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कड़क बाप की बेटी का कड़क फैसला

 

नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी

 

उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य ही रहा है कि 42 बलिदानों के बाद मिले इस राज्य की बागडोर उन लोगों के हाथ रही जिन्होंने इसके निर्माण आन्दोलन में कोई हाथ नहीं रहा है। जिन लोगों के हाथ सत्ता गयी उन्हें इसके निर्माण का उद्देश्य ही मालूम नहीं रहा है इसलिए उन्होंने इसे चारागाह समझकर चरना शुरू कर दिया ।

राज्य में लोकतंत्र का मंदिर में विधानसभा के अध्यक्षों पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने जिस तरह अपने अपने लोगों को विधानसभा में नियुक्त किया वह जनता के साथ नाइंसाफी का एक उदाहरण है।
जनता में जब इन अध्यक्षों के इस कथित अविवेक पूर्ण निर्णय का भेद खुला तब पूरे प्रदेश की जनता स्तम्भित रह गयी।आज के इस स्वार्थी युग में भी जनता कुछ पदों जैसे प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्रियोॆ,न्यायाधीशों,मुख्यमंत्री,विधान सभा अध्यक्ष,मंत्रियों आदि से निष्पक्षता की उम्मीद रखते हैं पर उत्तराखण्ड में जो भर्ती घपले घोटालों का जिन्न बाहर निकला उससे अब किसी पर विश्वास करना आसान नहीं था,परन्तु यहां के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री पुष्करसिंह धामी ने इन सब की जाँच करवाने की पहल की। उनका यह कदम जनता में एक उम्मीद जगाता है।
विधान सभा में पिछले अध्यक्षों द्वारा कथित अपने-अपने लोगों को लगाने का खेल जब उजागर हुआ तब वर्तमान विधान सभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण विदेश दौरे पर थीं।मुख्यमंत्री ने उन्हें पत्र लिख कर इन बैकडोर भर्ती के आरोंपों के जाँच का आग्रह किया। वहाँ से लौट कर विधानसभा अध्यक्ष ने जनता की उम्मीद के अनुसार फैसला लेकर जनता के मन में उम्मीद जगा दी। विधानसभा अध्यक्ष ने सबसे पहले विधानसभा सचिव श्री मुकुल कुमार सिंघल के कक्ष पर ताला लगा कर उन्हें अवकाश पर जाने को विवश कर दिया और यह निर्देश भी दिया कि उन्हें जांच समिति के बुलाने पर उपस्थित होना पड़ेगा।
दूसरा काम इन्होंने यह किया कि एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इस समिति में 1-श्री दलीप कुमार कोटिया जो 1981 बैच के आईएएस अधिकारी व राज्य के मुख्य सचिव पद से मार्च 2013 में सेवा निवृत हुए हैं तथा वर्तमान में वह राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष पद भी संभाल रहे है को (अध्यक्ष) 2-श्री सुरेन्द्र सिंह रावत जो 1996 बैच के आईएएस तथा सचिव पद से 2013 में सेवामुक्त होकर प्रदेश के आयुक्त राज्य सूचना आयोग के पद पर रहे हैं एवं कार्मिक मामलों के विशेषज्ञ व कड़क छवि वाले रहे हैं को (सदस्य) 3-श्री अवनेन्द्र सिंह नयाल जो जो 1997 बैच के आईएएस एवं सचिव पद से 2016 सेवामुक्त हुए हैं वे सचिव कार्मिक व अन्य कई पदों पर कार्य कर चुके हैं को (सदस्य) हैं।तीनों प्रदेश के पूर्व कार्मिक सचिव रहे हैं तथा इन मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं।साथ ही बहुत ईमानदार छवि वाले हैं। कमेटी को इन सबकी जांच कर एक महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण के इस कदम की जनता में उनकी छवि बहुत अच्छी बनी।उनका यह कहना कि वे मोदी जी के” न खाऊंगा न खाने दूँगा” के उद्घोष वाक्य पर चलती हैं। इस स्वार्थ भरे युग में वे चाहती तो इस प्रकरण को अपने पूर्ववर्तियों का कार्य कह कर इसे दबा भी सकती थीं पर उन्होंने ऐसा नहीं किया और अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री,पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेज(रि.)भुवनचन्द्र खण्डूडी की तरह ईमानदारी से जनहित का निर्णय लिया।जो कि एक कड़क फैसला है। तभी तो जनता कह रही है “कड़क बाप की बेटी का कड़क फैसला।”
अब समिति अगर यह मानती है कि किसी को भी किसी भी प्रकार से नियुक्ति देना विधानसभाध्यक्ष का अधिकार है तो सभी नियुक्तियां वैध मानी जाएंगी। यदि समिति को उन नियुक्तियों में कानून का उलंघन मिलता है तब श्रीमती ऋतु खँडूड़ी भूषण क्या निर्णय लेती हैं वही उनकी भावी छवि को तय करेगा।

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