उपराष्ट्रपति ने युवाओं से ग्रामीण सेवा को एक मिशन के रूप में अपनाने की अपील की#दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए कंपोजिट रीजनल सेंटर (सीआरसी) के मुख्य भवन के ई-उद्घाटन के दौरान आज ई-न्यूजलेटर का शुभारंभ#विद्युत क्षेत्र में सुधार के लिए प्रतिबद्ध राज्यों को बढ़ी हुई बाजार उधार राशि के जरिए प्रोत्साहित किया गया। Janswar.com

उपराष्ट्रपति ने देश की प्रगति में ग्रामीण विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए युवाओं से ग्रामीण सेवा को एक मिशन के रूप में अपनाने की अपील की

युवाओं में कौशल विकास जनसांख्यिकीय अंश प्राप्त करने की कुंजी: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने स्वर्ण भारत ट्रस्ट, विजयवाड़ा स्थित कौशल विकास केंद्र में प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की

उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडु ने आज इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण विकास में तेजी लाना राष्ट्र के विकास का अभिन्न अंग है। इस संबंध में उन्होंने उद्योग जगत के नेताओं और उद्यमी युवाओं से ग्रामीण सेवा को एक मिशन के तौर पर लेने की अपील की, जिसमें विशेष रूप से महिला सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। 

आंध्रप्रदेश के दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने स्वर्ण भारत ट्रस्ट,विजयवाड़ा में कौशल विकास के विविध कार्यक्रमों के प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की।

प्रतिभागियों की कड़ी मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए श्री नायडु ने कहा कि वह उनमें हमेशा ऊर्जा और नवाचार के प्रति ललक देखने को उत्साहित हैं। उन्होंने उन्हें उनके क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और नवीनतम प्रौद्योगिकी से खुद को हमेशा अद्यतन रहने के लिए उनका उत्साहवर्धन किया।

श्री नायडु ने जनसांख्यिकी अंश और देश के युवाओं में ‘अंतर्निहित प्रतिभा’को प्रकट करने में कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। एक समर्पित कौशल विकास मंत्रालय बनाकर कौशल विकास को बढ़ावा देने को लेकर सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने सरकार के प्रयासों को पूरा करने के लिए और अधिक से अधिक व्यक्तिगत व निजी संस्थागत पहल करने की अपील की।

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विद्युत क्षेत्र में सुधार के लिए प्रतिबद्ध राज्यों को बढ़ी हुई बाजार उधार राशि के जरिए प्रोत्साहित किया गया।

चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 20 राज्यों ने योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए अपनी रुचि दिखाई है।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने जून, 2021 में राज्य सरकारों को अतिरिक्त उधार लेने की अनुमति देने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया था। इसके लिए विद्युत क्षेत्र में विशिष्ट सुधार करने और इसे बनाए रखने की शर्त लगाई गई है। विद्युत मंत्रालय की इस योजना के कार्यान्वयन लिए आरईसी लिमिटेड नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रही है।

विद्युत क्षेत्र के सुधारों के लिए स्वीकृत अतिरिक्त उधार सीमा संबंधित राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 0.5 फीसदी है। यह योजना के मौजूदा स्वरूप का पहला वर्ष है। इसे देखते हुए सुधारों व कार्यों की जरूरतों को सरल रखा गया है, आने वाले वर्षों के लिए सीमा तय किए गए हैं और राज्यों को उच्च स्तरीय सुधारों की ओर बढ़ाया जा रहा है। इस योजना के तहत राज्य सुधारों के लिए प्रतिबद्ध हो सकते हैं और ~80,000 करोड़ रुपये की बढ़ी हुई उधारी प्राप्त करने के पात्र हो सकते हैं। यह योजना सुधारों के लिए प्रतिबद्ध राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठा दृष्टिकोण अपनाती है और इसके बदले बढ़े हुए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता का लाभ उठाती है।

चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 20 राज्यों ने योजना के तहत लाभ लेने में अपनी रुचि दिखाई है। विद्युत मंत्रालय की सिफारिशों के आधार पर वित्त मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी थी और राज्य ने पहले ही 2100 करोड़ रुपये से अधिक की उधारी ले ली है, जिससे आंशिक रूप से इस तरह के अतिरिक्त उधार ली हुई राशि का उपयोग किया जा सके। वहीं, मणिपुर और राजस्थान के प्रस्ताव भी वित्त मंत्रालय सक्रिय रूप से विचार कर रहा है। दोनों राज्य विद्युत क्षेत्र में अपने किए गए सुधारों के आधार पर 0.50 फीसदी बढ़ी हुई उधारी की अधिकतम सीमा प्राप्त करने के पात्र हो सकते हैं। इनके अलावा बाकी राज्य भी अपना प्रस्ताव जमा कर रहे हैं।

यह उल्लेखनीय है कि पिछले साल भी इस योजना का थोड़े अलग रूप में लागू किया गया था। इसने 24 राज्यों लाभान्वित होने और 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त उधार सीमा प्राप्त करने में सक्षम हुए। इस तरह की योजना को शुरू करने से मिली सीख और राज्यों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर राज्यों को अपने विद्युत क्षेत्र में वृद्धिशील सुधार जरूरतों को पूरा करने के लिए इस साल ढांचे को संशोधित किया गया। इस योजना में कई प्रावधान संशोधित वितरण क्षेत्र योजना की तरह हैं, जो विद्युत मंत्रालय की एक सुधार आधारित और परिणामोन्मुखी योजना है। इन दोनों योजनाओं की समानताओं में वार्षिक लेखों का समय पर प्रकाशन, टैरिफ याचिका दाखिल करना, टैरिफ आदेश जारी करना, यूनिट-वार सब्सिडी लेखांकन, ऊर्जा खातों का प्रकाशन और नवीन तकनीकों को अपनाना आदि शामिल हैं। ये दोनों योजनाएं राज्यों को अतिरिक्त राशि से लाभ उठाने का अवसर देती हैं, जो आधारभूत सुधारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के साथ-साथ संबंधित परिणामों को प्रदर्शित करने में सक्षम होने के आधार पर उपलब्ध होती है।

वर्तमान में केंद्रीय योजनाओं जैसे कि दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई), एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) और सौभाग्य के तहत पहले से ही बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है। इसके अलावा सभी इच्छुक परिवारों में विद्युत आपूर्ति प्रदान करने के लक्ष्य को पूरा करने के बाद भारत सरकार सभी उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे, गुणवत्ता, विश्वसनीय और सस्ती विद्युत उपलब्ध कराने के उद्देश्य के साथ-साथ क्षेत्र के परिचालन को अधिक मजबूत करने, कुशल और टिकाऊ बनाने की दिशा में अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। इस तरह केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत वित्त पोषण को अब उन सुधारों से जोड़ दिया दिया गया है, जिसे कोई भी राज्य करने के लिए तैयार है और इन सुधारों को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए प्रगतिशील राज्य सरकारों को संबंधित वित्तीय सहायता प्रदान किया जाता है।

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केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कोझिकोड में कौशल विकास, पुनर्वास और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए कंपोजिट रीजनल सेंटर (सीआरसी) के मुख्य भवन के ई-उद्घाटन के दौरान आज ई-न्यूजलेटर का शुभारंभ किया

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार ने आज शाम समग्र क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र (सीआरसी), कोझिकोड के मुख्य भवन के उद्घाटन के दौरान विभाग का पहला द्विमासिक ई-समाचार पत्र का शुभारंभ किया।

 

 

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा ई-न्यूजलेटर का शुभारंभ एक सार्थक पहल है। इसमें दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में लोगों को जानकारी दी जाएगी और वे इससे लाभ ले सकेंगे। हमारी सरकार का मूल मंत्र सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वामित्र और सबका प्रयात हैं। हमें उम्मीद है कि यह ई-न्यूजलेटर इस दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। डॉ वीरेंद्र कुमार ने विभाग के पहले द्विमासिक ई-न्यूजलेटर के शुभारंभ के दौरान कहा, मुझे उम्मीद है कि विभाग इस ई-न्यूजलेटर को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

 

 

मंत्री जी ने केरल में रहने वाले दिव्यांगजनों को विभिन्न सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 48,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में निर्मित सीआरसीआरई, कोझिकोड के प्रशासनिक भवन का भी उद्घाटन किया। इससे दिव्यांगों के लिए एक ही छत के नीचे विभिन्न सेवाएं प्रदान की जाएंगी। सीआरसी के नवनिर्मित भवन में कोझिकोड क्लीनिकल एंड रिहैबिलिटेशन सेवाएं आदि एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी। श्री वीरेंद्र कुमार ने कहा की हमारा देश दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम प्रधानमंत्री के विजन को लागू करेंगे और दिव्यांगजनों के लिए बाधा मुक्त वातावरण बनाएंगे और साथ ही दिव्यांगजन को विशेष रूप से और सामान्य रूप से मानवता के उत्थान के लिए पुनर्वास सेवाएं प्रदान करेंगे ।

 

इस कार्यक्रम के दौरान श्री अबैय्या नारायणस्वामी, सुश्री प्रतिमा भौमिक, श्री रामदास आठवले, राज्य मंत्री सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री, राज्य मंत्री, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय, श्री राजीव चंद्रशेखर, राज्य मंत्री, विदेश और संसदीय कार्य मंत्रालय, श्री वी. मुरलीधरन, उच्च शिक्षा तथा सामाजिक न्याय मंत्री, केरल सरकार, प्रो. आर. बिंदु , सांसद श्री. एम. के. राघवन, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की सचिव, सुश्री अंजलि भावड़ा, एनआईईपीएमडी, चेन्नई के निदेशक श्री. नचिकेता राउत भी उपस्तिथ रहे |

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