल आधारित स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक किया जाय।
उत्तराखण्ड संगंध पौधा केन्द्र की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि कैप के जो 109 कलस्टर बने हैं, उनमें से कई कलस्टर एच.आर.डी.आई के लिए भी इस्तेमाल किये जा सकते हैं। एच.आर.डी.आई एवं कैप दोनों में वैल्यू चैन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाय। भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का फायदा उठाने के लिए सटीक प्रोजक्ट बनाये जाय। आगामी 06 माह में हाईटैक नर्सरी के निर्माण, एरोमा पार्क नीति एवं इण्डस्ट्रियल एवं मेडिसनल हैम्प की नीति की दिशा में तेजी से कार्य किया जाय।
बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तराखण्ड संगंध पौध केन्द्र से प्रदेश के 21 हजार किसान जुड़े हैं। प्रदेश में 109 कलस्टर बनाये गये हैं। इसके अन्तर्गत परित्यक्त भूमि के पुनर्वास, बाउन्ड्री फसल के रूप में डैमस्क गुलाब का कृषिकरण, मिश्रित खेती के रूप में जापानी मिन्ट का कृषिकरण, वानिकी फसल के रूप में तेजपात के कृषिकरण एवं अल्प अवधि के रूप में कैमोमिल व अन्य फसलों के कृषिकरण की ओर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। कैप का सीएजीआर 37 प्रतिशत है। जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान से प्रदेश के 26 हजार किसान जुड़े हैं। सीमान्त जनपदों चमोली, उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ में जड़ी-बूटी अनुसंधान एवं विकास का अनुश्रवण व पर्यवेक्षण हेतु 03 केन्द्रों की स्थापना की गई है । संस्थान की मण्डल पौधशाला में 12 विभिन्न औषधीय उद्यानों के मॉडल की स्थापना की गई हैं। संस्थान मुख्यालय मण्डल में म्यूजियम तथा हर्वेरियम की स्थापना की गई है। संस्थान द्वारा 6 हर्बल चाय यथा मार्निंग हर्बल टी, इवनिंग हर्बल टी, नाईट हर्बल टी, क्वीन हर्बल टी, किंग हर्बल टी एवं हिपोफी हर्बल टी की तकनीकी हस्तानान्तरण हेतु निर्माण किया गया। प्रदेश के काश्तकारों हेतु  38 प्रजातियों की संक्षिप्त कृषि तकनीक की बुकलेट का प्रकाशन किया गया। 100 औषधीय उत्पादों को विकसित किये जाने हेतु शोध एवं विकास की कार्यवाही चल रही है।
बैठक में कृषि एवं उद्यान मंत्री श्री सुबोध उनियाल, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार श्री शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सलाहकार श्री आर.बी.एस.रावत, अपर मुख्य सचिव श्रीमती मनीषा पंवार, सचिव श्री हरबंस सिंह चुघ, निदेशक उद्यान डॉ.एच.एस.बवेजा, सगन्ध पौधा केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. नृपेन्द्र चौहान, जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान के निदेशक सीएम सनवाल उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री ने स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा सभी जिलों में आयोजित करने के दिये निर्देश।परीक्षा जून में। में।

मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत ने कोविड की स्थिति में अभ्यर्थियो की सुरक्षा व सुविधा हेतु चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अन्तर्गत 28 मई को होने जा रही स्टाफ नर्स की सीधी भर्ती परीक्षा को प्रदेश के दो जनपदों की बजाय सभी जनपदों में आयोजित करने के निर्देश दिये हैं। बोर्ड द्वारा इसकी व्यवस्था करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध करने पर मुख्यमंत्री ने उक्त परीक्षा को स्थगित कर मध्य जून तक आयोजित करने के निर्देश दिये हैं।
मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि वर्तमान कोविड-19 संक्रमण की स्थिति में अभ्यर्थियो को आने जाने में असुविधा न हो, आवास की परेशानी ना हो और एक साथ अधिक भीङ न हो, इसलिए यह परीक्षा सभी जनपदों में करायी जाए , साथ ही यह भी निर्देश दिये की सभी जनपदों में परीक्षा को ले कर तैयारी शीघ्र पूरी कर ली जायें ।


प्रदेश के पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने पेयजल विभाग के अधिकारियों की बैठक लेते हुए निर्देश दिए कि कोरोना के साथ रोजगार को भी प्राथमिकता दी जाए। विभिन्न पेयजल परियोजना कार्यों में तेजी लाएं। मजदूरों के भुगतान में विलंब न किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी कार्य धरातल पर दिखाई देने चाहिए।
शुक्रवार को विधानसभा में पेयजल विभाग के अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। जिसमें पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने निर्देश दिए कि मानसून से पूर्व समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली जाए। कहा कि टैंकों की सफाई के साथ हाईपो-ब्लीचिंग कर दिया जाए। फिल्टर-चैम्बर की सफाई करा ली जाए। उन्होंने नमामि गंगे मिशन की विभिन्न योजनाओं में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। गोपेश्वर, जोशीमठ परियोजना में तेजी लाई जाए।
उन्होंने कहा कि एसटीपी का उच्चीकरण एवं नवीन एसटीपी का समय पर कार्य पूर्ण कर लिया जाए। कहा कि साॅलिड वेस्ट-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट का कार्य किया जाए, साथ ही उन्होंने गांव के खुले पानी को नाले से जोड़ने के निर्देश दिए। इसी प्रकार उन्होंने सभी मरम्मत कार्य समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में सचिव नीतिश झा, अपर सचिव उदयराज, मुख्य अभियंता एससी पंत, एमडी एसके पंत सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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एम्स ऋषिकेश द्वारा गरूड़ टेलीमेडिसिन उत्तराखण्ड परियोजना के माध्यम से जनपद के विभिन्न तहसील हेतु समय सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक तथा दोपहर 02 बजे से रात्रि 08 बजे तक निःशुल्क परामर्श हेतु सम्पर्क नम्बर जारी किये गये हैं। परियोजना का उद्देश्य प्रशिक्षित कोविड देखभाल प्रदाताओं के माध्यम से उत्तराखण्ड के दुर्गम क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन सेवाएं प्रदान करना है।
जिलाधिकारी डाॅ. विजय कुमार जोगदण्डे ने कहा कि जनपद के अन्तर्गत निःशुल्क टेलीमेडिसिन परामर्श हेतु तहसील चाकीसैंण व थलीसैंण हेतु सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक के लिए सम्पर्क नम्बर 8447240934, 9784623409, 8171646669, 7454840626 तथा दोपहर 02 से रात्रि 08 बजे तक के लिए सम्पर्क नं. 6396273643, 9315409228, 7001408749, 8218697479 जारी किये गये हैं। इसी प्रकार तहसील पौड़ी व श्रीनगर हेतु सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक के लिए सम्पर्क नम्बर 9599772212, 7678390034, 9557851589, 8130244262 तथा दोपहर 02 से रात्रि 08 बजे तक के लिए सम्पर्क नं. 7985879969, 9756587801, 7906656083, 9557569181, तहसील सतपुली एवं चैबट्टाखाल हेतु सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक के लिए सम्पर्क नम्बर 9870750329, 7055994368, 7017697629, 8008154411 तथा दोपहर 02 से रात्रि 08 बजे तक के लिए सम्पर्क नं. 8449018792, 9306169483, 9354989512, 8218730361, तहसील लैंसडोन एवं धुमाकोट हेतु सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक के लिए सम्पर्क नम्बर 9068343154, 8126889450, 8923071118, 7247879881 तथा दोपहर 02 से रात्रि 08 बजे तक के लिए सम्पर्क नं. 9013221582, 8433455209, 8171740634, 9149207348, तहसील कोटद्वार एवं यमकेश्वर हेतु सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक के लिए सम्पर्क नम्बर 8535076874, 7895322139, 8383022145, 9101261787 तथा दोपहर 02 से रात्रि 08 बजे तक के लिए सम्पर्क नं. 9149287009, 8979696726, 8279725501, 9756449228 जारी किये गये हैं। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में इस सेवा का लाभ उठाने को कहा है।

 

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