आंशिक ही सही मुख्यमंत्री ने जनाकांक्षा तो पूरी की।पढिएJanswar.com में

आंशिक ही सही मुख्यमंत्री ने जनता की मांग तो पूरी की।

लेख-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी

गैरसैण के ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की अप्रत्याशित घोषणा कर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विरोधियों को चारों खाने चित्त कर दिया है।विरोधी चाहे दूसरे दल के रहे हो या अपने दल के,उनकी घोषणा से सभी स्तम्भित रह गये।
विरोधी दल जब सदमे से बाहर आए तो उन्होंने इस घोषणा का विरोध अपने अपने ढंग से करना शुरू कर दिया है।कोई कह रहा है कि राज्य दो दो राजधानियों का व्यय नहीं उठा पाएगा।कोई इसे जनता के साथ छलावा बता रहा है।कोई इसे झुनझुना बता रहा है।
ये दल जब सत्ता में थे तो इन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी नहीं बनायी।ये दल 2022 केआम चुनाव के लिए इसे जिन्दा रखना चाहते हैं।ताकि इसे चुनाव में मुद्दा बनाया जा सके।यद्यपि यह अब भी स्थायी राजधानी के रूप में मुद्दा बना रहेगा।पर इसकी धार कुंद हो जाएगी।
इस राज्य बनने के बाद जो पहली निर्वाचित सरकार बनी (2002-2007)वह कांग्रेस की थी।उसने स्थायी राजधानी की कोई बात नहीं की।दूसरे कार्यकाल (2012-2017)में उसे सुध आयी और उसने विधानसभा भवन तो बनाया पर स्थायी राजधानी पर वह भी चुप रही। गैरसैंण के साथ-साथ वे रायपुर में भी शिलान्यास की बात करने लगे थे।ऐसे स्थिति में जनता ने उन्हें करारी हार दे दी।मुख्यमंत्री दो जगह से चुनाव हार गये।
भाजपा की अंतरिम सरकार के समय(2000-2002) भी व दूसरी निर्वाचित सरकार (2007-2012) में भी यह प्रश्न गौंण ही रहा।2017 में भाजपा जीती और त्रिवेन्द्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने तो सबने यह मान लिया कि अब गैरसैंण पिकनिक स्थल ही रहेगा। पर दिन प्रतिदिन अपने नेतृत्व में निखार लाने वाले मुख्यमंत्री ने जब गैरसैण में बजट सत्र रखवाया तो सभी दलों को स्थाई राजधानी की याद आयी। ये लोग अपनी गुगली फेंक भी न पाये कि उस पर मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा का छक्का जड़ दिया। बॉलर सहित सहित सभी खिलाड़ी चित्रवत् जड़ से हो गये।
निसंदेह हमें मुख्यमंत्री की इस घोषणा का स्वागत करना चाहिए जिन्होंने बड़े साहस से काम लेकर गैरसैंण को ग्रीष्म कालीन ही सही, राजधानी का मान तो दिया। उनसे पूर्व के मुख्यमंत्री भी यह कर सकते थे पर नहीं किया। यूकेडी यद्यपि पूर्ण रूप से सत्ता में नहीं रही पर चुनाव में उनके तीन विधायक,दूसरे में चार विधायक (जिनमें से एक कैबिनेट मंत्री बने ),तीसरे में एक विधायक (जो कैबिनेट मंत्री बने)रहे पर किसी ने विधानसभा में गैरसैंण स्थायी राजधानी का प्रस्ताव तक पास नहीं करवाया।हाँ विधान सभा के बाहर जरूर वे गाहे बगाहे गैरसैंण -गैरसैंण खेलते रहे हैं पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कहां सुनाई देती है।
जैसा कि दस्तूर है अच्छे काम के लिए दुश्मन को भी बधाई देना। विरोधी दलों ने तो यह परम्परा भी नहीं निभायी।किसी ने इस नेक काम के लिए मुख्यमंत्री को बधाई भी नहीं दी और सीधे विरोध पर उतर गये।
मुख्यमंत्री के इस कदम से सत्ता पर उनकी पकड़ और मजबूत हुई है। जनता की एक महती इच्छा को आंशिक ही सही उन्होंने पूरी तो की।इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।उनके साथ साथ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष भी बधाई के पात्र हैं।

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