उत्तराखण्ड में आय प्रमाणपत्र की वैधता 6 माह के स्थान पर एक साल होगी।#राज्य में पर्यटन सुविधा एवं निवेश प्रकोष्ठ का निर्माण किया जायेगा-मुख्यमंत्री#राज्य के उत्पादों के भौगोलिक संकेतांक(ज्योग्राफिकल इण्डिकेशन) का वितरण समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया।# मुख्यसचिव ने दिल्ली में निर्माणाधीन भवन “उत्तराखण्ड निवास” की समीक्षा की।www.janswar.com(जनस्वर डॉट कॉम

-अरुणाभ रतूड़ी

 

उत्तराखण्ड शासन ने जन सामान्य की सुविधा के लिए आय प्रमाण पत्र की वैधता 6 माह के स्थान पर 1 वर्ष किए जाने सम्बंधी आदेश जारी कर दिए हैं। अपर सचिव  डॉ आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में लागू सेवा का अधिकार अधिनियम 2011 के अंतर्गत अधिसूचित सेवा आय प्रमाण पत्र की वैधता अवधि 6 माह के स्थान पर 1 वर्ष किए जाने हेतु आदेश जारी किए गए हैं । अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव यह भी बताया कि  e-district पोर्टल पर आय प्रमाण पत्र का नया प्रारूप अपलोड किए जाने संबंधित कार्रवाई जल्दी सुनिश्चित की जाएगी।


राज्य में पर्यटन सुविधा एवं निवेश प्रकोष्ठ का निर्माण किया जायेगा-मुख्यमंत्री

 

  • नवंबर, 2021 में रामनगर में साहसिक कार्य पर निवेश सम्मेलन किया जायेगा।
  • खेल विभाग की ओर से पंडित नैन सिंह सर्वेयर पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थान पर्यटन विभाग को सौंपा जाएगा।
  • पर्यटन मंत्रालय के तहत एक ईकोटूरिज्म विंग का गठन किया जाएगा।
  • सॉलिटेयर फार्म मालसी में विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने की घोषणा।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सॉलिटेयर फार्म मालसी, देहरादून में उत्तराखण्ड एडवेंचर फेस्ट में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने पर्यटन पर आधारित लगाई गई प्रदर्शनियों का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पर्यटन परियोजनाओं के विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक पर्यटन सुविधा एवं निवेश प्रकोष्ठ का निर्माण किया जायेगा। पर्यटन उद्योगों से संबंधी सभी प्रस्तावों पर विशेष रूप से पर्यटन विभाग द्वारा ही कार्यवाही की जायेगी, न कि उद्योग विभाग के द्वारा। शहरी विकास विभाग और आवास विभाग विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों के लिए बहुस्तरीय कार- लिफ्ट स्थान स्थापित करने के लिए एक परियोजना शुरू की जायेगी। नवंबर, 2021 में कुमाऊं के रामनगर में साहसिक कार्य पर निवेश सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा। खेल विभाग की ओर से पंडित नैन सिंह सर्वेयर पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थान पर्यटन विभाग को सौंपा जाएगा। उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को एक स्थायी, पर्यावरण के अनुकूल उद्योग के रूप में विकसित करने के मार्ग तलाशने के लिए पर्यटन मंत्रालय के तहत एक समर्पित ईकोटूरिज्म विंग का गठन किया जाएगा। ईकोटूरिज्म विंग का उद्देश्य दीर्घकालिक विचारों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक सहभागिता व सामाजिक नेतृत्व की भागीदारी के साथ ईकोटूरिज्म का विकास सुनिश्चित करना होगा।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जाना जाता है। उत्तराखण्ड में पर्यटन के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं। हर साल करोड़ों में पर्यटक यहां आते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं से उत्तराखंड को पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा मिलेगा। ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेलवे लाइन जैसे निर्माण कार्य आज उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे हैं। राज्य में सड़क, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ी है। विभिन्न क्षेत्रों में नई पॉलिसी लाई जा रही है एवं उनका सरलीकरण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चार धाम यात्रा प्रारंभ हो चुकी है, इस दौरान यात्रियों को किसी तरह की तकलीफ ना हो इसके लिए हरसंभव सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान पर्यटन से जुड़े लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा ऐसे लोगों को सरकार ने 200 करोड़ का आर्थिक पैकेज दिया। जो धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में जा रही है। उत्तराखंड को आने वाले दस वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में नंबर वन राज्य बनाने का प्रयास किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन एवं ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि हमार मूल मंत्र है कि हम सर्विस प्रोवाइडर बनें। पर्यटकों को जितनी अधिक सुविधाएं मिलेंगी एवं पर्यटन आधारित गतिविधियां जितनी अधिक बढ़ेगी। इस क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को उतना ही फायदा होगा। पर्यटन रोजगार को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हवाई, सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी में तेजी से सुधार हो रहे हैं सरकार का प्रयास है कि राज्य में कनेक्टिविटी को बढ़ाकर पर्यटन एवं तीर्थाटन को बढ़ावा दिया जाय। हम पर्यटन के साथ ही प्रदूषण रहित पर्यटन पर भी ध्यान दे रहे हैं। राज्य में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने पर कार्य किया जा रहा है।
उद्योग मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन की दृष्टि से अनेक महत्वपूर्ण स्थल हैं। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में अनेक सराहनीय कार्य हुए हैं। अनेक नये टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित हो रहे हैं।
सचिव पर्यटन श्री दिलीप जावलकर ने कहा कि  विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित इस दो दिवसीय उत्तराखण्ड एडवेंचर फेस्ट में पर्यटन एवं उससे संबंधित गतिविधियों के बारे में लोगों को जागरूक करने के प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का सभी तक लाभ पहुंचे इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। विश्व पर्यटन दिवस की इस वर्ष की थीम ‘‘समावेशी विकास के लिए पर्यटन‘‘ है। पिछले दो साल में कोरोना के कारण  विश्वभर में पर्यटन से जुड़े लोगों के कार्य प्रभावित हुए हैं। राज्य में पर्यटन के साथ ही साहसिक गतिविधयों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस अवसर पर फिक्की के टूरिज्म विंग की राज्य संयोजक डॉ. नेहा शर्मा, श्रीमती किरन टोडरिया एवं पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोग उपस्थित थे।


उत्तराखण्ड सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में बौद्विक सम्पदा भारत के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य के उत्पादों के भौगोलिक संकेतांक(ज्योग्राफिकल इण्डिकेशन) का वितरण समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मा0 कृषि मंत्री श्री सुबोध उनियाल एवं मा0 उद्योग मंत्री श्री गणेश जोशी द्वारा राज्य के सात उत्पादों(कुमांऊ च्यूरा ऑयल, मुनस्यारी राजमा, उत्तराखण्ड का भोटिया दन, उत्तराखण्ड ऐंपण, उत्तराखण्ड रिंगाल क्राफ्ट, उत्तराखण्ड ताम्र उत्पाद एवं उत्तराखण्ड थुलमा) को भौगोलिक संकेतांक( ज्योग्राफिक इन्डिकेशन) प्रमाण पत्र वितरित किये गए।
कार्यक्रम के अवसर पर मा0 प्रधानमंत्री के सलाहकार श्री भास्कर खुल्बे एवं सचिव डीपीआईआईटी भारत सरकार श्री अनुराग जैन द्वारा वीडियो कान्फ्र्रेन्स के माध्यम से प्रतिभाग किया गया।
इस दौरान मा0 कृषि मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य के लिए बहुत बड़े गौरव का विषय है कि यहां के मौलिक उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलती जा रही है। कहा कि वोकल फॉर लोकल और स्थानीय प्रोडक्ट के प्रचार-प्रसार में जीआई टैग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्थानीय प्रोडक्ट को देश के साथ ही इंटरनेशनल मार्केट में पहचान दिलाने मे जीआई टैग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में और भी अनेक ऐसे परम्परागत कृषि उत्पाद है जो अपने भौगोलिक क्षेत्र विशेष के आधार पर लगातार वैश्विक पहचान बनाते जा रहे है। उत्तराखण्ड में कुल 6.48 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि हैं जिसमें 3.50 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल पर परम्परागत कृषि उत्पादों का उत्पादन हो रहा है। अभी तक तेजपत्ता प्रदेश का पहला जीआई टैग प्राप्त करने वाला उत्पाद था। उन्होंने कहा कि उपरोक्त के अतिरिक्त उत्तराखण्ड सरकार के निर्देशन पर उत्तराखण्ड लाल चावल, बेरीनाग चाय, उत्तराखण्ड गहत, उत्तराखण्ड मण्डुआ, उत्तराखण्ड झंगोरा, उत्तराखण्ड बुरांस सरबत, उत्तराखण्ड काला भट्ट, उत्तराखण्ड चौलाई/रामदाना, अल्मोड़ा लाखोरी मिर्च, उत्तराखण्ड पहाड़ी तोर दाल, उत्तराखण्ड माल्टा फ्रूट जैसे 11 कृषि उत्पादों का जीआई टैग लिये जाने का कार्य भी फाईल कर दिया गया है।
इस दौरान उद्योग मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि जिन उत्पादों को भौगोलिक संकेतांक प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए है, अब उन उत्पादों की मार्केट में ब्राडिंग बढ़ने से अधिक डिमांड बढ़ेगी तथा उनको अच्छा मूल्य प्राप्त होगा। जिससे इन उत्पादों से जुड़े हुए उत्पादक सीधे-सीधे लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार के निर्देशन पर अन्य उत्पादों का जीआई टैग किये जाने का भी कार्य जारी है।
इस कार्यक्रम के अवसर पर तकनीकी कार्यशाला का भी आयोजन किया गया जिसमें पदमश्री डॉ रजनीकांत एवं उप रजिस्ट्रार,  जीआई श्री सचिन शर्मा द्वारा भौगोलिक संकेतांक से सम्बन्धित जानकारी प्रदान की गई।
इस दौरान कार्यक्रम में संयुक्त सचिव, डीपीआईआईटी भारत सरकार श्रीमती श्रुति सिंह, व संयुक्त सचिव, डीपीआईआईटी भारत सरकार श्री राजेन्द्र रतनू, सचिव कृषि एवं उद्यान श्री मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव श्रीमती राधिका झा, महानिदेशक/आयुक्त उद्योग श्री रोहित मीणा, निदेशक उद्योग श्री सुधीर चन्द्र नौटियाल, निदेशक कृषि श्री गौरीशंकर सहित उद्योग एवं कृषि विभाग के अधिकारी/कर्मचारी तथा प्रदेश से आए हुए जैविक किसान/काश्तकार सभागार में उपस्थित थे तथा अन्य लोग विभिन्न जनपदों से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

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मुख्य सचिव डॉ.एस.एस.सन्धु ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित निर्माणाधीन भवन “उत्तराखण्ड निवास” की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड निवास पूरे प्रदेश का प्रतिबिंब और उत्तराखंडी संस्कृति का आईना होना चाहिए। उन्होंने उत्तराखण्ड निवास निर्माण की कार्यदायी संस्था उत्तराखण्ड पेयजल निगम को उत्तराखण्ड निवास में डिजाइन की कमियों और सौंदर्यीकरण कार्यों में सुधार लाने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्माणाधीन भवन के उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखते हुए इसे निर्धारित समय सीमा में पूरा करना सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव द्वारा उत्तराखण्ड निवास के नक्शे का अवलोकन करते हुए भवन के सभी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने उत्तराखण्ड भवन में गाडियों की पार्किंग व्यवस्था की भी जानकारी लेते हुए पार्किंग एरिया को अधिक खुला और सुधार किये जाने के निर्देश दिये ।
इसके साथ ही, मुख्य सचिव द्वारा पीडब्लूडी के अधिकारियों से भी उत्तराखण्ड सदन में किये जाने वाले रेनोवेशन/नवीकरण एवं रखरखाव के कार्यो की विस्तृत जानकारी ली गई। उन्होंने निर्देश दिए कि भवन निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले ऐसे मैटेरियल को प्रयोग किया जाए, जिसे कम से कम मेंटेनेंस की आवश्यकता पड़े। उन्होंने भवन के एंट्रेंस और रिसेप्शन को बहुत खूबसूरती के साथ बनाया जाए। उन्होंने गुणवत्ता के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी चेक की व्यवस्था किए जाने के भी निर्देश दिए।
इस अवसर पर स्थानिक आयुक्त डॉ0 वी0वी0आर0सी0 पुरुषोत्तम, अपर सचिव/राज्य सम्पत्ति अधिकारी श्री प्रताप सिंह शाह, पेयजल निगम अधिशासी अभियन्ता श्री राकेश चन्द्र, मुख्य व्यवस्था अधिकारी श्री रंजन मिश्रा एवं उत्तराखण्ड पेयजल निगम स्थानिक अभियंता श्री अरविन्द सैनी, लोक निर्माण विभाग सहायक अभियन्ता श्री प्रदीप कुमार, सहायक अभियन्ता श्री गौरव वर्मा उपस्थित थे।

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